☎ हिंदी ज्योतिष सेवा 📅 17 October 2026
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♈ मेष राशि — राहु-केतु गोचर 2025-2026

Mesh Rashi · राहु-केतु गोचर 2025-2026 · Hindi Jyotish

★★★★☆

राहु मेष से एकादश लाभ भाव में और केतु पंचम भाव में हैं। लाभ भाव का राहु राहु की बारह जगहों में सबसे अनुकूल माना जाता है — पर केतु संतान और निवेश के घर में होने से वहाँ सावधानी चाहिए।

एकादश भाव का राहु — बड़ी इच्छाओं का डेढ़ वर्ष

एकादश भाव आय, बड़े भाई-बहन, मित्रमंडल और पूरी होने वाली इच्छाओं का है। राहु बढ़ाने वाला ग्रह है और इसी घर में उसे सबसे अधिक छूट मिलती है। 18 मई 2025 से मेष जातक का सामाजिक दायरा बदला होगा, नई जान-पहचान बनी होगी और आय का एक अप्रत्याशित रास्ता खुला होगा।

राहु कुंभ में हैं, इसलिए उनके स्वामी शनि हुए, और शनि इस समय मीन में — यानी मेष के द्वादश भाव में, जहाँ इस राशि की साढ़े साती चल रही है। व्यावहारिक अर्थ यह कि लाभ भाव से आने वाला पैसा द्वादश भाव से खर्च भी हो जाता है। मेष को इस अवधि की बढ़ी आय का हिसाब अलग रखना चाहिए। पंचम भाव का केतु संतान और निवेश के मामले में उदासीनता लाता है; सट्टा और तुरंत लाभ की योजनाएँ इन दो वर्षों में टालें।

2026 के ग्रहण मेष के किन भावों में पड़े

राहु-केतु की धुरी ही ग्रहणों की धुरी है। इस गोचर के चार ग्रहण मेष राशि के क्रमशः एकादश, पंचम, चतुर्थ और फिर एकादश भाव में पड़े — तिथियाँ ऊपर के बक्से में दर्ज हैं।

मेष के लिए इनमें सबसे मुखर 3 मार्च 2026 का सिंह वाला चंद्रग्रहण रहा। वह पंचम यानी संतान-विद्या-निवेश के घर में पड़ा, और ठीक उसी घर में केतु डेढ़ वर्ष से बैठे हैं। ग्रहण ने केतु के विषय को गाढ़ा किया: बच्चों की पढ़ाई का निर्णय, अध्ययन की दिशा या कोई अटका निवेश उसी अरसे में सामने आया होगा।

इसके विपरीत एकादश भाव के दो ग्रहण मेष के लिए अपेक्षाकृत हल्के हैं — लाभ भाव का ग्रहण आय का स्रोत बदलता है, रोकता नहीं। 12 अगस्त 2026 का चतुर्थ भाव वाला सूर्यग्रहण मकान और माता के विषय को छूने वाला था। ऊपर दर्ज है कि अगस्त के दोनों ग्रहण भारत से दिखे नहीं थे, इसलिए सूतक का प्रश्न नहीं था; भावों का फल फिर भी बना रहता है।

5 दिसंबर 2026 का धुरी-परिवर्तन और मनसा देवी

5 दिसंबर 2026 को राहु कुंभ से मकर में और केतु सिंह से कर्क में जाते हैं। (मध्यम गणित से 5 दिसंबर, स्पष्ट गणित से 25 नवंबर — पंचांग के अनुसार दस दिन का अंतर आता है।) यह धुरी वहाँ लगभग अठारह महीने, यानी मध्य 2028 तक रहेगी।

मेष के लिए राहु एकादश भाव से दशम कर्म भाव में और केतु पंचम से चतुर्थ सुख भाव में सरकते हैं। लाभ का चरण समाप्त होकर काम, पद और प्रतिष्ठा का चरण शुरू होता है; मकान, ज़मीन और माता के विषयों में केतु की उदासीनता आती है। दिसंबर 2026 के बाद नौकरी में अप्रत्याशित बदलाव या नया अवसर आने की सम्भावना बढ़ती है।

उससे पहले 11 नवंबर 2026 को गुरु और केतु सिंह में 1°15' पर लगभग पूरी तरह युत होते हैं — दोनों के बीच केवल 0.05 अंश। मेष के लिए यह योग पंचम भाव में बनता है, इसलिए अक्टूबर 2026 से जनवरी 2027 के बीच संतान, शिक्षा या निवेश में दिशा-परिवर्तन सम्भव है। उपाय में हरिद्वार की मनसा देवी और व्रत में श्रावण शुक्ल पंचमी की नाग पंचमी इस राशि के लिए कहे जाते हैं।

❓ मेष राशि — अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मेष राशि के लिए राहु-केतु गोचर 2025-2026 कैसा है?

राहु मेष से एकादश लाभ भाव में हैं — राहु की बारह जगहों में सबसे अनुकूल। आय का नया रास्ता और नई जान-पहचान इसका फल है। पर केतु पंचम भाव में होने से संतान और निवेश में सावधानी चाहिए; सट्टा तथा तुरंत लाभ की योजनाएँ टालें।

अगस्त 2026 के ग्रहणों का सूतक भारत में मानना था?

नहीं। 12 अगस्त 2026 के सूर्यग्रहण के समय दिल्ली में सूर्य क्षितिज से 58 अंश नीचे था और 28 अगस्त के चंद्रग्रहण के समय चंद्रमा 43 अंश नीचे। सूतक स्थानीय दृश्यता से तय होता है, इसलिए उत्तर भारत में इन दोनों ग्रहणों का सूतक मानने का कारण नहीं था।

5 दिसंबर 2026 के बाद मेष राशि के लिए क्या बदलेगा?

राहु मकर यानी मेष के दशम कर्म भाव में और केतु कर्क यानी चतुर्थ सुख भाव में जाएँगे। लाभ का चरण समाप्त होकर काम और पद का चरण शुरू होता है; नौकरी में अप्रत्याशित बदलाव या नया अवसर आने की सम्भावना बढ़ती है।

📅 इस गोचर की जाँची हुई तिथियाँ

  • 18 मई 2025 — राहु कुंभ में, केतु सिंह में (मध्यम गणित; स्पष्ट गणित से 29 मई 2025)।
  • ग्रहण — 7 सित. 2025 (कुंभ 21°11'), 17 फ़र. 2026 (कुंभ 4°37'), 3 मार्च 2026 (सिंह 18°38'), 12 अग. 2026 (कर्क 25°49'), 28 अग. 2026 (कुंभ 10°37')।
  • अगस्त 2026 के दोनों ग्रहण भारत से नहीं दिखे, इसलिए उनका सूतक मानने का कारण नहीं था।
  • 5 दिसंबर 2026 — राहु मकर में, केतु कर्क में; यह गोचर समाप्त (स्पष्ट गणित से 25 नवंबर 2026)।

गणना निरयन (लाहिरी) पद्धति से, भारतीय मानक समय में।