☎ हिंदी ज्योतिष सेवा 📅 17 October 2026
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♌ सिंह राशि — राहु-केतु गोचर 2025-2026

Singh Rashi · राहु-केतु गोचर 2025-2026 · Hindi Jyotish

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केतु सिंह राशि में ही — यानी जन्मराशि में — हैं और राहु सप्तम भाव में। जन्मराशि का केतु अपनी पहचान पर प्रश्न खड़े करता है; सप्तम भाव का राहु रिश्तों में अप्रत्याशित मोड़ लाता है।

जन्मराशि का केतु — स्वयं को फिर जाँचने का समय

केतु उदासीनता, वैराग्य और भीतर की खोज के कारक हैं। वे जन्मराशि में आएँ तो बाहर का कुछ टूटता नहीं — भीतर का कुछ बदलता है। मई 2025 से सिंह जातक को ‘मैं यह सब क्यों कर रहा हूँ’ यह प्रश्न बार-बार उठा होगा, और पहले महत्वपूर्ण लगने वाली चीज़ों का महत्व घटा होगा।

सूर्य सिंह के स्वामी और सूर्य-केतु की जोड़ी अहंकार पर हाथ रखने वाली। इस अवधि में शरीर में बिना कारण की थकान, वज़न में कमी और लोगों से दूर रहने की इच्छा सामान्य है। यह रोग का लक्षण हो ही, ऐसा नहीं — पर उपेक्षा भी न करें। सप्तम भाव का राहु रिश्ता तोड़ता नहीं, पर उसमें अप्रत्याशित मोड़ लाता है — अचानक तय होता विवाह, अलग पृष्ठभूमि का साथी या साझेदारी में नया व्यक्ति। हर अनुबंध लिखित रखें।

सिंह के किन भावों में ग्रहण पड़े

सिंह राशि के लिए इस गोचर के चार ग्रहण सप्तम, प्रथम, द्वादश और फिर सप्तम भाव में पड़े।

3 मार्च 2026 का पूर्ण चंद्रग्रहण सीधे सिंह राशि में, पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र में पड़ा — यानी जन्मराशि पर, और ठीक वहीं केतु बैठे हैं। केतु और चंद्रग्रहण का एक ही घर में आना यानी पहले से चल रही उदासीनता का अचानक गाढ़ा हो जाना। इस राशि के अनेक लोगों को उस अरसे में यह प्रश्न तीव्रता से उठा होगा।

इसके अलावा दो ग्रहण सप्तम भाव में, यानी राहु की जगह पड़े — बारह राशियों में रिश्तों के घर पर सबसे अधिक ग्रहण सिंह के ही हिस्से आए। विवाह, साझेदारी या जीवनसाथी से जुड़ा निर्णय फ़रवरी और अगस्त 2026 दोनों चरणों में सामने आया होगा। अगस्त के दोनों ग्रहण भारत से दिखे नहीं थे।

गुरु-केतु योग, धुरी-परिवर्तन और देव सूर्य मंदिर

सिंह राशि के लिए नवंबर 2026 इस पूरे गोचर का सबसे ध्यानपात्र महीना है। 31 अक्टूबर 2026 को गुरु सिंह में प्रवेश करते हैं और 11 नवंबर 2026 को वे केतु के साथ लगभग पूरी तरह युत हो जाते हैं — दोनों सिंह में 1°15' पर, अंतर केवल 0.05 अंश। जन्मराशि में बनने वाला यह गुरु-केतु योग सिंह के लिए एक साथ उन्नति का और उलझन का है: गुरु की कृपा मिलती है, पर केतु उसमें से उत्साह सोख लेते हैं।

5 दिसंबर 2026 को केतु कर्क में और राहु मकर में जाते हैं। सिंह के लिए केतु द्वादश और राहु षष्ठ भाव में सरकते हैं — और यह व्यवस्था इस राशि के लिए काफ़ी अनुकूल है। षष्ठ भाव का राहु शत्रु, क़र्ज़ और प्रतिस्पर्धा पर विजय देता है; द्वादश भाव का केतु साधना और परदेस के अनुकूल। यानी यह धुरी-परिवर्तन सिंह के लिए छुटकारे का है।

उपाय में औरंगाबाद ज़िले (बिहार) का देव सूर्य मंदिर इस राशि के लिए कहा जाता है — पश्चिमाभिमुख वह प्राचीन सूर्य मंदिर जहाँ छठ पर लाखों श्रद्धालु आते हैं। व्रत में रविवार का व्रत और आदित्यहृदय स्तोत्र का पाठ। जन्मराशि के केतु के दौर में जीवन भर के बड़े निर्णय टालें।

❓ सिंह राशि — अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सिंह राशि को थकान और उदासीनता क्यों लगती है?

केतु मई 2025 से सिंह जन्मराशि में ही हैं। केतु उदासीनता और भीतर की खोज के कारक हैं; बिना कारण की थकान, वज़न में कमी और लोगों से दूर रहने की इच्छा इसके सामान्य अनुभव हैं। पर हर थकान केतु की नहीं होती — बनी रहे तो चिकित्सा जाँच कराएँ।

11 नवंबर 2026 का गुरु-केतु योग सिंह राशि के लिए क्या है?

31 अक्टूबर 2026 को गुरु सिंह में आते हैं और 11 नवंबर को वे केतु के साथ 1°15' पर लगभग पूरी तरह युत हो जाते हैं — अंतर केवल 0.05 अंश। जन्मराशि में बनने वाला यह योग एक साथ उन्नति का और उलझन का है; बड़े निर्णय तब टालें।

सिंह राशि को 5 दिसंबर 2026 के बाद राहत मिलेगी?

हाँ। केतु द्वादश भाव में और राहु षष्ठ भाव में जाएँगे — यह व्यवस्था सिंह के लिए काफ़ी अनुकूल है। षष्ठ भाव का राहु शत्रु, क़र्ज़ और प्रतिस्पर्धा पर विजय देता है और द्वादश भाव का केतु साधना तथा परदेस के अनुकूल है।

📅 इस गोचर की जाँची हुई तिथियाँ

  • 18 मई 2025 — राहु कुंभ में, केतु सिंह में (मध्यम गणित; स्पष्ट गणित से 29 मई 2025)।
  • ग्रहण — 7 सित. 2025 (कुंभ 21°11'), 17 फ़र. 2026 (कुंभ 4°37'), 3 मार्च 2026 (सिंह 18°38'), 12 अग. 2026 (कर्क 25°49'), 28 अग. 2026 (कुंभ 10°37')।
  • अगस्त 2026 के दोनों ग्रहण भारत से नहीं दिखे, इसलिए उनका सूतक मानने का कारण नहीं था।
  • 5 दिसंबर 2026 — राहु मकर में, केतु कर्क में; यह गोचर समाप्त (स्पष्ट गणित से 25 नवंबर 2026)।

गणना निरयन (लाहिरी) पद्धति से, भारतीय मानक समय में।