⭐ हस्त (Hasta) — Hasta Nakshatra Phal
हस्त नक्षत्र — खगोलीय विस्तार आ मूल स्वभाव
हस्त कन्या राशि मे 10°00' सँ 23°20' धरि पूर्णतः बैसैत अछि। स्वामी चन्द्र, देवता सवितृ अर्थात् सूर्यक प्रेरक रूप, आ प्रतीक खुजल तरहत्थी। तरहत्थीक प्रतीक सरल लगैत अछि, मुदा ओहि मे एहि नक्षत्रक सम्पूर्ण स्वभाव समायल अछि: हाथ दैत अछि, लैत अछि, गढ़ैत अछि, आशीर्वाद दैत अछि आ कौशल देखबैत अछि। चन्द्रमाक तीन नक्षत्र अछि — रोहिणीक चन्द्र उच्चक आ भोगसम्पन्न, श्रवणक चन्द्र सुनऽ वला आ श्रद्धालु, जखन कि हस्तक चन्द्र कारीगर अछि। कन्या बुधक विश्लेषक राशि थिक, तेँ एतुका चन्द्र भावना सँ बेसी सटीकता केँ महत्त्व दैत अछि; एही कारणेँ हस्त जातकक हाथ आ हिसाब दुनू पक्का होइत अछि।
प्रथम पाद सँ चतुर्थ पाद धरिक अन्तर
चारू पाद कन्या मे, नवांश मेष-वृषभ-मिथुन-कर्क। प्रथम पाद मेष नवांश मे; मंगलक कारणेँ हाथ केँ गति आ साहस भेटैत अछि — शल्यक्रिया, यंत्र-कार्य, खेलकूद। द्वितीय पाद वृषभ नवांश मे; शुक्रक कारणेँ ओएह हाथ कलात्मक भऽ जाइत अछि — चित्रकला, आभूषण, वस्त्र-कार्य, पाककला। तृतीय पाद मिथुन नवांश मे; बुधक कारणेँ हस्तकौशलक संग संवाद जुड़ैत अछि — लेखन, हिसाब, व्यापार। चतुर्थ पाद कर्क नवांश मे; चन्द्रमा पर चन्द्रमा, नक्षत्रस्वामी आ नवांशस्वामी एकहि — एतुका जातक सर्वाधिक भावनाप्रधान, सेवाभावी आ उपचारक प्रवृत्तिक होइत छथि। पहिल पादक हाथ काटैत अछि, चारिम पादक हाथ सान्त्वना दैत अछि।
गण, योनि, नाड़ी आ वर्णक व्यावहारिक अर्थ
गण देव, योनि महिष अर्थात् महींस (मादा), नाड़ी आदि आ कन्या राशि सँ वर्ण वैश्य। महिष योनिक शत्रु अश्व योनि अछि — तेँ अश्विनी आ शतभिषाक संग योनि मेलापक कमजोर पड़ैत अछि; स्वाति सेहो महिष योनिक अछि, तेँ हस्त–स्वाति जोड़ीक योनिकूट पूरा बैसैत अछि। आदि नाड़ी भेलाक कारणेँ अश्विनी, आर्द्रा, पुनर्वसु, उत्तरा फाल्गुनी, ज्येष्ठा, मूल, शतभिषा आ पूर्वा भाद्रपदक संग नाड़ी दोष अबैत अछि। देवगण आ वैश्य वर्णक कारणेँ अधिकांश पात्र सँ मिलान सरल रहैत अछि।
विंशोत्तरी दशा-क्रम
हस्त मे जन्म होअय तँ दस वर्षक चन्द्र महादशा सँ जीवन शुरू होइत अछि। रोहिणीक जातकक दशा-आरम्भ सेहो चन्द्रेक अछि, मुदा ओतय चन्द्र अपन उच्च राशि मे होइत छथि आ एतय बुधक कन्या राशि मे — तेँ एतुका बाल्यकाल बेसी व्यावहारिक, अनुशासित आ कौशल सिखऽ वला बितैत अछि। ओ समाप्त होइतहि सात वर्षक मंगल महादशा अबैत अछि; एही दौर मे बहुतो हस्त जातक अपन प्रत्यक्ष कौशल केँ कमाइ मे बदलैत छथि।
आजीविकाक दिशा
हाथक प्रतीक सँ शल्यक्रिया, दन्त चिकित्सा, फिजियोथेरेपी, मालिश-उपचार, हस्तशिल्प, स्वर्णकारी, मूर्तिकला आ पाककला सोझे निकलैत अछि। सवितृ देवता भेलाक कारणेँ शिक्षण, प्रशिक्षण आ मार्गदर्शन सेहो अनुकूल अछि। कन्या राशिक कारणेँ लेखा, सांख्यिकी, आँकड़ा विश्लेषण आ गुणवत्ता नियंत्रण मे सेहो सफलता। हस्तरेखा, ज्योतिष आ वास्तु सन परम्परागत विद्या सेहो एहि जातक केँ विशेष आकर्षित करैत अछि — आ मिथिला चित्रकला सन हाथक कला सेहो।
दाम्पत्य आ गुण मिलान
हस्त जातक बारीकी सँ देखभाल करैत छथि, मुदा हुनक परीक्षक दृष्टि संगी केँ आलोचना लागि सकैत अछि। खुजल स्वभावक आ प्रशंसा करऽ वला संगी हिनक पूरक अछि। महिष–अश्व योनिवैर आ आदि नाड़ीक दोष गुण मिलान मे देखू। कन्या राशि भेलाक कारणेँ अपेक्षा स्पष्ट कहबाक आदति लगाओल जाय तँ गृहस्थी निर्विघ्न चलैत अछि।
