🪐 नओ ग्रह — एक नजरि मे
| ग्रह | स्वामी राशि | उच्च | नीच | रत्न |
|---|---|---|---|---|
| ☀️ सूर्य | सिंह | मेष (10°) | तुला | माणिक्य (Ruby) |
| 🌙 चंद्र | कर्क | वृषभ (3°) | वृश्चिक | मोती (Pearl) |
| 🔴 मंगल | मेष, वृश्चिक | मकर (28°) | कर्क | मूंगा (Coral) |
| 💚 बुध | मिथुन, कन्या | कन्या (15°) | मीन | पन्ना (Emerald) |
| 🟡 गुरु (बृहस्पति) | धनु, मीन | कर्क (5°) | मकर | पुखराज (Yellow Sapphire) |
| 🌸 शुक्र | वृषभ, तुला | मीन (27°) | कन्या | हीरा (Diamond) |
| ⚫ शनि | मकर, कुंभ | तुला (20°) | मेष | नीलम (Blue Sapphire) |
| 🌑 राहु | मिथुन/कन्या (मित्र) | वृषभ/मिथुन | वृश्चिक/धनु | गोमेद (Hessonite) |
| 🔮 केतु | धनु/मीन (मित्र) | वृश्चिक/धनु | मिथुन/मीन | लहसुनिया (Cat's Eye) |
📐 ग्रह-बल कोना पढ़ल जाइत अछि
ग्रहक फल मात्र राशि पर नहि, एहू बात पर निर्भर करैत अछि जे ओ ककरा संग बैसल अछि आ कोन अंश पर अछि। पराशर पद्धति मे प्रत्येक ग्रहक नैसर्गिक मित्र, शत्रु आ सम ग्रह निश्चित अछि; एकरा संग ‘दिग्बल’ — अर्थात् कोन भाव मे ग्रहकेँ सभसँ बेसी बल भेटैत अछि — एकटा अलग माप अछि। प्रत्येक ग्रहक पूरा सूची ओकर अपन पृष्ठ पर देल गेल अछि।
एकटा नियम प्रायः छूटि जाइत अछि: नैसर्गिक मैत्री स्थिर अछि, मुदा तात्कालिक मैत्री प्रत्येक कुंडली मे अलग होइत अछि — जे ग्रह दोसर सँ दोसर, तेसर, चारिम, दसम, एगारहम वा बारहम भाव मे हो, ओ तात्कालिक मित्र थिक। दुनूकेँ मिलाकऽ पंचधा मैत्री बनैत अछि, आ असली पाठ ओतहि सँ शुरू होइत अछि। दोसर नियम अंशक अछि: उच्च राशि मे रहब आ परमोच्च अंश पर रहब एक बात नहि।
❓ सामान्य प्रश्न
की राहु आ केतु वास्तविक ग्रह छथि?
नहि। ई चंद्रमाक कक्षा आ सूर्य-पथक दू छेदन बिंदु अछि — उत्तरबला राहु, दक्षिणबला केतु। ग्रहण ठीक एतहि लगैत अछि, आ एही कारणें पुराणमे हिनका प्रकाशकेँ ग्रसनिहार कहल गेल अछि।
रत्न धारण करबासँ पहिने की देखबाक चाही?
लग्न। प्रत्येक लग्न लेल कोन ग्रह शुभ अछि आ कोन मारक, से अलग होइत अछि। उदाहरण लेल मेष लग्नमे शनि दू अशुभ भावक स्वामी छथि, तेँ नीलम धारण करब प्रायः सदिखन गलत अछि।
नवग्रहक क्रम एहन किएक अछि?
सूर्य, चंद्र, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, शनि, राहु, केतु — ई क्रम वारसँ जुड़ल अछि। पहिल सातक नामसँ सप्ताहक सात दिन बनल; राहु-केतु छाया ग्रह होएबाक कारणें अंतमे अबैत छथि।
एकटा ग्रह कमजोर हो तँ की पूरा जीवन खराब रहैत अछि?
नहि। ग्रहक फल दशाक अनुसार अबैत अछि। जाहि ग्रहक दशा नहि चलि रहल अछि, ओकर फल प्रायः अनुभवमे नहि अबैत अछि। विंशोत्तरी दशा पद्धतिक मूल यैह अछि — 120 वर्षक एक चक्र, नौ ग्रहमे बाँटल।