📐 ई योग कोना बनैत अछि?
कहल योगक दू प्रमुख प्रकार कहल गेल अछि। पहिल — चतुर्थेश आ नवमेश परस्पर केंद्र मे होथि आ लग्नेश बलवान होथि। दोसर — चतुर्थेश अपना सँ चतुर्थ वा दशम भाव मे स्थित होथि आ नवमेश बलवान होथि।
ई योग सुख भाव आ भाग्य भाव केँ जोड़ैत अछि, तेँ एहि मे पराक्रमक संग स्थायी संपत्तिक सेहो संकेत भेटैत अछि। लग्नेशक बलवान रहब एतय अनिवार्य शर्त अछि, अन्यथा योग निष्फल रहि जाइत अछि।
जँ चतुर्थेश वा नवमेश दुःस्थान मे चलि जाथि, अस्त होथि अथवा नीच राशि मे होथि तँ कहल योग भंग भऽ जाइत अछि। पाप ग्रहक दृष्टि सेहो एकर फल केँ घटबैत अछि।
✨ फल
सामान्य फल
कहल योग साहस, उद्यम आ नेतृत्वक योग अछि। एहन जातक मे जोखिम लेबाक क्षमता होइत अछि आ ओ पैघ स्तर पर काज करबा सँ नहि घबराइत छथि।
संपत्ति आ भूमि
चतुर्थ भाव सम्मिलित रहबाक कारणेँ ई योग भूमि, भवन आ वाहनक सुख दैत अछि। कृषि, अचल संपत्ति आ निर्माण सँ जुड़ल कार्य मे विशेष लाभ भेटैत अछि।
कार्यक्षेत्र
सेना आ सुरक्षा-सेवा, प्रशासन, ठेकेदारी, पैघ स्तरक उद्योग, परिवहन आ शिक्षण संस्थाक संचालन — एहि क्षेत्र सभ मे ई योग नीक फल दैत अछि।
सावधानी
अत्यधिक जोखिम आ विस्तारक महत्वाकांक्षा कखनो-कखनो आर्थिक दबाव बना दैत अछि। योजना आ नियंत्रणक बिना ई योग मात्र गतिविधि दैत अछि, परिणाम नहि।
उपाय
चतुर्थेश आ नवमेश सँ संबंधित दिनक व्रत, माता तथा गुरुजनक सेवा, भूमि-दान अथवा गाछ रोपब आ बृहस्पति दिन पीयर वस्त्रक दान एहि योग केँ बल दैत अछि।
🔮 की अहाँक कुंडली मे ई योग अछि?
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