दिनचर्या आ सामान्य स्वास्थ्य
कन्या राशि पेट आ आँत सँ जुड़ल अछि; अति-विचार, अनियमित भोजन आ हाथक अत्यधिक उपयोग — एहि सँ परेशानी सम्भव अछि। ताजा भोजन, समय पर खायब, कलाइ-आँगुरक हल्लुक व्यायाम आ पर्याप्त निन्न उपयोगी अछि। शिकायत बढ़य तँ विशेषज्ञ लग जाउ।
मिथिलाक उपासना-परम्परा
सवितृ अर्थात् सूर्य, आ मिथिलाक सभसँ पैघ सूर्योपासना अछि छठि — कमला, कोशी, बागमती आ गंगाक घाट पर तथा गाम-गामक पोखरि पर लाखों व्रती साँझ आ भोरक अर्घ्य दैत छथि। सहरसाक कन्दाहा सूर्य मन्दिर मिथिलाक प्राचीन सूर्य-स्थल मानल जाइत अछि। छठि मे हाथ जोड़ि, अपन हाथ सँ बनाओल ठकुआ आ सूपक संग सूर्य केँ अर्घ्य देब — हाथ आ सूर्यक ई संयोग हस्त नक्षत्र सँ ठीक मेल खाइत अछि। एहि जातक लेल छठिक व्रत वा अर्घ्य, रवि दिन सूर्य-नमस्कार आ अपन हाथ सँ बनल वस्तु वा भोजनक दान सभसँ सुसंगत उपाय अछि।
🔱 हस्त नक्षत्रक चारि पाद आ नवांश
| पाद आ अंश | नवांश राशि | फल मे की बदलैत अछि |
|---|---|---|
| पाद १ · 10°00'–13°20' | मेष नवांश (स्वामी मंगल) | हाथ केँ गति आ साहस; शल्यक्रिया, यंत्र-कार्य, खेलकूद। |
| पाद २ · 13°20'–16°40' | वृषभ नवांश (स्वामी शुक्र) | हाथ कलात्मक होइत अछि; चित्रकला, आभूषण, वस्त्र, पाककला। |
| पाद ३ · 16°40'–20°00' | मिथुन नवांश (स्वामी बुध) | हस्तकौशलक संग संवाद; लेखन, हिसाब, व्यापार। |
| पाद ४ · 20°00'–23°20' | कर्क नवांश (स्वामी चंद्र) | चन्द्रमा पर चन्द्रमा — सर्वाधिक भावनाप्रधान आ उपचारक प्रवृत्ति। |
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🌙 चंद्राष्टम, तारा-बल आ गुण मिलान
| चंद्राष्टम राशि | मेष — एहि राशि मे चंद्रमा रहला पर हस्त जातकक चंद्राष्टम मानल जाइत अछि। आजुक चंद्राष्टम देखू |
|---|---|
| विपत् तारा | स्वाति, शतभिषा, आर्द्रा |
| प्रत्यरि तारा | अनुराधा, उत्तरा भाद्रपद, पुष्य |
| वध तारा | मूल, अश्विनी, मघा |
| दशा-आरंभ | चंद्र महादशा — कुल १० वर्ष; तकर बाद ७ वर्षक मंगल महादशा |
विपत्, प्रत्यरि आ वध — ई तीनू तारा यात्रा, शल्यक्रिया आ नव काजक मुहूर्त लेल टारबाक चाही; जन्म, संपत्, क्षेम, साधक, मित्र आ अति-मित्र तारा शुभ अछि। विवाह लेल अष्टकूट गुण मिलान देखैत काल नाड़ी आ भकूटक संग एहो तारा-शुद्धि जाँचल जाइत अछि।
❔ हस्त नक्षत्र — प्रायः पूछल जायवला प्रश्न
चन्द्रमाक तीन नक्षत्र मे हस्त कोना भिन्न अछि?
रोहिणीक चन्द्र वृषभ मे उच्चक आ भोगसम्पन्न, श्रवणक चन्द्र मकर मे सुनऽ वला आ श्रद्धालु, जखन कि हस्तक चन्द्र कन्या मे — बुधक विश्लेषक राशि मे — कारीगर बनि जाइत अछि। तेँ एतुका चन्द्र भावना सँ बेसी सटीकता केँ महत्त्व दैत अछि आ हस्त जातकक हाथ तथा हिसाब दुनू पक्का होइत अछि।
हस्त नक्षत्रक हाथक कौशल सँ की सम्बन्ध अछि?
प्रतीक खुजल तरहत्थी — जे दैत अछि, लैत अछि, गढ़ैत अछि आ आशीर्वादो दैत अछि। देवता सवितृ अर्थात् सूर्यक प्रेरक रूप। तेँ शल्यक्रिया, दन्त चिकित्सा, फिजियोथेरेपी, हस्तशिल्प, स्वर्णकारी, मूर्तिकला आ पाककला एहि जातक केँ विशेष नीक लगैत अछि।
हस्त आ स्वातिक योनि मेलापक केहन रहैत अछि?
दुनू नक्षत्र महिष अर्थात् महींस योनिक अछि — हस्त मादा आ स्वाति नर। एकहि योनिक जोड़ी भेलाक कारणेँ योनिकूट मे पूरा अंक भेटैत अछि। मुदा महिष योनिक शत्रु अश्व भेलाक कारणेँ अश्विनी आ शतभिषाक संग मिलान कमजोर पड़ैत अछि।
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