☎ हिंदी ज्योतिष सेवा 📅 17 October 2026
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♎ तुला राशि — राहु-केतु गोचर 2025-2026

Tula Rashi · राहु-केतु गोचर 2025-2026 · Hindi Jyotish

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राहु तुला से पंचम भाव में और केतु एकादश भाव में हैं। पंचम भाव का राहु नए विचार और सृजनशक्ति देता है, पर संतान और निवेश के मामले में सावधानी माँगता है।

पंचम भाव का राहु — कल्पना और जोखिम

पंचम भाव संतान, शिक्षा, बुद्धि, प्रेम और निवेश का है। राहु यहाँ आएँ तो विचारों को असाधारण गति मिलती है — नए विचार सूझते हैं, कलात्मक काम में सफलता मिलती है और तकनीक से जुड़ी नई बातें सहज आती हैं। मई 2025 से तुला जातक ने कुछ नया सीखा होगा या नए माध्यम में काम शुरू किया होगा।

इसी स्थान का दूसरा पक्ष छिपाने में अर्थ नहीं। राहु जुए के, अल्पकालिक सट्टे के और अनुचित आशा के भी कारक हैं, और पंचम भाव निवेश का। तुला को इन डेढ़ वर्षों में तुरंत लाभ की योजनाएँ, अस्थिर बाज़ार का सट्टा और उधार लेकर किया निवेश — तीनों से दूर रहना चाहिए। बच्चों की पढ़ाई और संगत पर भी सामान्य से अधिक ध्यान दें। एकादश भाव का केतु मित्रमंडल और आय की जगह उदासीनता लाता है; पुराने दायरे अपने आप छूटते हैं और नए जुड़ते हैं।

तुला के लिए ग्रहणों की जगह

तुला राशि के लिए इस गोचर के चार ग्रहण पंचम, एकादश, दशम और फिर पंचम भाव में पड़े।

इनमें सबसे मुखर 12 अगस्त 2026 का दशम कर्म भाव वाला सूर्यग्रहण है। तुला की कुंडली में दशम भाव कर्क का — यानी चंद्र का — है और वहाँ सूर्यग्रहण पड़ना यानी काम से जुड़ा कोई बड़ा निर्णय अचानक सामने आना। नौकरी में बदलाव, नई ज़िम्मेदारी या वरिष्ठों से हुआ निर्णायक संवाद अगस्त-सितंबर 2026 में हुआ होगा।

पंचम भाव के दो ग्रहण राहु की जगह पड़े और उन्होंने निवेश तथा संतान के विषयों को झटका दिया — इस राशि ने उसी अरसे में कोई जोखिम भरा निवेश रोका होगा, और वह निर्णय ठीक ही था। 3 मार्च का एकादश भाव वाला चंद्रग्रहण मित्रमंडल की पुनर्व्यवस्था दिखाता है। अगस्त के दोनों ग्रहण भारत से दिखे नहीं थे, पर फल राशिचक्र में स्थिति से तय होता है।

धुरी बदलने के बाद और साँवलिया सेठ

5 दिसंबर 2026 को राहु मकर में और केतु कर्क में जाते हैं। तुला के लिए राहु पंचम भाव से चतुर्थ भाव में और केतु एकादश से दशम भाव में सरकते हैं।

चतुर्थ भाव का राहु मकान, ज़मीन और माता के विषयों में हलचल लाता है — घर बदलना, नवीनीकरण या ज़मीन का सौदा दिसंबर 2026 के बाद सम्भव है। दशम भाव का केतु काम की जगह उदासीनता लाता है; पद और प्रतिष्ठा का खिंचाव घटता है और काम में संतोष का प्रश्न आगे आता है। यह धुरी मध्य 2028 तक रहेगी।

उससे पहले 11 नवंबर 2026 का गुरु-केतु योग तुला के एकादश भाव में बनता है — अक्टूबर 2026 से जनवरी 2027 के बीच मित्रों या आय के स्रोतों की पुनर्व्यवस्था सम्भव है; नई जान-पहचान से आए निवेश के प्रस्तावों पर तब विशेष सावधानी रखें। उपाय में चित्तौड़गढ़ ज़िले का साँवलिया सेठ — मंडफिया का वह कृष्ण मंदिर जिसे उत्तर भारत के व्यापारी अपना साझेदार मानते हैं — और व्रत में कार्तिक की गोवर्धन पूजा इस राशि के लिए कहे जाते हैं।

❓ तुला राशि — अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

तुला राशि को निवेश में क्या सावधानी रखनी चाहिए?

राहु तुला से पंचम यानी निवेश के भाव में हैं और राहु जुए तथा अनुचित आशा के भी कारक हैं। तुरंत लाभ की योजनाएँ, अस्थिर बाज़ार का सट्टा और उधार लेकर किया निवेश — तीनों से दूर रहें।

तुला राशि के मित्रमंडल में बदलाव क्यों हो रहा है?

केतु तुला से एकादश भाव में हैं — मित्रमंडल और आय की जगह। वहाँ का केतु उदासीनता लाता है, इसलिए पुराने दायरे अपने आप छूटते हैं और नए जुड़ते हैं। यह नुकसान नहीं, पुनर्व्यवस्था है।

5 दिसंबर 2026 के बाद तुला राशि का क्या होगा?

राहु चतुर्थ भाव में और केतु दशम भाव में जाएँगे। मकान, ज़मीन और माता के विषयों में हलचल आएगी — घर बदलना या नवीनीकरण सम्भव है। दशम भाव के केतु के कारण पद का खिंचाव घटकर काम में संतोष का प्रश्न आगे आएगा।

📅 इस गोचर की जाँची हुई तिथियाँ

  • 18 मई 2025 — राहु कुंभ में, केतु सिंह में (मध्यम गणित; स्पष्ट गणित से 29 मई 2025)।
  • ग्रहण — 7 सित. 2025 (कुंभ 21°11'), 17 फ़र. 2026 (कुंभ 4°37'), 3 मार्च 2026 (सिंह 18°38'), 12 अग. 2026 (कर्क 25°49'), 28 अग. 2026 (कुंभ 10°37')।
  • अगस्त 2026 के दोनों ग्रहण भारत से नहीं दिखे, इसलिए उनका सूतक मानने का कारण नहीं था।
  • 5 दिसंबर 2026 — राहु मकर में, केतु कर्क में; यह गोचर समाप्त (स्पष्ट गणित से 25 नवंबर 2026)।

गणना निरयन (लाहिरी) पद्धति से, भारतीय मानक समय में।