शनि — कुंभक स्वामी — जन्मराशि सँ द्वितीय भाव मे छथि। अर्थात् कुंभ राशिक साढ़े सातीक तेसर, उतरैत चरण चलि रहल अछि। साढ़े सातीक अर्थ अछि चंद्र राशि सँ द्वादश, प्रथम आ द्वितीय भाव मे शनि; कुंभ अंतिम सीढ़ी पर अछि आ 3 जून 2027 केँ ओ समाप्त होयत।
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उतरैत साढ़े साती — अंतिम आ सभसँ व्यावहारिक परीक्षा
द्वितीय भावक अर्थ अछि संचित धन, परिवार, अन्न आ वाणी। साढ़े सातीक तेसर चरण मे शनि एही घर मे रहैत छथि, तेँ एहि चरणक परीक्षा शरीरक नहि — घर आ पाइक व्यवस्थाक होइत अछि। जनवरी 2023 सँ शुरू भेल कुंभक साढ़े सातीक ई अंतिम चढ़ाव अछि।
शनिए कुंभक स्वामी छथि, आ अपन राशिक स्वामीक साढ़े साती दोसर राशि जकाँ तीख नहि होइत अछि। एहि चरण मे प्रायः ई होइत अछि — परिवारक जरूरति एकाएक बढ़ि जाइत अछि, बूढ़-पुरान लोकनिक जिम्मेदारी माथ पर अबैत अछि, बाजल शब्द सँ नोकसान होइत अछि आ खर्च काबू मे नहि रहैत अछि। मुदा ओही समय पछिला पाँच वर्षक मेहनतिक फल सेहो एही चरण मे देखाय लगैत अछि।
चतुर्थ, अष्टम आ एकादश भाव पर दृष्टि
द्वितीय भावक शनिक तृतीय, सप्तम आ दशम दृष्टि कुंभ राशिक चतुर्थ, अष्टम आ एकादश भाव पर पड़ैत अछि।
चतुर्थ भाव पर तृतीय दृष्टि सौम्य होइतो मकान आ माताक विषय सोझाँ अनैत अछि। अष्टम भाव पर सप्तम दृष्टि बीमा, उत्तराधिकार आ जीवनसाथीक आर्थिक विषय दिस ध्यान खिंचैत अछि — एहि अवधि मे पैघ रकमक जमानत टारू। एकादश भाव पर दशम दृष्टि लाभ भाव पर अछि आ अनुकूल मानल जाइत अछि; आय धीरे-धीरे मुदा निश्चित रूप सँ सुधरैत अछि।
एकटा स्पष्टीकरण महत्वपूर्ण अछि — दृष्टिक चतुर्थ आ अष्टम भाव पर पड़ब ढैया नहि थिक। ढैया तखने कहबैत अछि जखन शनि स्वयं चतुर्थ वा अष्टम भाव मे बैसल होथि। कुंभक मामिला मे शनि द्वितीय भाव मे बैसल छथि, तेँ ई साढ़े सातीक चरण थिक, ढैयाक नहि। राहत ई जे 2 जून 2026 सँ उच्च गुरुक नवम दृष्टि ठीक कुंभक द्वितीय भाव पर, अर्थात् शनिए पर पड़ैत अछि।
वक्री शनि, सिमरिया धाम आ मौनी अमावस्या
27 जुलाई 2026 केँ शनि 20°31' पर वक्री होइत छथि आ 11 दिसंबर केँ 13°41' पर मार्गी। राशि-स्वामीक वक्री होयबाक कारणेँ कुंभ केँ एहि साढ़े चारि मास मे सभसँ बेसी अंतर्मुखता अनुभव होइत अछि। द्वितीय भावक वक्री शनिक सटीक अर्थ — चुकता भेल सन लगैत पुरान कर्ज, बिसरल घरेलू लेन-देन वा परिवार मे बाजबाक कारणेँ भेल पुरान झगड़ा फेर सोझाँ अबैत अछि। ओकरा टारू नहि; उतरैत साढ़े साती मे जे मेटाइत अछि से सदाक लेल मेटाइत अछि।
ओही समय 31 अक्टूबर 2026 केँ गुरुक सिंह मे चलि गेलासँ द्वितीय घर पर हुनक राहत देनिहारि दृष्टि हटि जाइत अछि; नवंबर 2026 सँ जनवरी 2027 साढ़े सातीक दृष्टि सँ सभसँ भारी तीन मास अछि। 11 दिसंबर 2026 क बाद शनि मार्गी आ 25 जनवरी 2027 क बाद गुरुक दृष्टि वापस — ओतय सँ जून 2027 धरि उतरैत साढ़े साती तेजी सँ समाप्त होइत जाइत अछि।
उपाय मे बेगूसराय जिलाक सिमरिया धाम एहि राशि लेल कहल जाइत अछि — गंगाक उत्तरी तट पर मिथिलाक प्रवेशद्वार, जतय माघ आ कातिक मे गंगा-स्नान लेल मिथिलाक दूर-दूर सँ लोक अबैत छथि। व्रत मे माघक मौनी अमावस्या — मौन रहि कऽ स्नान आ तिल-दानक दिन; उतरैत साढ़े साती मे वाणीक संयमे सभसँ पैघ उपाय थिक, आ ई व्रत ठीक वैह सिखबैत अछि। द्वितीय भाव दाँत, आँखि आ गला सँ जुड़ल अछि — एहि अंतिम चरण मे तीनूक जाँच करा लिअ।
❓ कुंभ राशि — प्रायः पुछल जाए बला प्रश्न
कुंभ राशिक साढ़े साती कोन चरण मे अछि आ कहिया समाप्त होयत?
कुंभ राशिक साढ़े साती तेसर अर्थात् उतरैत चरण मे अछि — शनि मीन मे, कुंभ सँ द्वितीय भाव मे। ओ जनवरी 2023 मे शुरू भेल आ 3 जून 2027 केँ शनिक मेष मे गेलापर समाप्त होयत।
की कुंभ राशि केँ ढैया अछि?
नहि। शनिक दृष्टि कुंभक चतुर्थ आ अष्टम भाव पर पड़ैत अछि, मुदा ढैया तखने कहबैत अछि जखन शनि स्वयं चतुर्थ वा अष्टम भाव मे बैसल होथि। कुंभक मामिला मे शनि द्वितीय भाव मे बैसल छथि, तेँ ई साढ़े सातीक चरण थिक।
कुंभ राशि लेल सभसँ भारी मास कोन-कोन अछि?
नवंबर 2026 सँ जनवरी 2027। 31 अक्टूबर 2026 केँ गुरुक सिंह मे चलि गेलासँ द्वितीय घर पर हुनक राहत देनिहारि दृष्टि हटि जाइत अछि। 11 दिसंबर 2026 क बाद शनि मार्गी होइत छथि आ 25 जनवरी 2027 क बाद गुरुक दृष्टि घुरि अबैत अछि।
📅 एहि गोचरक जाँचल तिथि
- 29 मार्च 2025 — शनि कुंभ सँ मीन मे; 17 मई 2026 केँ रेवती नक्षत्र मे।
- 27 जुलाई 2026 — शनि मीनक 20°31' पर वक्री।
- 9 अक्टूबर 2026 — वक्री शनि रेवती सँ पुनः उत्तरा भाद्रपद मे; 11 दिसंबर 2026 केँ 13°41' पर मार्गी।
- 3 जून 2027 — शनि मीन छोड़ि मेष मे; ई गोचर समाप्त।
गणना निरयन (लाहिरी) पद्धति सँ, भारतीय मानक समय मे।