गुरु वृषभ से तृतीय भाव में हैं। शास्त्र में तृतीय भाव का गुरु बहुत शुभ नहीं माना जाता, पर उनकी नवम दृष्टि एकादश लाभ भाव पर पड़ती है — और असली फल वहीं है।
🔍 अपनी राशि चुनें
पुनर्वसु से आश्लेषा तक — वृषभ के लिए नक्षत्र का अर्थ
गुरु उच्च के होकर भी तृतीय भाव में हैं, और तृतीय उनका प्रिय स्थान नहीं। उपचय भाव होने के कारण यहाँ का गुरु काम बढ़ाता है, यात्राएँ बढ़ाता है और साहस बढ़ाता है; पर जो मिलता है वह अपने आप नहीं, प्रयास से ही मिलता है।
नक्षत्र इस तस्वीर को और साफ़ करते हैं। जून से अगस्त 2026 तक गुरु पुनर्वसु और पुष्य में रहते हैं — यही वह समय है जब नया कौशल सीखना, नया पाठ्यक्रम शुरू करना या कोई नई ज़िम्मेदारी लेना सबसे सहज पड़ता है। 19 अगस्त 2026 के बाद गुरु आश्लेषा में जाते हैं और तब भाई-बहनों या सहकर्मियों से कहासुनी की सम्भावना बढ़ जाती है, क्योंकि आश्लेषा का स्वभाव लिपटने और उलझाने का है।
सप्तम, नवम और एकादश भाव पर गुरु की दृष्टि
तृतीय भाव के गुरु की पंचम दृष्टि सप्तम, सप्तम दृष्टि नवम और नवम दृष्टि एकादश भाव पर पड़ती है।
एकादश भाव आय, जान-पहचान और इच्छापूर्ति का है। उच्च के गुरु की नवम दृष्टि — तीनों में सबसे बलवान — वहाँ पड़ने का अर्थ है मेहनत का पैसे में बदलना। तृतीय भाव के गुरु की थकान और एकादश भाव का लाभ साथ-साथ चलते हैं, इसलिए वृषभ जातकों को यह वर्ष ‘दौड़ भी है और कमाई भी’ जैसा लगेगा।
एक विवरण ध्यान देने योग्य है — मीन के शनि भी वृषभ से एकादश भाव में ही हैं। यानी गुरु की दृष्टि और शनि का स्थान एक ही घर में मिलते हैं। आय बढ़ती है पर उसके साथ ज़िम्मेदारी भी बढ़ती है, यही इसका सटीक अर्थ है। सप्तम दृष्टि विवाह-साझेदारी की बात आगे बढ़ाती है और नवम दृष्टि लंबी यात्रा तथा उच्च शिक्षा के द्वार खोलती है।
वृषभ के आसान और कठिन महीने, गोला गोकर्णनाथ
31 अक्टूबर 2026 से 25 जनवरी 2027 तक का समय वृषभ के लिए इस वर्ष का सर्वोत्तम है — गुरु सिंह में, यानी वृषभ के चतुर्थ सुख भाव में। मकान, ज़मीन, वाहन और माता से जुड़े अटके काम इन्हीं तीन महीनों में निपटाएँ। 13 दिसंबर 2026 के बाद गुरु वक्री रहते हैं, इसलिए नया अनुबंध करने के बजाय पुराना काम पूरा करें। 25 जनवरी 2027 से गुरु फिर तृतीय भाव में लौटते हैं और परिश्रम का दौर फिर शुरू होता है।
उपाय में लखीमपुर खीरी ज़िले का गोला गोकर्णनाथ इस राशि के लिए बताया जाता है — उत्तर प्रदेश का वह शिवस्थान जिसे छोटी काशी कहा जाता है और जहाँ फाल्गुन में विशाल मेला लगता है। तृतीय भाव पराक्रम का है और शिव की उपासना उसमें स्थिरता जोड़ती है।
व्रत में इस राशि के लिए गुरु पूर्णिमा कही जाती है — जुलाई 2026 में पड़ने वाली यह पूर्णिमा गुरु के कर्क प्रवेश के तुरंत बाद की पहली है। शुक्र स्वामी होने से शुक्रवार को सफेद वस्तुओं का दान जोड़ी का उपाय है। एक चेतावनी: तृतीय भाव का गुरु आत्मविश्वास बढ़ाता है और उसी जोश में नौकरी छोड़ने का मन होता है — यह निर्णय नवंबर 2026 से जनवरी 2027 के बीच लेना अपेक्षाकृत सुरक्षित है।
❓ वृषभ राशि — अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
वृषभ राशि को गुरु गोचर 2026-27 में धन लाभ होगा?
गुरु तृतीय भाव में होने पर भी उनकी नवम — सबसे बलवान — दृष्टि एकादश लाभ भाव पर पड़ती है। आय बढ़ती है, पर अपने आप नहीं, परिश्रम से ही। मीन के शनि भी उसी एकादश भाव में हैं, इसलिए पैसे के साथ ज़िम्मेदारी भी बढ़ती है।
वृषभ राशि के लिए इस गोचर का सबसे अच्छा समय कौन-सा है?
31 अक्टूबर 2026 से 25 जनवरी 2027 तक — इन तीन महीनों में गुरु सिंह में, यानी वृषभ के चतुर्थ सुख भाव में रहते हैं। मकान, ज़मीन, वाहन और माता से जुड़े अटके काम इन्हीं महीनों में निपटाएँ।
वृषभ राशि को अगस्त 2026 के बाद क्या ध्यान रखना चाहिए?
19 अगस्त 2026 के बाद गुरु आश्लेषा नक्षत्र में जाते हैं और तब भाई-बहनों या सहकर्मियों से कहासुनी की सम्भावना बढ़ जाती है, क्योंकि आश्लेषा का स्वभाव उलझाने का है।
📅 इस गोचर की जाँची हुई तिथियाँ
- 2 जून 2026 — गुरु मिथुन से कर्क में; 26 जून 2026 को 5 अंश पर परमोच्च बिंदु।
- 31 अक्टूबर 2026 — गुरु कर्क छोड़कर सिंह में; 13 दिसंबर 2026 को 2°47' पर वक्री।
- 25 जनवरी 2027 — वक्री गुरु फिर कर्क में; 13 अप्रैल 2027 को 22°45' पर मार्गी।
- 26 जून 2027 — गुरु कर्क छोड़कर स्थायी रूप से सिंह में; यह गोचर समाप्त।
गणना निरयन (लाहिरी) पद्धति से, भारतीय मानक समय में।