🔜 अगिला व्रत
- 🙏 एकादशी — 5 नवम्बर 2026, बृहस्पतिदिन (आइ)
- 🔱 प्रदोष व्रत — 7 नवम्बर 2026, शनिदिन (2 दिन बाद)
- 🌑 अमावस्या — 9 नवम्बर 2026, सोमदिन (4 दिन बाद)
- 🪔 विनायक चतुर्थी — 13 नवम्बर 2026, शुक्रदिन (8 दिन बाद)
- 🦚 षष्ठी — 15 नवम्बर 2026, रविदिन (10 दिन बाद)
- ⚔️ अष्टमी — 18 नवम्बर 2026, बुधदिन (13 दिन बाद)
📅 फरवरी 2027 मे पड़ए वला व्रत
| तारीख | दिन | व्रत | तिथि |
|---|---|---|---|
| 2 फरवरी 2027 | मंगलदिन | 🙏 एकादशी | कृष्ण पक्ष — तिथि 11 |
| 4 फरवरी 2027 | बृहस्पतिदिन | 🔱 प्रदोष व्रत | कृष्ण पक्ष — तिथि 13 |
| 6 फरवरी 2027 | शनिदिन | 🌑 अमावस्या | कृष्ण पक्ष — तिथि 15 |
| 10 फरवरी 2027 | बुधदिन | 🪔 विनायक चतुर्थी | शुक्ल पक्ष — तिथि 4 |
| 12 फरवरी 2027 | शुक्रदिन | 🦚 षष्ठी | शुक्ल पक्ष — तिथि 6 |
| 14 फरवरी 2027 | रविदिन | ⚔️ अष्टमी | शुक्ल पक्ष — तिथि 8 |
| 17 फरवरी 2027 | बुधदिन | 🙏 एकादशी | शुक्ल पक्ष — तिथि 11 |
| 19 फरवरी 2027 | शुक्रदिन | 🔱 प्रदोष व्रत | शुक्ल पक्ष — तिथि 13 |
| 20 फरवरी 2027 | शनिदिन | 🌕 पूर्णिमा | शुक्ल पक्ष — तिथि 15 |
| 24 फरवरी 2027 | बुधदिन | 🐘 संकष्टी चतुर्थी | कृष्ण पक्ष — तिथि 4 |
| 28 फरवरी 2027 | रविदिन | ⚔️ अष्टमी | कृष्ण पक्ष — तिथि 8 |
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फरवरी साधारणतः माघ आ फागुनक बीच पड़ैत अछि। वसंत पंचमी आ अक्सर महाशिवरात्रि एही समय अबैत अछि, तेँ प्रदोष आ शिव पूजाक महत्व बढ़ि जाइत अछि।
🔎 हरेक व्रत केर पूरा बरखक तारीख
❓ व्रत कैलेंडर — बेर-बेर पूछल जाए वला प्रश्न
व्रतक तिथि कोना तय होइत अछि?
तिथि चन्द्रमा आ सूर्यक दूरी सँ बनैत अछि। हरेक 12 अंशक दूरी पर एक तिथि पूरा होइत अछि आ अगिला शुरू होइत अछि। एकादशी 11म तिथि थिक, पूर्णिमा 15म, अमावस्या 30म, प्रदोष 13म, षष्ठी 6ठम आ संकष्टी कृष्ण पक्षक 4र्थी (अर्थात् 19म)।
एकादशी, पूर्णिमा आ अमावस्या मे की अंतर अछि?
एकादशी विष्णु जीक तिथि थिक आ अन्न सँ परहेजक दिन थिक। पूर्णिमा पूरा चन्द्रमाक दिन थिक — सत्यनारायण पूजा आ चन्द्र अर्घ्यक। अमावस्या पितरक स्मरण, तर्पण आ दानक दिन थिक।
की सभ व्रत करब जरूरी अछि?
नहि। व्रत श्रद्धा आ सामर्थ्यक बात थिक। एक-दू व्रत नियम सँ करब बहुत व्रत अधूरा मन सँ करबा सँ नीक अछि। बीमार, गर्भवती वा दवाइ लैत लोक कठोर उपवास नहि करथि; फल आ दूध पर सेहो व्रतक भावना पूरा होइत अछि।
अलग-अलग पंचांग मे तारीख अलग किएक देखाइत अछि?
तिथिक समय शहरक सूर्योदय पर निर्भर होइत अछि, आ अलग-अलग पंचांग अलग गणना-पद्धति (निरयन, दृक् वा सूर्य सिद्धांत) आ अलग नियम अपनबैत अछि। तेँ कखनो एक दिनक फर्क आबि जाइत अछि। व्रत सँ पहिने अपन मंदिर वा स्थानीय पंचांग सँ एक बेर मिला लिय।
तिथि आ तारीख मे की अंतर अछि?
तारीख सूर्यक हिसाबे 24 घंटाक दिन थिक, जखन कि तिथि चन्द्रमाक हिसाबे बनैत अछि आ 20 सँ 26 घंटा धरिक भ' सकैत अछि। व्रत तिथि सँ तय होइत अछि, तेँ ओकर तारीख हरेक बरख बदलैत अछि।
व्रतक शुरुआत कोना करू?
एक व्रत चुनू, तीन मासक संकल्प लिय आ ओहि दिन केवल हल्लुक भोजन आ थोड़ेक पूजा राखू। पहिल दिन सँ कठोर नियम बान्हि लेब अक्सर टिकैत नहि अछि। जखन आदति बनि जाए, तखन नियम बढ़ाउ।
ℹ️ गणना निरयन (लाहिरी) पद्धति सँ, भारतीय मानक समय मे कएल गेल अछि। ओ दिन देखाओल गेल अछि जाहि दिनक सूर्योदय (भोर मे लगभग 6 बजे) केर बाद तिथि पूरा होइत अछि। शहर अनुसार किछु तिथि एक दिन आगू-पाछू भ' सकैत अछि, आ प्रदोष तथा संकष्टी मे साँझ वा चंद्रोदयक समय केर तिथि सेहो देखल जाइत अछि — तेँ व्रत सँ पहिने अपन स्थानीय पंचांग वा पंजी वा मंदिरक कैलेंडर सँ एक बेर मिला लिय।
🔮 अहाँक कुंडली मे कोन व्रत सभ सँ उपयोगी?
जन्म कुंडली मे अहाँक राशि आ दशा देखि क' कहल जा सकैत अछि जे कोन व्रत आ कोन देवता अहाँ लेल सभ सँ बेसी सहारा देताह।