📐 ई योग कोना बनैत अछि?
एकादश भाव — लाभ भाव — क स्वामी 6, 8 वा 12म भाव मे चलि जाथि, तखन दरिद्र योग बनैत अछि। किछु आचार्य धनेशक दुःस्थान मे जायब केँ सेहो एही श्रेणी मे रखैत छथि।
तर्क ई अछि जे लाभ भावक स्वामी जखन हानिक भाव मे चलि जाइत छथि, तँ आयक बाट बाधित भऽ जाइत अछि। आय होइत तँ अछि, मुदा संचय नहि भऽ पबैत अछि आ खर्च आय सँ आगाँ निकलि जाइत अछि।
एकर सेहो भंगक नियम अछि। जँ लाभेश उच्च राशि, स्वराशि अथवा मित्र राशि मे होथि, बृहस्पतिक दृष्टि हुनका पर पड़य, अथवा कुंडली मे कोनो प्रबल धन योग विद्यमान होअय तँ एहि योगक दोष बहुत कम भऽ जाइत अछि। जँ लाभेश दुःस्थान मे जाइतो उच्चक होथि तँ ई विपरीत राज योगक रूप लऽ सकैत अछि।
✨ फल
सामान्य फल
अभंग स्थिति मे ई योग आर्थिक तंगी, अनावश्यक व्यय आ ऋणक स्थिति दैत अछि। कमाइक अवसर अबैत अछि मुदा कोनो ने कोनो कारणेँ हाथ सँ निकलि जाइत अछि।
जीवन पर प्रभाव
चिकित्सा-व्यय, कानूनी मामिला अथवा ककरो सहायताक कारणेँ संचित धन बेर-बेर समाप्त भऽ जाइत अछि। मित्र आ जेठ भाइ-बहिन सँ अपेक्षित सहयोग सेहो कम भेटैत अछि।
सकारात्मक पक्ष
ई योग व्यक्ति केँ अत्यंत मितव्ययी आ व्यावहारिक बना दैत अछि। धनक मोल बुझयवला जातक बाद मे सभसँ अनुशासित निवेशक सिद्ध होइत छथि। दुःस्थान मे उच्चक लाभेश होथि तँ यैह योग असाधारण उन्नति सेहो दऽ सकैत अछि।
ध्यान रखबा योग्य बात
कोनो कुंडली मे ई योग देखि निराशाजनक भविष्यवाणी नहि करबाक चाही। भंगक नियम, धन योगक उपस्थिति आ दशा-क्रम — तीनू देखने बिना निष्कर्ष अधूरा रहैत अछि।
उपाय
शुक्र दिन लक्ष्मी-उपासना आ श्री सूक्तक पाठ, बृहस्पति दिन पीयर वस्तुक दान, प्रत्येक मास आयक एक निश्चित अंश अनिवार्य बचत मे राखब तथा अनावश्यक जमानत आ उधार सँ दूर रहब — ई सभ एहि योगक दोष केँ बहुत कम कऽ दैत अछि।
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