केतु सिंह राशि मे — अर्थात् जन्मराशि मे — छथि आ राहु सप्तम भाव मे। जन्मराशिक केतु अपन पहिचान पर प्रश्न ठाढ़ करैत अछि; सप्तम भावक राहु संबंध मे अप्रत्याशित मोड़ अनैत अछि।
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जन्मराशिक केतु — स्वयं केँ फेर सँ जाँचबाक समय
केतु उदासीनता, वैराग्य आ भीतरक खोजक कारक छथि। ओ जन्मराशि मे आबथि तँ बाहरक किछु टुटैत नहि — भीतरक किछु बदलैत अछि। मई 2025 सँ सिंह जातक केँ ‘हम ई सभ किएक क' रहल छी’ ई प्रश्न बेर-बेर उठल होयतनि, आ पहिने महत्वपूर्ण लागयबला वस्तुक महत्व घटल होयत।
सूर्य सिंहक स्वामी छथि आ सूर्य-केतुक जोड़ी अहंकार पर हाथ रखैत अछि। एहि अवधि मे शरीर मे बिनु कारणक थकान, वजन मे कमी आ लोक सँ दूर रहबाक इच्छा सामान्य अछि। ई रोगक लक्षण होयबे करय, से नहि — मुदा उपेक्षा सेहो नहि करू। सप्तम भावक राहु संबंध तोड़ैत नहि, मुदा ओहि मे अप्रत्याशित मोड़ अनैत अछि — अचानक तय होइत विवाह, भिन्न पृष्ठभूमिक साथी वा साझेदारी मे नव व्यक्ति। सभ अनुबंध लिखित राखू।
सिंहक कोन-कोन भाव मे ग्रहण पड़ल
सिंह राशिक लेल एहि गोचरक चारि ग्रहण सप्तम, प्रथम, द्वादश आ फेर सप्तम भाव मे पड़ल।
3 मार्च 2026 क पूर्ण चंद्रग्रहण सोझे सिंह राशि मे, पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र मे पड़ल — अर्थात् जन्मराशि पर, आ ठीक ओतहि केतु बैसल छथि। केतु आ चंद्रग्रहणक एकहि घर मे आयब अर्थात् पहिने सँ चलि रहल उदासीनताक अचानक गाढ़ भ' जायब। एहि राशिक अनेक लोक केँ ओहि अवधि मे ई प्रश्न तीव्रता सँ उठल होयतनि।
एकर अतिरिक्त दू ग्रहण सप्तम भाव मे, अर्थात् राहुक स्थान पर पड़ल — बारह राशि मे संबंधक घर पर सभसँ बेसी ग्रहण सिंहक हिस्सा मे आयल। विवाह, साझेदारी वा जीवनसाथी सँ जुड़ल निर्णय फरवरी आ अगस्त 2026 दुनू चरण मे सोझाँ आयल होयत। अगस्तक दुनू ग्रहण भारत सँ नहि देखायल छल।
गुरु-केतु योग, धुरी-परिवर्तन आ कंदाहा सूर्य मंदिर
सिंह राशिक लेल नवंबर 2026 एहि समस्त गोचरक सभसँ ध्यान देबा योग्य मास अछि। 31 अक्टूबर 2026 केँ गुरु सिंह मे प्रवेश करैत छथि आ 11 नवंबर 2026 केँ ओ केतुक संग करीब पूर्ण रूपेँ युत भ' जाइत छथि — दुनू सिंह मे 1°15' पर, अंतर मात्र 0.05 अंश। जन्मराशि मे बनयबला ई गुरु-केतु योग सिंहक लेल एक संग उन्नति आ उलझन दुनूक अछि: गुरुक कृपा भेटैत अछि, मुदा केतु ओहि मे सँ उत्साह सोखि लैत छथि।
5 दिसंबर 2026 केँ केतु कर्क मे आ राहु मकर मे जाइत छथि। सिंहक लेल केतु द्वादश आ राहु षष्ठ भाव मे सरकैत छथि — आ ई व्यवस्था एहि राशिक लेल काफी अनुकूल अछि। षष्ठ भावक राहु शत्रु, कर्ज आ प्रतिस्पर्धा पर विजय दैत अछि; द्वादश भावक केतु साधना आ परदेसक अनुकूल। अर्थात् ई धुरी-परिवर्तन सिंहक लेल छुटकाराक अछि।
उपाय मे सहरसा जिला (कोसी क्षेत्र) क कंदाहा गाम स्थित कंदाहा सूर्य मंदिर एहि राशिक लेल कहल जाइत अछि — मिथिलाक ओ प्राचीन सूर्य मंदिर जतय छठ पर दूर-दूर सँ श्रद्धालु अबैत छथि। व्रत मे रविक व्रत आ आदित्यहृदय स्तोत्रक पाठ। जन्मराशिक केतुक दौर मे जीवन भरिक पैघ निर्णय टारू।
❓ सिंह राशि — प्रायः पुछल जाए बला प्रश्न
सिंह राशि केँ थकान आ उदासीनता किएक लगैत अछि?
केतु मई 2025 सँ सिंह जन्मराशि मे छथि। केतु उदासीनता आ भीतरक खोजक कारक छथि; बिनु कारणक थकान, वजन मे कमी आ लोक सँ दूर रहबाक इच्छा एकर सामान्य अनुभव अछि। मुदा सभ थकान केतुक नहि होइत अछि — बनल रहय तँ चिकित्सा जाँच कराउ।
11 नवंबर 2026 क गुरु-केतु योग सिंह राशिक लेल की अछि?
31 अक्टूबर 2026 केँ गुरु सिंह मे अबैत छथि आ 11 नवंबर केँ ओ केतुक संग 1°15' पर करीब पूर्ण रूपेँ युत भ' जाइत छथि — अंतर मात्र 0.05 अंश। जन्मराशि मे बनयबला ई योग एक संग उन्नति आ उलझन दुनूक अछि; पैघ निर्णय तखन टारू।
सिंह राशि केँ 5 दिसंबर 2026 क बाद राहत भेटत?
हँ। केतु द्वादश भाव मे आ राहु षष्ठ भाव मे जयताह — ई व्यवस्था सिंहक लेल काफी अनुकूल अछि। षष्ठ भावक राहु शत्रु, कर्ज आ प्रतिस्पर्धा पर विजय दैत अछि आ द्वादश भावक केतु साधना तथा परदेसक अनुकूल अछि।
📅 एहि गोचरक जाँचल तिथि
- 18 मई 2025 — राहु कुंभ मे, केतु सिंह मे (मध्यम गणित; स्पष्ट गणित सँ 29 मई 2025)।
- ग्रहण — 7 सित. 2025 (कुंभ 21°11'), 17 फर. 2026 (कुंभ 4°37'), 3 मार्च 2026 (सिंह 18°38'), 12 अग. 2026 (कर्क 25°49'), 28 अग. 2026 (कुंभ 10°37')।
- अगस्त 2026 क दुनू ग्रहण भारत सँ नहि देखाएल, तेँ ओकर सूतक मानबाक कोनो कारण नहि छल।
- 5 दिसंबर 2026 — राहु मकर मे, केतु कर्क मे; ई गोचर समाप्त (स्पष्ट गणित सँ 25 नवंबर 2026)।
गणना निरयन (लाहिरी) पद्धति सँ, भारतीय मानक समय मे।