📐 ई योग कोना बनैत अछि?
धन योग द्वितीय भाव (धन), एकादश भाव (लाभ), पंचम भाव (पूर्व पुण्य) आ नवम भाव (भाग्य) क स्वामीक परस्पर संबंध सँ बनैत अछि। एहि मे सँ कोनो दूटाक स्वामी एक संग बैसि जाथि, एक-दोसर केँ देखथि अथवा राशि-परिवर्तन क' लेथि तँ धन योग निर्मित होइत अछि।
सभसँ प्रबल संयोग धनेश आ लाभेशक अछि। जँ हिनका संग बृहस्पति वा शुक्र सन शुभ ग्रह सेहो जुड़ि जाथि तँ योग आर बलवान होइत अछि। दोसर भाव मे बैसल बलवान बृहस्पति स्वयं एकटा स्वतंत्र धन योग मानल गेल छथि।
जँ धनेश वा लाभेश 6, 8, 12 भाव मे चलि जाथि, नीच राशि मे होथि अथवा अस्त भ' जाथि तँ योग निष्फल भ' जाइत अछि। द्वितीय भाव पर पाप ग्रहक दृष्टि सेहो संचय केँ रोकैत अछि — एहि स्थिति मे आय तँ होइत अछि मुदा धन टिकैत नहि अछि।
✨ फल
सामान्य फल
धन योगवला जातक केँ जीवन मे आर्थिक अभाव बेसी दिन धरि नहि झेलय पड़ैत छनि। आयक एक सँ बेसी स्रोत बनैत अछि आ संकटक समय मे सेहो कतहु ने कतहु सँ सहायता भेटि जाइत अछि।
धनक स्रोत
कोन भाव योग मे सम्मिलित अछि, ताहि सँ धनक स्रोत तय होइत अछि — द्वितीय भाव सँ संचय आ पैतृक संपत्ति, एकादश सँ व्यापार आ मित्र सँ लाभ, पंचम सँ बुद्धि, निवेश आ सट्टा, तथा नवम सँ भाग्य, विदेश आ गुरु-कृपा।
दशा-काल
धन योग मे सम्मिलित ग्रहक दशा-अंतर्दशा मे आय अचानक बढ़ैत अछि। एही अवधि मे भवन-वाहनक प्राप्ति, व्यापारक विस्तार अथवा पैघ राशिक वसूली होइत अछि।
सावधानी
धन योग कमायब सिखबैत अछि, सम्हारब नहि। बिना बजट आ बिना निवेश-योजनाक ई योग मात्र आमद बढ़बैत अछि, संपत्ति नहि। व्यय भावक स्वामी बलवान होथि तँ खर्चो ओही गति सँ बढ़ैत अछि।
उपाय
शुक्रवार केँ लक्ष्मी-उपासना, श्री सूक्तक पाठ, तिजोरी वा गल्ला केँ स्वच्छ राखब, आयक किछु अंश नियमित दान करब तथा कमाइक एकटा निश्चित प्रतिशत अनिवार्य रूप सँ बचत मे राखब एहि योग केँ सार्थक बनबैत अछि।
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