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रेवती नक्षत्र लेल नाम | Names for रेवती Nakshatra
🔤 रेवती नक्षत्रक ई नामाक्षर कतय सँ अबैत अछि?
रेवती मीन राशिक १६ अंश ४० कला सँ ३० अंश धरि पसरल अछि आ ई पूरा नक्षत्र-चक्रक अन्तिम नक्षत्र अछि। एकर समाप्त होइते राशि-चक्र सेहो पूरा भ' जाइत अछि आ अश्विनी सँ नव आरम्भ होइत अछि; एही सन्धि केँ मीन-मेष गण्डान्त कहल जाइत अछि, आ रेवतीक अन्तिम चरण मे जन्म हो तँ शान्ति-कर्मक परम्परा अछि।
अक्षर-चक्रक एक सय पाँचम सँ एक सय आठम चरण एतय अबैत अछि। पहिल दू चरण दे, दो उत्तरा भाद्रपदक बाद बचल 'द' शृंखला केँ अन्ततः पूरा करैत अछि आ अन्तिम दू चा, ची ओतहि घुरि अबैत अछि जतय सँ चक्र आरम्भ भेल छल — अश्विनीक चु, चे, चो सेहो 'च' केर स्वररूप छल। एहि तरहेँ एक सय आठ चरणक ई शृंखला वृत्त बनि क' अपना आप सँ जुड़ि जाइत अछि, आ यैह रेवतीक सभ सँ सुन्दर विशेषता थिक। नवांश क्रमशः धनु, मकर, कुम्भ आ मीन बनैत अछि।
👶 रेवती नक्षत्र मे जन्मल बच्चाक स्वभाव
स्वामी बुध, देवता पूषा, गण देवगण, योनि गज आ चिह्न माछ अथवा मृदंग।
पूषा बाटक रक्षक देवता छथि — पशु आ यात्री केँ सुरक्षित गन्तव्य धरि पहुँचाबयवला। रेवतीक बच्चा सभ मे यैह भाव उतरैत अछि: ई ककरो अधूरा बाट पर नहि छोड़ैत अछि, आ दोसरक सहायता करबा मे हिनका असली सन्तोष भेटैत छनि। स्वभाव कोमल, कल्पनाशील आ भावुक होइत अछि; कठोर वातावरण हिनका भीतर धरि चोट पहुँचबैत अछि। बुधक आधिपत्य सँ भाषा, गणित आ कला तीनू मे क्षमता भेटैत अछि, आ गज योनि सँ एकटा शान्त गरिमा। पशु-चिकित्सा, यात्रा आ परिवहन, संगीत आ नृत्य, चिकित्सा, समाजसेवा, शिक्षण, लेखन तथा विदेश-सम्बन्धित कार्य हिनका सभक अनुकूल अछि। व्यावहारिक कठोरता हिनका सिखबाक पड़ैत छनि।
🪔 नामकरण संस्कार — मिथिलाक परंपरा
रेवती अन्तिम नक्षत्र अछि, तेँ मिथिला मे एकरा पूर्णता आ विदाई दुनू सँ जोड़ल जाइत अछि। फाल्गुनक समाप्ति पर होलिका जरैत अछि आ फगुआक तुरन्त बाद चैत्र शुक्ल प्रतिपदा सँ नव विक्रम संवत आरम्भ होइत अछि — रेवती मे जनमल बच्चाक जन्मपत्री वा टिपनि प्रायः ओही सन्धिक आसपास बनैत अछि, आ पंडित ओहि मे पुरान तथा नव संवत्सर दुनूक उल्लेख करैत छथि। बलरामक पत्नी रेवतीक कथाक कारणेँ एहि नक्षत्र मे जनमल कन्याक नाम रेवती रखबाक परम्परा सेहो कतेको घर मे चलि आबि रहल अछि।
नामाक्षर एतय बहुत उदार अछि — देव, देवांश, देविका, दोहित, चारु, चाहत, चिराग, चित्रा सन नाम सहजहि भेटि जाइत अछि, तेँ परिवारक पसिन्न आ शास्त्रक टकराव कमे होइत अछि। असली प्रश्न गण्डान्तक अछि: जँ जन्म रेवतीक अन्तिम चरण मे भेल अछि तँ सत्ताइसम दिन शान्ति-कर्मक बादे नामकरण करबाक रीति अछि, आ ताधरि बच्चा केँ कोनो स्थायी नाम नहि देल जाइत अछि। पूषा यात्राक रक्षक छथि, तेँ एहि नक्षत्रक परिवार सभ मे शान्तिक बाद शिशु केँ पहिल बेर घर सँ बाहर सूर्य-दर्शन करयबाक रस्म विशेष उत्साह सँ निभाओल जाइत अछि।
ℹ️ नक्षत्र-आधारित नामक महत्व | Why Nakshatra-based Names?
हिंदू ज्योतिष मे बच्चाक नाम रखैत काल ओकर जन्म नक्षत्र आ चरणक अनुसार नामाक्षर (नामक पहिल अक्षर) चुनबाक परंपरा अछि। मिथिला मे एकरा राशि नाम कहल जाइत अछि आ एही अक्षर सँ नाम राखब शुभ मानल जाइत अछि।
मान्यता अछि जे नक्षत्रक नामाक्षर पर नाम रखला सँ बच्चा केँ सौभाग्य, स्वास्थ्य आ जीवन मे सफलता भेटैत अछि।
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