2 जून 2026 से उच्च के गुरु मेष राशि से चतुर्थ भाव में हैं। मकान, ज़मीन, वाहन और माता — यही चार विषय इस पूरे गोचर का केंद्र रहेंगे।
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नक्षत्र की दृष्टि से देखें तो गुरु क्या कह रहे हैं
कर्क गुरु की उच्च राशि है और मेष से वह चतुर्थ भाव पड़ता है। पर केवल राशि देखना अधूरा है — नक्षत्र बदलते ही गुरु का स्वभाव बदल जाता है। 2 से 18 जून 2026 तक गुरु पुनर्वसु में रहे, फिर 19 अगस्त 2026 तक पुष्य में, और उसके बाद आश्लेषा में।
मेष जातकों के लिए यह क्रम व्यावहारिक अर्थ रखता है। पुष्य नक्षत्र का समय — 18 जून से 19 अगस्त 2026 — मकान या भूमि से जुड़ा काम शुरू करने के लिए सर्वोत्तम है, क्योंकि पुष्य को शास्त्र में सबसे शुभ नक्षत्र कहा गया है और गुरु 26 जून 2026 को उसी दौरान 5 अंश पर परमोच्च बिंदु छूते हैं। इसके विपरीत आश्लेषा का गुरु कागज़ पढ़वाता है — 19 अगस्त 2026 के बाद बैनामा, दान-पत्र और वारिसाना दर्ज कराते समय दो बार जाँच कर लें।
गुरु की दृष्टि मेष के अष्टम, दशम और द्वादश भाव पर
गुरु अपने स्थान से पंचम, सप्तम और नवम भाव को देखते हैं। चतुर्थ भाव के गुरु की ये तीनों दृष्टियाँ मेष राशि के अष्टम, दशम और द्वादश भाव पर पड़ती हैं।
दशम भाव पर पड़ने वाली सप्तम दृष्टि सबसे उपयोगी है — घर से काम करने वालों, किराये या ज़मीन से आय लेने वालों और निर्माण-कृषि से जुड़े लोगों को यह सीधा लाभ देती है। अष्टम भाव पर पंचम दृष्टि बीमा, ग्रेच्युटी, भविष्य निधि और वारिसाने की अटकी रकम छुड़ाती है।
असली राहत द्वादश भाव पर पड़ने वाली नवम दृष्टि में है। शनि मीन में हैं और मीन मेष से बारहवीं राशि — यानी मार्च 2025 से चल रही साढ़े साती के पहले चरण पर अब उच्च के गुरु की दृष्टि आ गई है। गुरु शनि का काम रोकते नहीं, पर खर्च को दिशा देते हैं और नींद सुधरती है।
मेष के लिए महीनों का हिसाब और नैमिषारण्य
जून से अक्टूबर 2026 इस गोचर का सबसे खुला दौर है। 31 अक्टूबर 2026 को गुरु सिंह में, यानी मेष के पंचम भाव में चले जाते हैं — संतान, शिक्षा और निवेश को गति मिलती है, पर द्वादश भाव की दृष्टि हट जाने से नवंबर 2026 से जनवरी 2027 तक साढ़े साती का बोझ फिर महसूस होता है। 13 दिसंबर 2026 को गुरु वक्री होते हैं और 25 जनवरी 2027 को फिर कर्क में लौट आते हैं; वहाँ से जून 2027 तक राहत का दूसरा दौर।
उपाय की दृष्टि से मेष राशि के लिए सीतापुर ज़िले का नैमिषारण्य बताया जाता है — चक्रतीर्थ और व्यास गद्दी वाला वह स्थान जहाँ अट्ठासी हज़ार ऋषियों ने सत्र किया था। गुरु ज्ञान के कारक हैं और चतुर्थ भाव का गोचर मन की स्थिरता माँगता है; नैमिष का परिक्रमा-पथ इसी के लिए कहा गया है।
व्रत में बृहस्पतिवार का व्रत और केले के वृक्ष की पूजा इस राशि के लिए मुख्य है — उत्तर भारत में गुरुवार को पीले वस्त्र, चने की दाल और गुड़ का दान घर-घर की परंपरा है। चतुर्थ भाव छाती और नींद से जुड़ा है, इसलिए इन दो वर्षों में सोने का समय बाँधकर रखना सबसे बड़ा उपाय सिद्ध होता है।
❓ मेष राशि — अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
गुरु गोचर 2026-27 में मेष राशि को मकान का योग है?
उच्च के गुरु 2 जून 2026 से मेष के चतुर्थ भाव में हैं और 26 जून 2026 को परमोच्च बिंदु पर पहुँचते हैं। 18 जून से 19 अगस्त 2026 का पुष्य नक्षत्र वाला समय मकान या भूमि से जुड़ा काम शुरू करने के लिए सर्वोत्तम है।
मेष राशि की साढ़े साती पर इस गुरु गोचर का क्या असर है?
चतुर्थ भाव के गुरु की नवम दृष्टि मेष के द्वादश भाव पर पड़ती है, जहाँ शनि हैं और साढ़े साती का पहला चरण चल रहा है। गुरु शनि का काम रोकते नहीं, पर खर्च को दिशा देते हैं और नींद सुधरती है।
मेष राशि को किन महीनों में सावधान रहना चाहिए?
नवंबर 2026 से जनवरी 2027 तक। 31 अक्टूबर 2026 को गुरु सिंह में चले जाते हैं और द्वादश भाव पर उनकी दृष्टि हट जाती है, जिससे साढ़े साती का बोझ फिर महसूस होता है। 13 दिसंबर 2026 से गुरु वक्री भी रहते हैं।
📅 इस गोचर की जाँची हुई तिथियाँ
- 2 जून 2026 — गुरु मिथुन से कर्क में; 26 जून 2026 को 5 अंश पर परमोच्च बिंदु।
- 31 अक्टूबर 2026 — गुरु कर्क छोड़कर सिंह में; 13 दिसंबर 2026 को 2°47' पर वक्री।
- 25 जनवरी 2027 — वक्री गुरु फिर कर्क में; 13 अप्रैल 2027 को 22°45' पर मार्गी।
- 26 जून 2027 — गुरु कर्क छोड़कर स्थायी रूप से सिंह में; यह गोचर समाप्त।
गणना निरयन (लाहिरी) पद्धति से, भारतीय मानक समय में।