📐 ई योग कोना बनैत अछि?
सूर्य सँ दोसर भाव मे चंद्रमा केँ छोड़ि कोनो ग्रह — मंगल, बुध, बृहस्पति, शुक्र अथवा शनि — स्थित होथि, तखन वेसि योग बनैत अछि। राहु आ केतु केँ एहि गणना मे सम्मिलित नहि कयल जाइत अछि।
ई सूर्य-आश्रित योग मे पहिल अछि। एकर फल पूर्ण रूप सँ एहि बात पर निर्भर अछि जे ओतय कोन ग्रह बैसल छथि — शुभ ग्रह होथि तँ योग शुभ, पाप ग्रह होथि तँ फल मिश्रित भऽ जाइत अछि।
बृहस्पति वा शुक्र सँ बनल वेसि योग सर्वोत्तम अछि। शनि वा मंगल सँ बनल योग मे परिश्रम बेसी आ फल विलंब सँ भेटैत अछि। जँ बुध अनस्त होथि तँ योग बुद्धि आ व्यापार मे विशेष लाभ दैत अछि।
✨ फल
सामान्य फल
वेसि योगवला जातक मे सत्यनिष्ठा आ स्थिरता होइत अछि। ई बातक धनी होइत छथि आ अपन वचन सँ पाछाँ नहि हटैत छथि, जाहि सँ लोक मे हिनक विश्वसनीयता बनल रहैत अछि।
स्वभाव
स्वभाव मे संयम रहैत अछि आ अनावश्यक विवाद सँ ई दूर रहैत छथि। परिश्रम पर विश्वास करैत छथि आ छोट बाट सँ बचैत छथि।
कार्यक्षेत्र
सूर्य सँ जुड़ल क्षेत्र — प्रशासन, सरकारी सेवा, चिकित्सा, ऊर्जा-उद्योग आ सार्वजनिक उपक्रम — एहि योगवला जातक लेल अनुकूल अछि। संग बैसल ग्रहक अनुसार क्षेत्र मे विशेषता जुड़ि जाइत अछि।
सावधानी
जँ पाप ग्रह सँ योग बनल होअय तँ आलस्य, विलंब आ आर्थिक अस्थिरताक संभावना रहैत अछि। एहन स्थिति मे सूर्य केँ बल देबयवला उपाय विशेष आवश्यक भऽ जाइत अछि।
उपाय
रवि दिन सूर्य केँ अर्घ्य, जेना छठि मे देल जाइत अछि, आदित्य हृदय स्तोत्रक पाठ, गुड़ आ गहूमक दान तथा पिताक सम्मान एहि योगक फल केँ बढ़बैत अछि।
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