📐 ई योग कोना बनैत अछि?
चंद्रमा सँ दोसर आ बारहम — दुनू भाव मे कोनो ग्रह नहि होथि, तखन केमद्रुम योग बनैत अछि। एहि गणना मे सूर्य तथा राहु-केतु केँ प्रायः सम्मिलित नहि कयल जाइत अछि, कारण सूर्य चंद्रमाक सहचर नहि मानल गेल छथि।
एहि योग केँ दुर्योग कहल गेल अछि, कारण चंद्रमा — मनक कारक — दुनू दिस सँ रिक्त रहि जाइत छथि। कोनो ग्रहक सहारा नहि भेटला सँ मन केँ स्थिरता नहि भेटैत अछि।
मुदा शास्त्र मे एकर भंगक अनेक नियम सेहो देल गेल अछि। जँ चंद्रमा केंद्र मे होथि, बृहस्पति चंद्रमा केँ देखैत होथि, चंद्रमा स्वयं उच्च वा स्वराशिक होथि, अथवा लग्न सँ केंद्र मे कोनो ग्रह बैसल होथि — तँ केमद्रुम योग भंग भ' जाइत अछि आ साधारण वा शुभ फल देबय लगैत अछि। व्यवहार मे अधिकांश कुंडली मे ई योग भंगे भेटैत अछि।
✨ फल
सामान्य फल
अभंग स्थिति मे ई योग मानसिक अशांति, एसगरपनक अनुभूति आ जीवन मे बेर-बेर उतार-चढ़ाव दैत अछि। निर्णय लेबा मे झिझक आ आत्मविश्वासक कमी सेहो एकर लक्षण अछि।
जीवन पर प्रभाव
प्रारंभिक जीवन मे संघर्ष बेसी रहैत अछि आ सहायता कम भेटैत अछि। परिश्रमक अनुपात मे मान्यता देरी सँ अबैत अछि। परिवार सँ दूर रहि आजीविका करबाक स्थिति सेहो बेर-बेर बनैत अछि।
सकारात्मक पक्ष
ई योग जातक केँ आत्मनिर्भर बना दैत अछि। ककरो पर निर्भर नहि रहबाक जे क्षमता संघर्ष सँ विकसित होइत अछि, ओ आगाँ चलि क' सभसँ पैघ शक्ति सिद्ध होइत अछि। अनेक स्वनिर्मित सफल व्यक्तिक कुंडली मे ई योग भेटैत अछि।
ध्यान राखय योग्य बात
कोनो कुंडली मे केमद्रुम योग देखि घबरायब उचित नहि। पहिने भंगक नियमक जाँच करबाक चाही। भंग भेला पर ई योग प्रायः कोनो विशेष अनिष्ट नहि करैत अछि।
उपाय
सोमवारक व्रत, शिव-उपासना, चंद्रमाक बीज मंत्रक जप, उज्जर वस्तुक दान, माता तथा वृद्ध स्त्रीगणक सेवा आ नियमित ध्यान एहि योगक दोष केँ बहुत हद धरि शांत करैत अछि।
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