☎ मैथिली ज्योतिष सेवा 📅 05 November 2026
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प्रदोष व्रत 2034 — पूरा बरखक तिथि

भगवान शिव आ नन्दी · हरेक पक्षक त्रयोदशी (तिथि 13 आ 28)

अगिला प्रदोष व्रत: 7 नवम्बर 2026, शनिदिन (2 दिन बाद)

2034 मे प्रदोष व्रत कुल 25 बेर पड़ि रहल अछि।

📅 प्रदोष व्रत 2034 केर सभ तारीख

तारीखदिनतिथि
2 जनवरी 2034सोमदिनशुक्ल पक्ष — तिथि 13
18 जनवरी 2034बुधदिनकृष्ण पक्ष — तिथि 13
1 फरवरी 2034बुधदिनशुक्ल पक्ष — तिथि 13
17 फरवरी 2034शुक्रदिनकृष्ण पक्ष — तिथि 13
2 मार्च 2034बृहस्पतिदिनशुक्ल पक्ष — तिथि 13
18 मार्च 2034शनिदिनकृष्ण पक्ष — तिथि 13
1 अप्रैल 2034शनिदिनशुक्ल पक्ष — तिथि 13
17 अप्रैल 2034सोमदिनकृष्ण पक्ष — तिथि 13
1 मई 2034सोमदिनशुक्ल पक्ष — तिथि 13
16 मई 2034मंगलदिनकृष्ण पक्ष — तिथि 13
30 मई 2034मंगलदिनशुक्ल पक्ष — तिथि 13
14 जून 2034बुधदिनकृष्ण पक्ष — तिथि 13
29 जून 2034बृहस्पतिदिनशुक्ल पक्ष — तिथि 13
13 जुलाई 2034बृहस्पतिदिनकृष्ण पक्ष — तिथि 13
29 जुलाई 2034शनिदिनशुक्ल पक्ष — तिथि 13
12 अगस्त 2034शनिदिनकृष्ण पक्ष — तिथि 13
27 अगस्त 2034रविदिनशुक्ल पक्ष — तिथि 13
10 सितम्बर 2034रविदिनकृष्ण पक्ष — तिथि 13
26 सितम्बर 2034मंगलदिनशुक्ल पक्ष — तिथि 13
10 अक्टूबर 2034मंगलदिनकृष्ण पक्ष — तिथि 13
25 अक्टूबर 2034बुधदिनशुक्ल पक्ष — तिथि 13
8 नवम्बर 2034बुधदिनकृष्ण पक्ष — तिथि 13
24 नवम्बर 2034शुक्रदिनशुक्ल पक्ष — तिथि 13
8 दिसम्बर 2034शुक्रदिनकृष्ण पक्ष — तिथि 13
23 दिसम्बर 2034शनिदिनशुक्ल पक्ष — तिथि 13

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🔍 प्रदोष व्रत की थिक आ किएक कएल जाइत अछि

प्रदोष हरेक पक्षक त्रयोदशीक साँझक समय थिक — सूर्यास्तक किछु पहिने सँ राति शुरू होए धरि। मान्यता छै जे एहि समय शिव जी प्रसन्न मुद्रा मे रहैत छथि, तेँ पूजा साँझ केर होइत अछि, दिनक नहि। दिन अनुसार नाम बदलैत अछि: सोमदिन केँ सोम प्रदोष, मंगलदिन केँ भौम प्रदोष आ शनिदिन केँ शनि प्रदोष — शनि प्रदोष केँ विशेष फलदायी मानल जाइत अछि।

🙏 प्रदोष व्रत कोना करू

दिन भरि फलाहार वा एक साँझ भोजन राखू। साँझ मे स्नान क' क' शिवलिंग पर जल, दूध, बेलपत्र आ उज्जर फूल चढ़ाउ; घीक दीप जराउ आ ‘ॐ नमः शिवाय’ केर जप करू। नन्दीक कान मे अपन मनोकामना कहबाक परंपरो छै। पूजाक बादे भोजन करू। बहुत गोटे 11 वा 26 प्रदोषक संकल्प ल' क' ई व्रत शुरू करैत छथि।

👤 ककरा लेल विशेष

जिनकर कुंडली मे चन्द्रमा वा शनि कठिन स्थिति मे होथि, वा जे विवाह, संतान आ रोग सँ राहतक कामना रखैत छथि, से प्रदोषक व्रत करैत छथि। साढ़ेसाती वा शनिक दशा मे शनि प्रदोष पर शिव पूजा सँ मन केँ सहारा भेटैत अछि।

❓ प्रदोष व्रत — बेर-बेर पूछल जाए वला प्रश्न

प्रदोष व्रतक पूजाक ठीक समय की अछि?

त्रयोदशीक साँझ, सूर्यास्तक आसपासक समय। ठीक मिनट अहाँक शहरक सूर्यास्त पर निर्भर करैत अछि, तेँ तारीख एतय सँ लिय आ समयक लेल ‘आइक पंचांग’ देखू।

प्रदोष व्रत मे की खाउ?

दिन मे फल, दूध, मखान वा साबूदाना; साँझक पूजाक बाद सात्विक भोजन। नोन कम राखू आ लहसुन-प्याज सँ दूर रहू।

सोम प्रदोष आ शनि प्रदोष की थिक?

जखन त्रयोदशी सोमदिन केँ पड़ए तँ सोम प्रदोष आ शनिदिन केँ पड़ए तँ शनि प्रदोष कहबैत अछि। ऊपरक सूची मे दिन देखि क' अहाँ अपन पसिनक प्रदोष चुनि सकैत छी।

प्रदोषक व्रत कतेक समय धरि करबाक चाही?

कोनो बंधन नहि; परंपरा मे लोक 11 वा 26 प्रदोषक संकल्प लैत छथि, किछु लोक पूरा बरख करैत छथि। अहाँ अपन सुविधा सँ शुरू करू आ निभाउ।

ℹ️ गणना निरयन (लाहिरी) पद्धति सँ, भारतीय मानक समय मे कएल गेल अछि। ओ दिन देखाओल गेल अछि जाहि दिनक सूर्योदय (भोर मे लगभग 6 बजे) केर बाद तिथि पूरा होइत अछि। शहर अनुसार किछु तिथि एक दिन आगू-पाछू भ' सकैत अछि, आ प्रदोष तथा संकष्टी मे साँझ वा चंद्रोदयक समय केर तिथि सेहो देखल जाइत अछि — तेँ व्रत सँ पहिने अपन स्थानीय पंचांग वा पंजी वा मंदिरक कैलेंडर सँ एक बेर मिला लिय।

🔮 अहाँक कुंडली मे कोन व्रत सभ सँ उपयोगी?

जन्म कुंडली मे अहाँक राशि आ दशा देखि क' कहल जा सकैत अछि जे कोन व्रत आ कोन देवता अहाँ लेल सभ सँ बेसी सहारा देताह।

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