अगली प्रदोष व्रत: 7 नवंबर 2026, शनिवार (2 दिन बाद)
2026 में प्रदोष व्रत कुल 25 बार पड़ रही है।
📅 प्रदोष व्रत 2026 की सभी तारीखें
| तारीख | वार | तिथि |
|---|---|---|
| 1 जनवरी 2026 | गुरुवार | शुक्ल पक्ष — तिथि 13 |
| 16 जनवरी 2026 | शुक्रवार | कृष्ण पक्ष — तिथि 13 |
| 31 जनवरी 2026 | शनिवार | शुक्ल पक्ष — तिथि 13 |
| 15 फ़रवरी 2026 | रविवार | कृष्ण पक्ष — तिथि 13 |
| 1 मार्च 2026 | रविवार | शुक्ल पक्ष — तिथि 13 |
| 17 मार्च 2026 | मंगलवार | कृष्ण पक्ष — तिथि 13 |
| 31 मार्च 2026 | मंगलवार | शुक्ल पक्ष — तिथि 13 |
| 15 अप्रैल 2026 | बुधवार | कृष्ण पक्ष — तिथि 13 |
| 29 अप्रैल 2026 | बुधवार | शुक्ल पक्ष — तिथि 13 |
| 15 मई 2026 | शुक्रवार | कृष्ण पक्ष — तिथि 13 |
| 29 मई 2026 | शुक्रवार | शुक्ल पक्ष — तिथि 13 |
| 13 जून 2026 | शनिवार | कृष्ण पक्ष — तिथि 13 |
| 27 जून 2026 | शनिवार | शुक्ल पक्ष — तिथि 13 |
| 12 जुलाई 2026 | रविवार | कृष्ण पक्ष — तिथि 13 |
| 27 जुलाई 2026 | सोमवार | शुक्ल पक्ष — तिथि 13 |
| 10 अगस्त 2026 | सोमवार | कृष्ण पक्ष — तिथि 13 |
| 26 अगस्त 2026 | बुधवार | शुक्ल पक्ष — तिथि 13 |
| 9 सितंबर 2026 | बुधवार | कृष्ण पक्ष — तिथि 13 |
| 24 सितंबर 2026 | गुरुवार | शुक्ल पक्ष — तिथि 13 |
| 8 अक्तूबर 2026 | गुरुवार | कृष्ण पक्ष — तिथि 13 |
| 24 अक्तूबर 2026 | शनिवार | शुक्ल पक्ष — तिथि 13 |
| 7 नवंबर 2026 | शनिवार | कृष्ण पक्ष — तिथि 13 |
| 22 नवंबर 2026 | रविवार | शुक्ल पक्ष — तिथि 13 |
| 6 दिसंबर 2026 | रविवार | कृष्ण पक्ष — तिथि 13 |
| 22 दिसंबर 2026 | मंगलवार | शुक्ल पक्ष — तिथि 13 |
🔍 प्रदोष व्रत क्या है और क्यों रखी जाती है
प्रदोष हर पक्ष की त्रयोदशी की संध्या का समय है — सूर्यास्त के कुछ पहले से रात्रि के आरंभ तक। मान्यता है कि इस समय शिव जी प्रसन्न मुद्रा में होते हैं, इसलिए पूजा शाम की होती है, दिन की नहीं। वार के अनुसार नाम बदलता है: सोमवार को सोम प्रदोष, मंगलवार को भौम प्रदोष और शनिवार को शनि प्रदोष — शनि प्रदोष को विशेष फलदायी माना जाता है।
🙏 प्रदोष व्रत कैसे करें
दिन भर फलाहार या एक समय भोजन रखें। शाम को स्नान करके शिवलिंग पर जल, दूध, बेलपत्र और सफ़ेद फूल चढ़ाएँ; घी का दीपक जलाएँ और ‘ॐ नमः शिवाय’ का जाप करें। नंदी के कान में अपनी मनोकामना कहने की परंपरा भी है। पूजा के बाद ही भोजन करें। कई लोग 11 या 26 प्रदोष का संकल्प लेकर यह व्रत शुरू करते हैं।
👤 किसके लिए ख़ास
जिनकी कुंडली में चंद्रमा या शनि कठिन स्थिति में हो, या जो विवाह, संतान और रोग से राहत की कामना रखते हैं, वे प्रदोष का व्रत करते हैं। साढ़ेसाती या शनि की दशा में शनि प्रदोष पर शिव पूजा से मन को सहारा मिलता है।
❓ प्रदोष व्रत — अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रदोष व्रत की पूजा का सही समय क्या है?
त्रयोदशी की शाम, सूर्यास्त के आसपास का समय। सही मिनट आपके शहर के सूर्यास्त पर निर्भर करते हैं, इसलिए तारीख़ यहाँ से लें और समय के लिए ‘आज का पंचांग’ देखें।
प्रदोष व्रत में क्या खाएँ?
दिन में फल, दूध, मखाना या साबूदाना; शाम की पूजा के बाद सात्विक भोजन। नमक कम रखें और लहसुन-प्याज़ से दूर रहें।
सोम प्रदोष और शनि प्रदोष क्या हैं?
जब त्रयोदशी सोमवार को पड़े तो सोम प्रदोष और शनिवार को पड़े तो शनि प्रदोष कहलाता है। ऊपर की सूची में वार देखकर आप अपनी पसंद का प्रदोष चुन सकते हैं।
प्रदोष का व्रत कितने समय तक रखना चाहिए?
कोई बंधन नहीं; परंपरा में लोग 11 या 26 प्रदोष का संकल्प लेते हैं, कुछ लोग पूरे साल रखते हैं। आप अपनी सुविधा से शुरू करें और निभाएँ।
ℹ️ गणना निरयन (लाहिरी) पद्धति से, भारतीय मानक समय में। वह दिन दिखाया गया है जिसके सूर्योदय (सुबह लगभग 6 बजे) के बाद तिथि पूरी होती है। शहर के अनुसार कुछ तिथियाँ एक दिन आगे-पीछे हो सकती हैं, और प्रदोष तथा संकष्टी में शाम या चंद्रोदय के समय की तिथि भी देखी जाती है — इसलिए व्रत से पहले अपने स्थानीय पंचांग या मंदिर के कैलेंडर से एक बार मिला लें।
🔮 आपकी कुंडली में कौन-सा व्रत सबसे उपयोगी?
जन्म कुंडली से आपकी राशि और दशा देखकर बताया जा सकता है कि कौन-सा व्रत और कौन-सा देवता आपके लिए सबसे सहारा देने वाला है।