☎ मैथिली ज्योतिष सेवा 📅 05 November 2026
🌕

पूर्णिमा 2026 — पूरा बरखक तिथि

चन्द्र देव, भगवान सत्यनारायण · शुक्ल पक्षक अंतिम तिथि (तिथि 15)

अगिला पूर्णिमा: 24 नवम्बर 2026, मंगलदिन (19 दिन बाद)

2026 मे पूर्णिमा कुल 13 बेर पड़ि रहल अछि।

📅 पूर्णिमा 2026 केर सभ तारीख

तारीखदिनतिथि
3 जनवरी 2026शनिदिनशुक्ल पक्ष — तिथि 15
1 फरवरी 2026रविदिनशुक्ल पक्ष — तिथि 15
3 मार्च 2026मंगलदिनशुक्ल पक्ष — तिथि 15
2 अप्रैल 2026बृहस्पतिदिनशुक्ल पक्ष — तिथि 15
1 मई 2026शुक्रदिनशुक्ल पक्ष — तिथि 15
31 मई 2026रविदिनशुक्ल पक्ष — तिथि 15
29 जून 2026सोमदिनशुक्ल पक्ष — तिथि 15
29 जुलाई 2026बुधदिनशुक्ल पक्ष — तिथि 15
28 अगस्त 2026शुक्रदिनशुक्ल पक्ष — तिथि 15
26 सितम्बर 2026शनिदिनशुक्ल पक्ष — तिथि 15
26 अक्टूबर 2026सोमदिनशुक्ल पक्ष — तिथि 15
24 नवम्बर 2026मंगलदिनशुक्ल पक्ष — तिथि 15
24 दिसम्बर 2026बृहस्पतिदिनशुक्ल पक्ष — तिथि 15

← 2025 केर तारीख 2027 केर तारीख →

🔍 पूर्णिमा की थिक आ किएक कएल जाइत अछि

पूर्णिमा पर चन्द्रमा पूरा कला मे रहैत छथि। ज्योतिष मे चन्द्रमा मन आ भावनाक कारक छथि, तेँ ई दिन मन केँ थिर करबाक, कृतज्ञता आ पूजा लेल नीक मानल जाइत अछि। हरेक पूर्णिमाक अपन पहिचान अछि — चैत मे हनुमान जयंती, वैशाख मे बुद्ध पूर्णिमा, आषाढ़ मे गुरु पूर्णिमा, सावन मे रक्षा बन्धन, आश्विन मे शरद पूर्णिमा, कार्तिक मे देव दीपावली आ गुरु नानक जयंती, फागुन मे होली। मिथिला मे आश्विन पूर्णिमा केँ कोजागरा मनाओल जाइत अछि, जाहि मे नवविवाहित वरक घर सँ पान, मखान आ कौड़ीक संग लक्ष्मी पूजाक परंपरा छै। एही कारणेँ एके तिथिक महत्व मास अनुसार बदलि जाइत अछि।

🙏 पूर्णिमा कोना करू

भोरे स्नानक बाद भगवान सत्यनारायणक कथा सुनब वा पढ़ब सभ सँ प्रचलित विधि थिक। साँझ मे चन्द्रमाक उदय पर जल वा दूध सँ अर्घ्य दिय आ ‘ॐ सोमाय नमः’ केर जप करू। दिन मे फलाहार वा एक साँझ भोजन राखू। खीर बना क' चानि मे राखब आ घरक सदस्य सभ मे बाँटब शरद पूर्णिमाक परंपरा थिक। नदी वा पोखरि मे स्नान, दान आ दीपदान सेहो शुभ मानल जाइत अछि।

👤 ककरा लेल विशेष

जिनकर कुंडली मे चन्द्रमा कमजोर वा पीड़ित होथि, जिनका मानसिक तनाव रहैत होअए, वा जिनकर चन्द्रक दशा चलि रहल होअए — हुनका लेल पूर्णिमाक व्रत आ चन्द्र दर्शन सहायक मानल जाइत अछि। विवाहित जोड़ी घरक शांति आ संतानक कामना सँ सेहो ई व्रत करैत छथि।

❓ पूर्णिमा — बेर-बेर पूछल जाए वला प्रश्न

पूर्णिमाक व्रत कोना करू?

भोरे स्नान क' क' संकल्प लिय, दिन मे फल वा एक साँझ सात्विक भोजन करू, साँझ मे सत्यनारायण पूजा वा कथा करू आ चन्द्रमा केँ अर्घ्य दए व्रत खोलू। शुरू मे हरेक मास नहि, केवल कार्तिक वा वैशाखक पूर्णिमा सँ सेहो शुरू क' सकैत छी।

पूर्णिमा आ पूर्णमासी मे की अंतर अछि?

कोनो अंतर नहि — पूर्णमासी एही तिथिक दोसर नाम थिक। दुनू शुक्ल पक्षक अंतिम तिथि (पन्द्रहम) केँ कहल जाइत अछि, जखन चन्द्रमा पूरा देखाइ दैत छथि।

की सत्यनारायण कथा केवल पूर्णिमे पर होइत अछि?

नहि, कथा कोनो शुभ दिन भ' सकैत अछि, मुदा पूर्णिमा पर एकर परंपरा सभ सँ बेसी छै। नव घर, विवाह वा मनोकामना पूरा भेला पर सेहो लोक ई कथा करबैत छथि।

पूर्णिमाक तारीख दू दिन किएक कहल जाइत अछि?

तिथि सूर्योदयक बाद शुरू भ' क' अगिला दिनक सूर्योदयक बाद धरि चलि सकैत अछि। हम ओ दिन देखबैत छी जाहि मे पूर्णिमा तिथि पूरा होइत अछि; स्नान-दान आ सत्यनारायण पूजा लेल जाहि दिन साँझ मे पूर्णिमा होअए, ओ दिन लिय।

ℹ️ गणना निरयन (लाहिरी) पद्धति सँ, भारतीय मानक समय मे कएल गेल अछि। ओ दिन देखाओल गेल अछि जाहि दिनक सूर्योदय (भोर मे लगभग 6 बजे) केर बाद तिथि पूरा होइत अछि। शहर अनुसार किछु तिथि एक दिन आगू-पाछू भ' सकैत अछि, आ प्रदोष तथा संकष्टी मे साँझ वा चंद्रोदयक समय केर तिथि सेहो देखल जाइत अछि — तेँ व्रत सँ पहिने अपन स्थानीय पंचांग वा पंजी वा मंदिरक कैलेंडर सँ एक बेर मिला लिय।

🔮 अहाँक कुंडली मे कोन व्रत सभ सँ उपयोगी?

जन्म कुंडली मे अहाँक राशि आ दशा देखि क' कहल जा सकैत अछि जे कोन व्रत आ कोन देवता अहाँ लेल सभ सँ बेसी सहारा देताह।

मुफ्त कुंडली बनाउ 📆 आइक पंचांग