☎ हिंदी ज्योतिष सेवा 📅 05 November 2026
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एकादशी 2034 — पूरे साल की तिथियाँ

भगवान विष्णु · हर पक्ष की ग्यारहवीं तिथि (तिथि 11 और 26)

अगली एकादशी: 5 नवंबर 2026, गुरुवार (आज)

2034 में एकादशी कुल 25 बार पड़ रही है।

📅 एकादशी 2034 की सभी तारीखें

तारीखवारतिथि
1 जनवरी 2034रविवारशुक्ल पक्ष — तिथि 11
16 जनवरी 2034सोमवारकृष्ण पक्ष — तिथि 11
30 जनवरी 2034सोमवारशुक्ल पक्ष — तिथि 11
15 फ़रवरी 2034बुधवारकृष्ण पक्ष — तिथि 11
1 मार्च 2034बुधवारशुक्ल पक्ष — तिथि 11
16 मार्च 2034गुरुवारकृष्ण पक्ष — तिथि 11
30 मार्च 2034गुरुवारशुक्ल पक्ष — तिथि 11
15 अप्रैल 2034शनिवारकृष्ण पक्ष — तिथि 11
29 अप्रैल 2034शनिवारशुक्ल पक्ष — तिथि 11
14 मई 2034रविवारकृष्ण पक्ष — तिथि 11
28 मई 2034रविवारशुक्ल पक्ष — तिथि 11
12 जून 2034सोमवारकृष्ण पक्ष — तिथि 11
27 जून 2034मंगलवारशुक्ल पक्ष — तिथि 11
12 जुलाई 2034बुधवारकृष्ण पक्ष — तिथि 11
27 जुलाई 2034गुरुवारशुक्ल पक्ष — तिथि 11
10 अगस्त 2034गुरुवारकृष्ण पक्ष — तिथि 11
25 अगस्त 2034शुक्रवारशुक्ल पक्ष — तिथि 11
8 सितंबर 2034शुक्रवारकृष्ण पक्ष — तिथि 11
24 सितंबर 2034रविवारशुक्ल पक्ष — तिथि 11
8 अक्तूबर 2034रविवारकृष्ण पक्ष — तिथि 11
23 अक्तूबर 2034सोमवारशुक्ल पक्ष — तिथि 11
6 नवंबर 2034सोमवारकृष्ण पक्ष — तिथि 11
22 नवंबर 2034बुधवारशुक्ल पक्ष — तिथि 11
6 दिसंबर 2034बुधवारकृष्ण पक्ष — तिथि 11
21 दिसंबर 2034गुरुवारशुक्ल पक्ष — तिथि 11

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🔍 एकादशी क्या है और क्यों रखी जाती है

एकादशी महीने में दो बार आती है — शुक्ल और कृष्ण पक्ष में — यानी साल में लगभग 24 बार (अधिक मास में 26)। यह भगवान विष्णु का दिन है। नियम सरल है: इस दिन अन्न, ख़ासकर चावल, से परहेज़ किया जाता है। हर एकादशी का अपना नाम है — निर्जला (ज्येष्ठ शुक्ल), देवशयनी (आषाढ़ शुक्ल), मोक्षदा (मार्गशीर्ष शुक्ल), देवउठनी या प्रबोधिनी (कार्तिक शुक्ल) और कई अन्य। देवशयनी से चातुर्मास शुरू होता है और देवउठनी पर विवाह जैसे शुभ कार्य फिर शुरू होते हैं।

🙏 एकादशी कैसे करें

दशमी की रात हल्का भोजन लें। एकादशी को सूर्योदय से पहले स्नान करके विष्णु जी की पूजा करें, तुलसी दल अर्पित करें और ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ का जाप करें। दिन भर फलाहार, दूध या जल पर रहें; चावल और अनाज न लें। द्वादशी को सूर्योदय के बाद शुभ समय में पारण (व्रत खोलना) करें। स्वास्थ्य कमज़ोर हो, गर्भावस्था हो या दवा चल रही हो तो बिना अन्न का कठोर उपवास न करें — फल और दूध से भी व्रत की भावना पूरी होती है।

👤 किसके लिए ख़ास

वैष्णव परंपरा के अनुयायी इसे नियम से रखते हैं। जिनकी कुंडली में गुरु कमज़ोर हो या जो गुरु की दशा-अंतर्दशा से गुज़र रहे हों, उन्हें भी एकादशी की पूजा से मनोबल मिलता है। गृहस्थों के लिए महीने में दो दिन का संयम अपने आप में एक अच्छा अभ्यास है।

❓ एकादशी — अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एकादशी में चावल क्यों नहीं खाते?

मान्यता है कि इस दिन अन्न में दोष का वास होता है; व्यावहारिक रूप से यह दिन हल्का और संयमित रहने का अभ्यास है। फल, सिंघाड़े या कुट्टू का आटा, साबूदाना, आलू और मखाना आम तौर पर लिए जाते हैं।

एकादशी का पारण कब करें?

पारण अगले दिन यानी द्वादशी को सूर्योदय के बाद किया जाता है, द्वादशी तिथि समाप्त होने से पहले। पंचांग में हर एकादशी का पारण समय अलग से दिया रहता है — अपने शहर का समय देख लें।

स्मार्त और वैष्णव एकादशी में क्या अंतर है?

कई बार एकादशी तिथि दो दिन में फैली होती है। गृहस्थ (स्मार्त) पहले दिन और वैष्णव संप्रदाय के अनुयायी दूसरे दिन व्रत रखते हैं। हमारी तारीख़ मानक गणना की है; अपने गुरु या मंदिर की परंपरा पूछ लें।

साल में कितनी एकादशी होती हैं?

आम तौर पर 24 — हर पक्ष में एक। जिस साल अधिक मास आता है, उसमें दो और जुड़ जाती हैं, यानी 26।

ℹ️ गणना निरयन (लाहिरी) पद्धति से, भारतीय मानक समय में। वह दिन दिखाया गया है जिसके सूर्योदय (सुबह लगभग 6 बजे) के बाद तिथि पूरी होती है। शहर के अनुसार कुछ तिथियाँ एक दिन आगे-पीछे हो सकती हैं, और प्रदोष तथा संकष्टी में शाम या चंद्रोदय के समय की तिथि भी देखी जाती है — इसलिए व्रत से पहले अपने स्थानीय पंचांग या मंदिर के कैलेंडर से एक बार मिला लें।

🔮 आपकी कुंडली में कौन-सा व्रत सबसे उपयोगी?

जन्म कुंडली से आपकी राशि और दशा देखकर बताया जा सकता है कि कौन-सा व्रत और कौन-सा देवता आपके लिए सबसे सहारा देने वाला है।

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