अगली अमावस्या: 9 नवंबर 2026, सोमवार (4 दिन बाद)
2026 में अमावस्या कुल 12 बार पड़ रही है।
📅 अमावस्या 2026 की सभी तारीखें
| तारीख | वार | तिथि |
|---|---|---|
| 18 जनवरी 2026 | रविवार | कृष्ण पक्ष — तिथि 15 |
| 17 फ़रवरी 2026 | मंगलवार | कृष्ण पक्ष — तिथि 15 |
| 19 मार्च 2026 | गुरुवार | कृष्ण पक्ष — तिथि 15 |
| 17 अप्रैल 2026 | शुक्रवार | कृष्ण पक्ष — तिथि 15 |
| 16 मई 2026 | शनिवार | कृष्ण पक्ष — तिथि 15 |
| 15 जून 2026 | सोमवार | कृष्ण पक्ष — तिथि 15 |
| 14 जुलाई 2026 | मंगलवार | कृष्ण पक्ष — तिथि 15 |
| 12 अगस्त 2026 | बुधवार | कृष्ण पक्ष — तिथि 15 |
| 11 सितंबर 2026 | शुक्रवार | कृष्ण पक्ष — तिथि 15 |
| 10 अक्तूबर 2026 | शनिवार | कृष्ण पक्ष — तिथि 15 |
| 9 नवंबर 2026 | सोमवार | कृष्ण पक्ष — तिथि 15 |
| 9 दिसंबर 2026 | बुधवार | कृष्ण पक्ष — तिथि 15 |
🔍 अमावस्या क्या है और क्यों रखी जाती है
अमावस्या वह दिन है जब चंद्रमा सूर्य के साथ एक ही दिशा में होने से आकाश में दिखाई नहीं देता। जन्म कुंडली में चंद्रमा मन का कारक है, इसलिए इस दिन कई लोगों को बेचैनी, कम नींद या भारीपन महसूस होता है — यह अनुभव आपके अकेले का नहीं है। परंपरा में यह दिन पितरों को याद करने का है: तर्पण, श्राद्ध और दान इसी तिथि पर किए जाते हैं। पितृ पक्ष की सर्वपितृ अमावस्या सबसे बड़ी मानी जाती है। सोमवार को पड़ने वाली अमावस्या सोमवती अमावस्या कहलाती है, और शनिवार को पड़ने वाली शनि अमावस्या पर शनि की शांति के उपाय किए जाते हैं।
🙏 अमावस्या कैसे करें
सुबह स्नान करके पितरों का स्मरण करें। एक लोटे जल में काले तिल डालकर दक्षिण दिशा की ओर मुख करके अर्पित करना सबसे सरल तर्पण है। व्रत रखने वाले दिन में एक बार सात्विक भोजन लेते हैं। किसी ज़रूरतमंद को अन्न, वस्त्र या तिल-गुड़ का दान दें। पीपल के नीचे शाम को दीपक जलाने की परंपरा भी है। नया काम, यात्रा या बड़ा सौदा इस दिन टालने की सलाह अधिकतर पंचांग देते हैं।
👤 किसके लिए ख़ास
जिनके परिवार में पितृ दोष की चर्चा होती है, जिनका जन्म अमावस्या को हुआ है, या जो शनि की साढ़ेसाती से गुज़र रहे हैं — उनके लिए यह दिन विशेष रूप से उपयोगी माना जाता है। पर किसी भय के बिना, श्रद्धा से किया गया छोटा-सा तर्पण भी पर्याप्त है।
❓ अमावस्या — अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
अमावस्या पर क्या करना चाहिए?
स्नान के बाद पितरों के नाम से जल और काले तिल अर्पित करें, ज़रूरतमंद को दान दें, घर में सात्विक भोजन रखें और शाम को दीपक जलाएँ। जो श्राद्ध करते हैं वे परिवार की परंपरा के अनुसार ब्राह्मण भोज या पिंडदान भी करते हैं।
अमावस्या पर क्या नहीं करना चाहिए?
परंपरा में विवाह, गृह प्रवेश जैसे बड़े शुभ कार्य इस दिन टाले जाते हैं; मांसाहार और नशे से भी दूर रहने की सलाह है। यह आस्था और अनुशासन की बात है, डरने की बात नहीं — ज़रूरी काम आप सावधानी से कर सकते हैं।
सोमवती अमावस्या कब होती है?
जब अमावस्या सोमवार को पड़े। ऊपर की सूची में वार देखिए — जिस तारीख के आगे ‘सोमवार’ लिखा है, वही सोमवती अमावस्या है। इस दिन महिलाएँ पीपल की परिक्रमा और व्रत करती हैं।
अमावस्या की तारीख दो दिन क्यों बताई जाती है?
तिथि सूर्योदय के बाद किसी भी समय शुरू या ख़त्म हो सकती है, इसलिए कई बार वह दो तारीख़ों में फैल जाती है। हम वह दिन दिखाते हैं जिसमें तिथि पूरी होती है; स्नान-दान के सही समय के लिए अपने शहर का पंचांग भी देख लें.
ℹ️ गणना निरयन (लाहिरी) पद्धति से, भारतीय मानक समय में। वह दिन दिखाया गया है जिसके सूर्योदय (सुबह लगभग 6 बजे) के बाद तिथि पूरी होती है। शहर के अनुसार कुछ तिथियाँ एक दिन आगे-पीछे हो सकती हैं, और प्रदोष तथा संकष्टी में शाम या चंद्रोदय के समय की तिथि भी देखी जाती है — इसलिए व्रत से पहले अपने स्थानीय पंचांग या मंदिर के कैलेंडर से एक बार मिला लें।
🔮 आपकी कुंडली में कौन-सा व्रत सबसे उपयोगी?
जन्म कुंडली से आपकी राशि और दशा देखकर बताया जा सकता है कि कौन-सा व्रत और कौन-सा देवता आपके लिए सबसे सहारा देने वाला है।