अगली पूर्णिमा: 24 नवंबर 2026, मंगलवार (19 दिन बाद)
2026 में पूर्णिमा कुल 13 बार पड़ रही है।
📅 पूर्णिमा 2026 की सभी तारीखें
| तारीख | वार | तिथि |
|---|---|---|
| 3 जनवरी 2026 | शनिवार | शुक्ल पक्ष — तिथि 15 |
| 1 फ़रवरी 2026 | रविवार | शुक्ल पक्ष — तिथि 15 |
| 3 मार्च 2026 | मंगलवार | शुक्ल पक्ष — तिथि 15 |
| 2 अप्रैल 2026 | गुरुवार | शुक्ल पक्ष — तिथि 15 |
| 1 मई 2026 | शुक्रवार | शुक्ल पक्ष — तिथि 15 |
| 31 मई 2026 | रविवार | शुक्ल पक्ष — तिथि 15 |
| 29 जून 2026 | सोमवार | शुक्ल पक्ष — तिथि 15 |
| 29 जुलाई 2026 | बुधवार | शुक्ल पक्ष — तिथि 15 |
| 28 अगस्त 2026 | शुक्रवार | शुक्ल पक्ष — तिथि 15 |
| 26 सितंबर 2026 | शनिवार | शुक्ल पक्ष — तिथि 15 |
| 26 अक्तूबर 2026 | सोमवार | शुक्ल पक्ष — तिथि 15 |
| 24 नवंबर 2026 | मंगलवार | शुक्ल पक्ष — तिथि 15 |
| 24 दिसंबर 2026 | गुरुवार | शुक्ल पक्ष — तिथि 15 |
🔍 पूर्णिमा क्या है और क्यों रखी जाती है
पूर्णिमा पर चंद्रमा पूरी कला में होता है। ज्योतिष में चंद्रमा मन और भावनाओं का कारक है, इसलिए यह दिन मन को स्थिर करने, कृतज्ञता और पूजा के लिए अच्छा माना जाता है। हर पूर्णिमा की अपनी पहचान है — चैत्र में हनुमान जयंती, वैशाख में बुद्ध पूर्णिमा, आषाढ़ में गुरु पूर्णिमा, श्रावण में रक्षा बंधन, आश्विन में शरद पूर्णिमा, कार्तिक में देव दीपावली और गुरु नानक जयंती, फाल्गुन में होली। इसी कारण एक ही तिथि का महत्व महीने के हिसाब से बदल जाता है।
🙏 पूर्णिमा कैसे करें
सुबह स्नान के बाद भगवान सत्यनारायण की कथा सुनना या पढ़ना सबसे प्रचलित विधि है। शाम को चंद्रमा के उदय पर जल या दूध से अर्घ्य दें और ‘ॐ सोमाय नमः’ का जाप करें। दिन में फलाहार या एक समय भोजन रखें। खीर बनाकर चाँदनी में रखना और घर के सदस्यों में बाँटना शरद पूर्णिमा की परंपरा है। नदी या सरोवर में स्नान, दान और दीपदान भी शुभ माना जाता है।
👤 किसके लिए ख़ास
जिनकी कुंडली में चंद्रमा कमज़ोर या पीड़ित हो, जिन्हें मानसिक तनाव रहता हो, या जिनकी चंद्र की दशा चल रही हो — उनके लिए पूर्णिमा का व्रत और चंद्र दर्शन सहायक माना जाता है। विवाहित जोड़े घर की शांति और संतान की कामना से भी यह व्रत रखते हैं।
❓ पूर्णिमा — अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
पूर्णिमा का व्रत कैसे रखें?
सुबह स्नान करके संकल्प लें, दिन में फल या एक समय सात्विक भोजन लें, शाम को सत्यनारायण पूजा या कथा करें और चंद्रमा को अर्घ्य देकर व्रत खोलें। शुरुआत में हर महीने नहीं, केवल कार्तिक या वैशाख की पूर्णिमा से भी शुरू कर सकते हैं।
पूर्णिमा और पूर्णमासी में क्या अंतर है?
कोई अंतर नहीं — पूर्णमासी इसी तिथि का दूसरा नाम है। दोनों शुक्ल पक्ष की अंतिम तिथि (पंद्रहवीं) को कहते हैं, जब चंद्रमा पूरा दिखता है।
क्या सत्यनारायण कथा केवल पूर्णिमा पर ही होती है?
नहीं, कथा किसी भी शुभ दिन हो सकती है, पर पूर्णिमा पर इसकी परंपरा सबसे अधिक है। नया घर, विवाह या मनोकामना पूरी होने पर भी लोग यह कथा करवाते हैं।
पूर्णिमा की तारीख दो दिन क्यों बताई जाती है?
तिथि सूर्योदय के बाद शुरू होकर अगले दिन के सूर्योदय के बाद तक चल सकती है। हम वह दिन दिखाते हैं जिसमें पूर्णिमा तिथि पूरी होती है; स्नान-दान और सत्यनारायण पूजा के लिए जिस दिन शाम को पूर्णिमा हो, वह दिन लें।
ℹ️ गणना निरयन (लाहिरी) पद्धति से, भारतीय मानक समय में। वह दिन दिखाया गया है जिसके सूर्योदय (सुबह लगभग 6 बजे) के बाद तिथि पूरी होती है। शहर के अनुसार कुछ तिथियाँ एक दिन आगे-पीछे हो सकती हैं, और प्रदोष तथा संकष्टी में शाम या चंद्रोदय के समय की तिथि भी देखी जाती है — इसलिए व्रत से पहले अपने स्थानीय पंचांग या मंदिर के कैलेंडर से एक बार मिला लें।
🔮 आपकी कुंडली में कौन-सा व्रत सबसे उपयोगी?
जन्म कुंडली से आपकी राशि और दशा देखकर बताया जा सकता है कि कौन-सा व्रत और कौन-सा देवता आपके लिए सबसे सहारा देने वाला है।