अगली षष्ठी: 15 नवंबर 2026, रविवार (10 दिन बाद)
2025 में षष्ठी कुल 13 बार पड़ रही है।
📅 षष्ठी 2025 की सभी तारीखें
| तारीख | वार | तिथि |
|---|---|---|
| 5 जनवरी 2025 | रविवार | शुक्ल पक्ष — तिथि 6 |
| 3 फ़रवरी 2025 | सोमवार | शुक्ल पक्ष — तिथि 6 |
| 5 मार्च 2025 | बुधवार | शुक्ल पक्ष — तिथि 6 |
| 3 अप्रैल 2025 | गुरुवार | शुक्ल पक्ष — तिथि 6 |
| 3 मई 2025 | शनिवार | शुक्ल पक्ष — तिथि 6 |
| 1 जून 2025 | रविवार | शुक्ल पक्ष — तिथि 6 |
| 1 जुलाई 2025 | मंगलवार | शुक्ल पक्ष — तिथि 6 |
| 30 जुलाई 2025 | बुधवार | शुक्ल पक्ष — तिथि 6 |
| 29 अगस्त 2025 | शुक्रवार | शुक्ल पक्ष — तिथि 6 |
| 28 सितंबर 2025 | रविवार | शुक्ल पक्ष — तिथि 6 |
| 28 अक्तूबर 2025 | मंगलवार | शुक्ल पक्ष — तिथि 6 |
| 26 नवंबर 2025 | बुधवार | शुक्ल पक्ष — तिथि 6 |
| 26 दिसंबर 2025 | शुक्रवार | शुक्ल पक्ष — तिथि 6 |
🔍 षष्ठी क्या है और क्यों रखी जाती है
शुक्ल पक्ष की षष्ठी भगवान कार्तिकेय — जिन्हें स्कंद, मुरुगन और सुब्रह्मण्य भी कहते हैं — की तिथि है। दक्षिण भारत में यह सबसे लोकप्रिय व्रतों में है, और दीपावली के आसपास की स्कंद षष्ठी छह दिन चलने वाला पर्व है जिसका समापन सूरसंहारम से होता है। उत्तर भारत में कार्तिक शुक्ल षष्ठी को छठ पूजा होती है, जो सूर्य उपासना का पर्व है — वह अलग परंपरा है, पर तिथि यही षष्ठी है।
🙏 षष्ठी कैसे करें
सुबह स्नान करके कार्तिकेय जी के चित्र या मूर्ति के सामने दीपक जलाएँ। लाल या पीले फूल, दूध और फल चढ़ाएँ और ‘ॐ सुब्रह्मण्याय नमः’ का जाप करें। दिन में एक बार भोजन या फलाहार लें। इस दिन मोर पंख, वेल (भाला) और लाल रंग का विशेष संबंध माना जाता है।
👤 किसके लिए ख़ास
संतान-सुख, साहस, कर्ज़ से राहत और मंगल ग्रह की शांति के लिए यह व्रत किया जाता है। जिनकी कुंडली में मंगल कमज़ोर हो या मांगलिक स्थिति बनती हो, वे भी इसे अपनाते हैं।
❓ षष्ठी — अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
षष्ठी और स्कंद षष्ठी में क्या अंतर है?
हर शुक्ल पक्ष की षष्ठी कार्तिकेय की तिथि है। जब यह षष्ठी दीपावली के आसपास की बड़ी षष्ठी हो, तब उसे स्कंद षष्ठी महोत्सव के रूप में विशेष रूप से मनाया जाता है।
छठ पूजा की तिथि क्या है?
छठ कार्तिक शुक्ल षष्ठी को मनाई जाती है, यानी अक्तूबर-नवंबर की षष्ठी। ऊपर की सूची में उन महीनों की तारीख़ देखें, और सूर्यास्त-सूर्योदय के अर्घ्य के समय के लिए स्थानीय पंचांग से मिला लें।
षष्ठी व्रत में क्या खाएँ?
फल, दूध और साबूदाना जैसा हल्का सात्विक भोजन। जो पूरे दिन का उपवास रखते हैं वे शाम की पूजा के बाद ही भोजन लेते हैं।
षष्ठी का व्रत कितने समय तक रखना चाहिए?
बहुत-से लोग 6 षष्ठी या एक साल की षष्ठी का संकल्प लेते हैं। तिथि छोटी-बड़ी हो सकती है, इसलिए संकल्प सुविधा के अनुसार लें।
ℹ️ गणना निरयन (लाहिरी) पद्धति से, भारतीय मानक समय में। वह दिन दिखाया गया है जिसके सूर्योदय (सुबह लगभग 6 बजे) के बाद तिथि पूरी होती है। शहर के अनुसार कुछ तिथियाँ एक दिन आगे-पीछे हो सकती हैं, और प्रदोष तथा संकष्टी में शाम या चंद्रोदय के समय की तिथि भी देखी जाती है — इसलिए व्रत से पहले अपने स्थानीय पंचांग या मंदिर के कैलेंडर से एक बार मिला लें।
🔮 आपकी कुंडली में कौन-सा व्रत सबसे उपयोगी?
जन्म कुंडली से आपकी राशि और दशा देखकर बताया जा सकता है कि कौन-सा व्रत और कौन-सा देवता आपके लिए सबसे सहारा देने वाला है।