☎ हिंदी ज्योतिष सेवा 📅 16 October 2026
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♎ तुला राशि — गुरु गोचर 2026-2027

Tula Rashi · गुरु गोचर 2026-2027 · Hindi Jyotish

★★★★☆

उच्च के गुरु तुला से दशम कर्म भाव में हैं। नौकरी, व्यवसाय और समाज में प्रतिष्ठा तीनों को 2026-27 में सीधा बल मिलता है, और गुरु की नवम दृष्टि षष्ठ भाव पर पड़कर प्रतिस्पर्धा में भी मदद करती है।

कर्म भाव का उच्च गुरु — नक्षत्र सहित

दशम भाव व्यवसाय, पद, पिता और समाज में पहचान का है। उच्च के गुरु का यहाँ आना कार्यक्षेत्र में पदोन्नति, नई ज़िम्मेदारी और लोगों में साख — तीनों का एक साथ आना है।

ज्योतिष का एक पुराना नियम यहाँ जोड़ने लायक है — शनि तुला में ही उच्च के होते हैं, यानी तुला राशि मूलतः कर्म के अनुकूल है। उस राशि के दशम घर में उच्च का गुरु आ जाए तो सरकारी नौकरी, शिक्षा, विधि, परामर्श और प्रबंधन में विशेष सफलता मिलती है। नक्षत्र की दृष्टि से 18 जून से 19 अगस्त 2026 तक का पुष्य वाला दौर पदोन्नति के लिए आवेदन करने, साक्षात्कार देने या नया व्यवसाय पंजीकृत कराने के लिए सर्वोत्तम है।

द्वितीय, चतुर्थ और षष्ठ भाव पर दृष्टि

दशम भाव के गुरु की दृष्टि तुला राशि के द्वितीय, चतुर्थ और षष्ठ भाव पर पड़ती है।

द्वितीय भाव पर पंचम दृष्टि कमाई को बचत में बदलती है — यानी काम का फल जेब तक पहुँचता है। चतुर्थ भाव पर सप्तम दृष्टि मकान, ज़मीन और माता के मामले में स्थिरता देती है; तबादला या नए शहर में स्थानांतरण इसी दौर में सुखद रहता है।

षष्ठ भाव पर नवम दृष्टि सबसे उपयोगी है। मीन तुला से षष्ठ राशि है और वहाँ शनि हैं — यानी तुला राशि पर इस समय षष्ठ भाव का शनि चल रहा है, जिसे शत्रु, क़र्ज़ और प्रतिस्पर्धा पर विजय देने वाला माना गया है। अब उसी घर पर उच्च के गुरु की नवम दृष्टि भी आ गई है। न्यायालय के मामले, प्रतियोगी परीक्षा, क़र्ज़ चुकाना और पुरानी बीमारी — चारों मोर्चों पर यह गोचर तुला के लिए विशेष अनुकूल है।

तुला के लिए वर्ष का बँटवारा और शुकतीर्थ

जून से अक्टूबर 2026 कर्म भाव के गुरु का पहला और सबसे बलवान दौर है। 31 अक्टूबर 2026 से 25 जनवरी 2027 तक गुरु सिंह में, यानी तुला के एकादश लाभ भाव में — आय और जान-पहचान बढ़ती है, पर कर्म भाव पर सीधा गुरु हटने से काम की गति कुछ धीमी पड़ती है; 13 दिसंबर 2026 के बाद गुरु वक्री होने पर नौकरी बदलने का निर्णय टालें। 25 जनवरी 2027 से गुरु फिर दशम भाव में लौटते हैं और 13 अप्रैल 2027 को मार्गी होने के बाद अप्रैल-जून 2027 पद और प्रतिष्ठा की दृष्टि से सर्वश्रेष्ठ है।

उपाय में मुज़फ़्फ़रनगर ज़िले का शुकतीर्थ इस राशि के लिए कहा जाता है — गंगा किनारे वह स्थान जहाँ शुकदेव जी ने राजा परीक्षित को भागवत सुनाई थी, और जहाँ का अक्षय वट प्रसिद्ध है। गुरु ज्ञान और कथा के कारक हैं, इसलिए कर्म भाव के गोचर में यह संदर्भ ठीक बैठता है।

व्रत में बृहस्पतिवार का व्रत और बसंत पंचमी इस राशि के लिए बताई जाती है; पीले वस्त्र और पीले अन्न का दान गुरु के रंग से मेल खाता है। एक चेतावनी: कर्म भाव का गुरु यश देता है पर समय भी खा जाता है — इन दो वर्षों में परिवार के लिए समय बचाकर रखें।

❓ तुला राशि — अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

तुला राशि को गुरु गोचर 2026-27 में पदोन्नति मिलेगी?

उच्च के गुरु तुला से दशम कर्म भाव में हैं, जो पदोन्नति और प्रतिष्ठा का घर है। साक्षात्कार, पदोन्नति का आवेदन और नए व्यवसाय का पंजीकरण जून से अक्टूबर 2026 में करें; अप्रैल से जून 2027 दूसरा उतना ही अनुकूल दौर है।

तुला राशि के न्यायालय के मामलों का क्या होगा?

मीन तुला से षष्ठ राशि है और वहाँ शनि हैं; अब उच्च के गुरु की नवम दृष्टि भी उसी षष्ठ भाव पर पड़ती है। न्यायालय के मामले, प्रतियोगी परीक्षा, क़र्ज़ चुकाना और पुरानी बीमारी — चारों मोर्चों पर यह गोचर विशेष अनुकूल है।

तुला राशि को नौकरी कब बदलनी चाहिए?

13 दिसंबर 2026 को गुरु वक्री होते हैं और 31 अक्टूबर 2026 से 25 जनवरी 2027 तक वे कर्म भाव छोड़कर एकादश भाव में रहते हैं। उन तीन महीनों में निर्णय टालें; फरवरी 2027 के बाद गुरु फिर दशम भाव में आ जाते हैं।

📅 इस गोचर की जाँची हुई तिथियाँ

  • 2 जून 2026 — गुरु मिथुन से कर्क में; 26 जून 2026 को 5 अंश पर परमोच्च बिंदु।
  • 31 अक्टूबर 2026 — गुरु कर्क छोड़कर सिंह में; 13 दिसंबर 2026 को 2°47' पर वक्री।
  • 25 जनवरी 2027 — वक्री गुरु फिर कर्क में; 13 अप्रैल 2027 को 22°45' पर मार्गी।
  • 26 जून 2027 — गुरु कर्क छोड़कर स्थायी रूप से सिंह में; यह गोचर समाप्त।

गणना निरयन (लाहिरी) पद्धति से, भारतीय मानक समय में।