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दशा फल

विंशोत्तरी महादशा — 120 वर्षक ग्रह-चक्र

Vimshottari Mahadasha Explained

23 September 2025  |  👁 695 बेर पढ़ल गेल  |  ⏱ लगभग 3 मिनटक लेख

विंशोत्तरी महादशा — 120 वर्षक ग्रह-चक्र

वैदिक ज्योतिष मे कोनो फल ‘कहिया’ भेटत, से दशा प्रणाली सँ निर्धारित होइत अछि। सभसँ प्रचलित पद्धति ‘विंशोत्तरी दशा’ अछि, जे जन्मक समय चन्द्रमा जाहि नक्षत्र मे रहैत छथि, ओकर स्वामी ग्रह सँ आरम्भ होइत अछि। ‘विंशोत्तरी’क अर्थ अछि एक सय बीस — कारण सभ नौ ग्रहक दशा-अवधि मिलाकए कुल 120 वर्ष होइत अछि।

नौ ग्रहक दशा-अवधि

प्रत्येक ग्रह केँ एकटा निश्चित वर्ष-संख्या भेटैत अछि — केतु 7 वर्ष, शुक्र 20, सूर्य 6, चंद्र 10, मंगल 7, राहु 18, गुरु 16, शनि 19 आ बुध 17 वर्ष। ई अवधि सभ एकटा निश्चित क्रम मे चलैत अछि। जाहि ग्रहक महादशा चलैत अछि, ओ ओहि अवधि मे जीवनक ‘मुख्य संचालक’ बनि जाइत अछि आ अपन स्वभाव तथा कुंडली मे अपन स्थितिक अनुसार फल दैत अछि।

महादशा आ अंतर्दशा

प्रत्येक महादशा फेर ओहि नौ ग्रहक छोट-छोट अवधि मे बँटैत अछि, जकरा ‘अंतर्दशा’ वा ‘भुक्ति’ कहल जाइत अछि। उदाहरण लेल शनिक महादशा (19 वर्ष) भीतर पहिने शनिक अंतर्दशा, फेर बुध, फेर केतु — एहि क्रम मे। वास्तविक घटनाक समय महादशा आ अंतर्दशाक मेल सँ निर्धारित होइत अछि। एकटा शुभ महादशा मे सेहो कोनो अशुभ ग्रहक अंतर्दशा चुनौती आनि सकैत अछि।

दशाक फल कोना पढ़ू

कोनो ग्रहक दशा शुभ होयत वा नहि, से तीन बात पर निर्भर करैत अछि — ओ ग्रह कुंडली मे कोन भाव मे अछि, कोन-कोन भावक स्वामी अछि, आ ओहि पर कोन-कोन ग्रहक दृष्टि अछि। एके ग्रह कोनो कुंडली मे समृद्धि आ दोसर मे संघर्ष दऽ सकैत अछि। तेँ दशा-फल सदिखन पूरा कुंडलीक संदर्भ मे देखल जाइत अछि, मात्र ग्रहक स्वभाव सँ नहि।

दशा-संधिक समय

जखन एक महादशा समाप्त भऽ दोसर आरम्भ होइत अछि, ओहि संक्रमण-काल केँ ‘दशा-संधि’ कहल जाइत अछि। ई समय प्रायः परिवर्तन आ मानसिक अस्थिरताक मानल जाइत अछि, तेँ एहि बीच पैघ निर्णय सोचि-विचारि कऽ लेबाक सलाह देल जाइत अछि।

अहाँ एखन कोन महादशा आ अंतर्दशा मे चलि रहल छी, से जानबाक लेल अपन निःशुल्क कुंडली बनाउ वा दशा फल पृष्ठ देखू।

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