📐 ई योग कोना बनैत अछि?
पंच महापुरुष योग पाँच योगक समूह अछि, जे मात्र मंगल, बुध, बृहस्पति, शुक्र आ शनि — एहि पाँच तारा ग्रह सँ बनैत अछि। शर्त एकेटा अछि: एहि मे सँ कोनो ग्रह लग्न सँ केंद्र (1, 4, 7, 10) मे होथि आ संगहि अपन स्वराशि अथवा उच्च राशि मे स्थित होथि।
मंगल सँ रुचक, बुध सँ भद्र, बृहस्पति सँ हंस, शुक्र सँ मालव्य आ शनि सँ शश योग बनैत अछि। सूर्य आ चंद्रमा एहि समूह मे सम्मिलित नहि छथि, कारण शास्त्र मे हुनका ग्रहद्वयक भिन्न श्रेणी मे राखल गेल अछि।
ई ध्यान राखब आवश्यक अछि जे मात्र स्वराशि-केंद्र होयब पर्याप्त नहि। जँ ओ ग्रह अस्त होथि, वक्री भ' क' दुर्बल होथि, अथवा पाप ग्रह सँ घेरल होथि तँ महापुरुष योग नाममात्रक रहि जाइत अछि। चंद्रमा सँ सेहो केंद्र बनय तँ फल कैक गुना बढ़ि जाइत अछि।
✨ फल
सामान्य फल
पंच महापुरुष योग जाहि ग्रह सँ बनैत अछि, ओही ग्रहक श्रेष्ठतम गुण जातकक व्यक्तित्व मे प्रकट होइत अछि। शास्त्र मे कहल गेल अछि जे एहन जातक साधारण जीवन नहि जीबैत छथि — कोनो ने कोनो क्षेत्र मे हिनक विशिष्ट पहिचान अवश्य बनैत अछि।
पाँचो योगक संक्षिप्त परिचय
रुचक सँ पराक्रम आ सेनानायक सन तेज, भद्र सँ बुद्धि आ वाक्-चातुर्य, हंस सँ ज्ञान आ धार्मिक प्रतिष्ठा, मालव्य सँ सौंदर्य, कला आ वैभव, तथा शश सँ अधिकार, भूमि आ जन-नेतृत्व भेटैत अछि।
कोन योग सभसँ बलवान
जँ योगकारक ग्रह दशम भाव मे होथि तँ प्रसिद्धि सभसँ बेसी भेटैत अछि; लग्न मे होथि तँ व्यक्तित्व आ शरीर पर प्रभाव सभसँ स्पष्ट देखाइत अछि; चतुर्थ मे होथि तँ सुख-संपत्ति आ सप्तम मे होथि तँ जीवनसाथी तथा साझेदारीक माध्यम सँ उन्नति होइत अछि।
सावधानी
एहि योगक संग आबयवला आत्मगौरव जँ अहंकार बनि जाय तँ योग स्वयं अपन फल नष्ट क' दैत अछि। संगहि योगक फल संबंधित ग्रहक दशे मे पूर्ण रूप सँ भेटैत अछि।
उपाय
योगकारक ग्रहक वार-व्रत, हुनक बीज मंत्रक नियमित जप आ ओही ग्रह सँ संबंधित वस्तुक दान एहि योग केँ आर प्रबल करैत अछि।
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