📐 ई योग कोना बनैत अछि?
नवम भावक स्वामी — भाग्येश — बलवान भऽ कऽ केंद्र वा त्रिकोण मे स्थित होथि, तथा लग्नेश सेहो बलवान होथि, तखन लक्ष्मी योग बनैत अछि। भाग्येशक स्वराशि, उच्च राशि वा मूल त्रिकोण मे रहब योग केँ पूर्ण बनबैत अछि।
जँ भाग्येश आ लग्नेशक बीच युति, दृष्टि अथवा राशि-परिवर्तनक संबंध बनि जाय तँ योग आरो प्रबल भऽ जाइत अछि। शुक्रक एहि संयोग मे सम्मिलित होयब विशेष शुभ मानल गेल अछि।
जँ भाग्येश 6, 8 वा 12म भाव मे चलि जाथि, अस्त होथि अथवा नीच राशि मे होथि तँ लक्ष्मी योग भंग भऽ जाइत अछि। लग्नेशक निर्बलता सेहो एहि योग केँ निष्फल कऽ दैत अछि, किएक तँ भाग्य केँ ग्रहण करबाक सामर्थ्य लग्नहि सँ अबैत अछि।
✨ फल
सामान्य फल
लक्ष्मी योग स्थायी समृद्धि आ सामाजिक प्रतिष्ठाक योग अछि। एहन जातक केँ जीवन मे धनक अभाव नहि रहैत अछि आ संकटक समय सेहो कतहु ने कतहु सँ बाट निकलि अबैत अछि।
भाग्य आ सहयोग
नवम भाव भाग्यक थिक, तेँ ई योग अनपेक्षित सहायता दियबैत अछि। पिता, गुरु आ वरिष्ठ जनक सहयोग जीवन भरि भेटैत रहैत अछि।
कार्यक्षेत्र
वित्त, बैंकिंग, आभूषण, वस्त्र, अचल संपत्ति, विदेश-व्यापार, उच्च शिक्षा आ धार्मिक-सांस्कृतिक संस्था — एहि क्षेत्र सभ मे ई योग विशेष लाभ दैत अछि।
सावधानी
सुविधाक अधिकता कखनो-कखनो परिश्रमक धार भोथ कऽ दैत अछि। संगहि, भाग्यक भरोसे बैसि जायवला जातक एहि योगक पूरा फल नहि लऽ पबैत छथि।
उपाय
शुक्र दिन लक्ष्मी-उपासना आ श्री सूक्तक पाठ, बृहस्पति दिन पीयर वस्त्रक दान, घरक गोसाउनिक सीरक स्वच्छता तथा आयक एक अंश नियमित दान — ई सभ एहि योग केँ स्थायी बनबैत अछि।
🔮 की अहाँक कुंडली मे ई योग अछि?
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