📐 ई योग कोना बनैत अछि?
छठम, आठम आ बारहम भाव केँ दुःस्थान कहल जाइत अछि। जखन एहि तीनू मे सँ कोनो भावक स्वामी एही तीनू मे सँ कोनो भाव मे स्थित भ' जाथि — जेना षष्ठेश आठम मे, अष्टमेश बारहम मे अथवा द्वादशेश छठम मे — तखन विपरीत राज योग बनैत अछि।
एकर तीन प्रसिद्ध भेद अछि: षष्ठेश सँ हर्ष, अष्टमेश सँ सरल आ द्वादशेश सँ विमल योग। सिद्धांत ई अछि जे दुःस्थानक स्वामी दोसर दुःस्थान मे जा क' अपनहि मूल भावक हानि करैत छथि, आ एहि प्रकारेँ अनिष्ट स्वयं नष्ट भ' जाइत अछि।
योग तखने पूर्ण फल दैत अछि जखन ओ ग्रह कोनो शुभ ग्रह सँ दृष्ट वा युत नहि होथि। शुभ ग्रहक संपर्क विपरीत राज योग केँ कमजोर करैत अछि। संगहि लग्नेशक बलवान होयब एतहु आवश्यक शर्त अछि, अन्यथा संकट तँ अबैत अछि मुदा ओहि सँ उठबाक शक्ति नहि भेटैत अछि।
✨ फल
सामान्य फल
विपरीत राज योगक स्वरूप विचित्र अछि — एकर फल संकटक बाद भेटैत अछि, संकटक बिना नहि। प्रतिस्पर्धा, मोकदमा, बीमारी वा हानिक कोनो पैघ दौर सँ गुजरलाक बादे जातक असाधारण ऊँचाइ पबैत छथि।
तीनू भेदक फल
हर्ष योग शत्रु-नाश, रोग-मुक्ति आ प्रतिस्पर्धा मे विजय दैत अछि। सरल योग दीर्घायु, संकट सँ उबरबाक क्षमता आ अकस्मात धन-लाभ दैत अछि। विमल योग व्यय पर नियंत्रण, स्वतंत्र आजीविका आ सम्मानजनक जीवन दैत अछि।
कार्यक्षेत्र
विधि, अपराध-अन्वेषण, चिकित्सा, बीमा, ऋण-वसूली, संकट-प्रबंधन आ अनुसंधान — एहन क्षेत्र जतय दोसरक कठिनाइ सोझरबय पड़ैत अछि, एहि योगवला जातक लेल सर्वोत्तम अछि।
सावधानी
ई योग सुविधा नहि, सामर्थ्य दैत अछि। एकर फल पयबाक लेल संघर्ष सँ भागबाक नहि चाही। जे व्यक्ति कठिन परिस्थिति अबितहि मैदान छोड़ि दैत छथि, हुनक कुंडलीक विपरीत राज योग निष्क्रिय पड़ल रहैत अछि।
उपाय
हनुमान जीक उपासना, नियमित शारीरिक श्रम, रोगी आ वंचित लोकक सेवा तथा शनिवार केँ अन्न-दान एहि योगक शक्ति केँ जाग्रत रखैत अछि।
🔮 की अहाँक कुंडली मे ई योग अछि?
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