शनि 29 मार्च 2025 सँ मीन मे छथि आ मीन मेष सँ बारहम राशि अछि। अर्थात् मेष राशिक साढ़े सातीक पहिल चरण चलि रहल अछि; ओ 3 जून 2027 केँ समाप्त होयत आ तखन जन्म शनिक दोसर चरण आरंभ होयत।
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द्वादश भावक शनि आ नीचक प्रभाव
द्वादश भावक अर्थ अछि खर्च, निन्न, परदेस, अस्पताल आ एकांत। शनि एतय अबैत छथि तँ पाइ फालतू मे नहि, जरूरी काज मे जाइत अछि — इलाज, पढ़ाइ, यात्रा, मरम्मति। मंगल मेषक स्वामी छथि आ मंगल-शनि परंपरा सँ शत्रु, तेँ एहि साढ़े साती मे मेष केँ सभसँ बेसी जे अनुभव होइत छैक से अछि गतिक रुकब — काज रुकैत नहि अछि, मुदा सभ बात मे दोबर समय लगैत अछि।
एकटा राहतक बात सेहो अछि। शनि मेष राशि मे नीच होइत छथि, अर्थात् मेषक मामिला मे शनिक बल मूलतः कम रहैत अछि। साढ़े सातीक पहिल चरण तीनू मे सभसँ हल्लुक मानल जाइत अछि आ ओहि मे नीचक पक्ष सेहो जुड़ि जाइत अछि। पुरान संबंधक छुटब, शहर बदलब आ निन्नक समय बिगड़ब — यैह एहि चरणक असली लक्षण थिक, कोनो पैघ विपत्ति नहि।
शनिक तीनू दृष्टि मेषक कोन-कोन भाव पर
शनि अपन स्थान सँ तृतीय, सप्तम आ दशम भाव केँ देखैत छथि। द्वादश भावक शनिक ई तीनू दृष्टि मेष राशिक द्वितीय, षष्ठ आ नवम भाव पर पड़ैत अछि।
द्वितीय भाव पर तृतीय दृष्टि — जे शनिक तीनू दृष्टि मे सभसँ सौम्य आ परिश्रमक फल देनिहारि मानल जाइत अछि — परिवार आ संचय पर अनुशासन अनैत अछि। खर्च बढ़ितो एही दृष्टिक कारणेँ मेष जातक केँ बचतक आदति लगैत छनि।
षष्ठ भाव पर सप्तम दृष्टि शत्रु, कर्ज आ प्रतिस्पर्धाक घर पर अछि — ओतय शनिक दृष्टि उनटे अनुकूल मानल जाइत अछि, किएक तँ षष्ठ भाव शनि केँ सुहाइत छनि। नवम भाव पर दशम दृष्टि भाग्य आ पिताक घर पर पड़ैत अछि; पिताक स्वास्थ्यक चिंता आ तीर्थयात्राक योग दुनू एही दृष्टिक फल थिक। एकटा स्पष्ट बात — मेष केँ एखन ढैया नहि अछि। ढैयाक अर्थ अछि चंद्र राशि सँ चतुर्थ वा अष्टम भाव मे शनि; मेषक कंटक शनि 2035 क बाद आ अष्टम शनि 2045 क बाद आओत।
वक्री शनि, श्यामा माइ दरभंगा आ शनि अमावस्या
27 जुलाई 2026 केँ शनि मीनक 20°31' पर वक्री होइत छथि आ 11 दिसंबर 2026 केँ 13°41' पर मार्गी। एहि साढ़े चारि मास मे ओ पाछाँ हटैत 9 अक्टूबर 2026 केँ रेवती सँ फेर उत्तरा भाद्रपद नक्षत्र मे चलि जाइत छथि — अर्थात् एक पूरा नक्षत्र पाछाँ चलैत छथि।
मेष लेल एकर व्यावहारिक अर्थ ई जे द्वादश घरक जे खर्च खतम भेल सन लगैत छल, से फेर ठाढ़ भऽ जाइत अछि। पुरान जाँच फेर सँ करयबाक पड़ब, रोकल विदेश-आवेदन फेर खुजब वा पाछाँ छोड़ल शहरक काज फेर हाथ आयब — यैह एहि अवधिक सामान्य अनुभव थिक। वक्री शनि नव संकट नहि अनैत छथि, अधूरा छोड़ल काज घुरा अनैत छथि। 11 दिसंबर 2026 क बाद वैह विषय तेजी सँ निपटैत अछि; जनवरी सँ मई 2027 मेष लेल एहि चरणक सभसँ खुजल समय अछि।
उपाय मे दरभंगाक श्यामा माइ मंदिर एहि राशि लेल कहल जाइत अछि — दरभंगा राज परिसर मे महाराज रामेश्वर सिंहक चिता पर बनल माँ कालीक प्रसिद्ध स्थान। व्रत मे शनि दिन पड़ऽ वला शनि अमावस्या; ओहि दिन तिलक तेलक दीप आ उड़िदक खिचड़ीक दान मिथिलाक परंपरा अछि। मंगल स्वामी होयबाक कारणेँ मंगल दिन हनुमान चालीसाक पाठ जोड़ीक उपाय अछि। नीलम रत्न ई राशि ज्योतिषीक सलाह बिना कदापि नहि पहिरथि।
❓ मेष राशि — प्रायः पुछल जाए बला प्रश्न
मेष राशिक साढ़े साती कहिया शुरू भेल आ कहिया समाप्त होयत?
शनि 29 मार्च 2025 केँ मीन मे अयलाह आ मीन मेष सँ बारहम राशि अछि; तहिये सँ मेषक साढ़े सातीक पहिल चरण चलि रहल अछि। 3 जून 2027 केँ शनि मेष मे जयताह आ तखन जन्म शनिक दोसर चरण शुरू होयत।
27 जुलाई सँ 11 दिसंबर 2026 धरि वक्री शनिक मेष पर की असर अछि?
शनि मीनक 20°31' सँ पाछाँ हटि 13°41' पर अबैत छथि आ 9 अक्टूबर 2026 केँ रेवती सँ फेर उत्तरा भाद्रपद मे चलि जाइत छथि। मेष लेल एकर अर्थ अछि द्वादश घरक खतम भेल सन लगैत खर्च आ अधूरा काज फेर सोझाँ आयब — नव संकट नहि।
की मेष राशि केँ ढैया अछि?
नहि। ढैयाक अर्थ अछि चंद्र राशि सँ चतुर्थ वा अष्टम भाव मे शनि। मेषक चतुर्थ भाव वला कंटक शनि तखन आओत जखन शनि कर्क मे जयताह — लगभग 2035 क बाद — आ अष्टम शनि, शनिक वृश्चिक मे रहैत, 2045 क बाद।
📅 एहि गोचरक जाँचल तिथि
- 29 मार्च 2025 — शनि कुंभ सँ मीन मे; 17 मई 2026 केँ रेवती नक्षत्र मे।
- 27 जुलाई 2026 — शनि मीनक 20°31' पर वक्री।
- 9 अक्टूबर 2026 — वक्री शनि रेवती सँ पुनः उत्तरा भाद्रपद मे; 11 दिसंबर 2026 केँ 13°41' पर मार्गी।
- 3 जून 2027 — शनि मीन छोड़ि मेष मे; ई गोचर समाप्त।
गणना निरयन (लाहिरी) पद्धति सँ, भारतीय मानक समय मे।