☎ मैथिली ज्योतिष सेवा 📅 16 October 2026

🟡 नवग्रह — गुरु (बृहस्पति) (Jupiter)

Navagraha Maithili | गुरु (बृहस्पति) Planet | Vedic Astrology

🟡 गुरु (बृहस्पति) — Jupiter ग्रहक विवरण

गुरु (बृहस्पति) ज्ञान, धर्म, संतान, विवाह आ गुरुक कारक छथि — नवग्रहमे सभसँ शुभ।

🏠 स्वामी राशिधनु, मीन 📈 उच्चकर्क (5°)
📉 नीचमकर 💎 रत्नपुखराज (Yellow Sapphire)
📅 वारगुरुवार 🎨 रंगपीयर
🕉️ आराध्य देवबृहस्पति, दक्षिणामूर्ति, विष्णु
🙏 मंत्रॐ बृं बृहस्पतये नमः
🏛️ प्रमुख मंदिरबृहस्पति मंदिर (वाराणसी)

📊 गुरु (बृहस्पति) ग्रहक फल

✅ बलवान गुरु (बृहस्पति) — शुभ फल

ज्ञान, संतान-सुख, गुरु-कृपा। विवाह सहज। आध्यात्मिक उन्नति।

⚠️ निर्बल गुरु (बृहस्पति) — चुनौती

विवाह मे विलंब, संतान-चिंता। शिक्षा मे बाधा।

📖 गुरु (बृहस्पति) क विषय मे

गुरु (बृहस्पति) नवग्रहमे सभसँ शुभ 'देवगुरु' छथि। ज्ञान, धर्म, शिक्षा, संतान आ विवाह-सुख हिनक कारकत्व अछि। गुरु जाहि भावकेँ देखैत छथि, ओकरा शुभ फल दैत छथि — हिनक 5, 7 आ 9म दृष्टि विशेष अछि।

गुरु धनु आ मीनक स्वामी छथि, कर्क (5°) मे उच्च आ मकरमे नीच। उच्च गुरुसँ 'हंस योग' (पंच महापुरुष योग) बनैत अछि, जे जातककेँ समाजमे सम्मानित आ मार्गदर्शक बनबैत अछि।

बृहस्पतिदिन बृहस्पति/विष्णुक पूजा, पीयर वस्त्र, बूटक दालि आ केराक दान गुरुकेँ बलवान करैत अछि। पुखराज गुरुक रत्न अछि।

🎯 गुरु (बृहस्पति) कथीक कारक छथि

गुरु नवग्रहमे सभसँ बेसी भावक कारक छथि — द्वितीय, पंचम, नवम आ एकादश, अर्थात धन, संतान, धर्म आ लाभ चारू। स्त्रीक कुंडलीमे ओ पति-कारक सेहो छथि।

हिनक असली बल दृष्टिमे अछि। गुरु पंचम, सप्तम आ नवम भाव केँ देखैत छथि, आ परंपरागत पाठमे हिनक दृष्टि पड़ला पर कमजोर भाव सेहो बचि जाइत अछि। एकरे ‘गुरुक दृष्टि सदा शुभ’ कहल जाइत अछि।

🏠 स्वामित्व, मूलत्रिकोण आ उच्च-नीच अंश

गुरु धनु आ मीनक स्वामी छथि। मूलत्रिकोण धनुक 0° सँ 10°। उच्च कर्क 5°, नीच मकर 5°।

दुनू राशिक अंतर पाठमे काज अबैत अछि: धनु अग्नि आ द्विस्वभाव अछि — एतए गुरु नियम, विधि आ शिक्षाक रूप लैत छथि; मीन जल अछि — एतए ओ श्रद्धा आ वैराग्यक रूप। एके ग्रह, दू भिन्न व्यक्ति।

⏳ गुरु (बृहस्पति) क दशाक स्वभाव

गुरु महादशा सोलह वर्षक अछि। पुनर्वसु, विशाखा वा पूर्वा भाद्रपदमे जन्म हो तँ ई पहिल दशा होइत अछि।

स्वभाव — ‘विस्तार’। एहि सोलह वर्षमे अधिकांश जातकक विवाह, संतान, उच्च शिक्षा वा पहिल घर पड़ैत अछि। मुदा विस्तार सदिखन लाभ नहि होइत अछि: कमजोर वा नीच गुरुक दशामे खर्च, आकार आ वचन तीनू एक संग बढ़ि जाइत अछि। शनिक अंतर्दशा एहि दशाक सभसँ शिक्षाप्रद भाग अछि।

🌿 गुरु (बृहस्पति) लेल व्यावहारिक उपाय

बृहस्पति दिन चनाक दालि आ हरदिक दान, कोनो शिक्षकक सच्चा सम्मान, आ जे सलाह मँगने रही तकर पालन — अंतिम बाते गुरुक असली पूजा अछि।

महिषी (सहरसा) — मंडन मिश्र आ भारतीक गाम, जतए शंकराचार्यसँ शास्त्रार्थक कथा आइयो सुनाओल जाइत अछि — मिथिलामे गुरु-शिष्य आ शास्त्र-परंपराक प्राचीन केंद्र मानल जाइत अछि। गुरुक क्षेत्रमे चूक सदिखन एके होइत अछि: सलाह माँगब आ फेर नहि मानब।

❓ गुरु (बृहस्पति) ग्रह — प्रश्नोत्तर

गुरु चांडाल योग की अछि?

जखन गुरु आ राहु एके भावमे होथि तँ ई बनैत अछि। फल होइत अछि सलाह आ सिद्धांत पर संदेह; मुदा गुरु बलवान होथि तँ एकर तीव्रता बहुत घटि जाइत अछि।

गुरु मकरमे नीच होथि तँ की करी?

पहिने देखू जे नीच भंग भए रहल अछि वा नहि — मकरक स्वामी शनि केंद्रमे होथि तँ नीचत्व भंग भए जाइत अछि। नीच गुरुक अर्थ अशुभ नहि, फल देरीसँ अछि।

की गुरुक दशामे विवाह निश्चित अछि?

निश्चित नहि, मुदा संभावना बेसी — विशेषकए स्त्रीक कुंडलीमे, जतए ओ पति-कारक छथि। तथापि सप्तम भाव, ओकर स्वामी आ चलि रहल अंतर्दशा देखने बिना निर्णय नहि होइत अछि।

🕌 गुरु (बृहस्पति) क उपाय आ पूजा

📿 मंत्र

ॐ बृं बृहस्पतये नमः

108 बेर जप करू — विशेष रूप सँ गुरुवार केँ

🛕 मंदिर

बृहस्पति मंदिर (वाराणसी)

💎 रत्न

पुखराज (Yellow Sapphire) — ज्योतिषीक परामर्श सँ धारण करू