शुभ मुहूर्त — विवाह, गृह प्रवेश आ नव काजक सही समय
मिथिलाक परंपरा मे कोनो महत्वपूर्ण काज शुभ समय, अर्थात् ‘मुहूर्त’, मे आरंभ करबाक मान्यता अछि — आ एहि लेल घर-घर मे पतरा देखल जाइत अछि। एकर पाछाँ विचार ई अछि जे जखन आकाश मे ग्रह आ समयक तत्व अनुकूल होइत अछि, तखन आरंभ कयल काज सुगमता सँ आगाँ बढ़ैत अछि। मुहूर्त कोनो अंधविश्वास नहि, बल्कि पंचांगक तत्वक सुव्यवस्थित मेल थिक।
मुहूर्त कोन तत्व सँ बनैत अछि
एकटा शुभ मुहूर्त मुख्यतः पाँच बात सँ तय होइत अछि — तिथि, वार (दिन), नक्षत्र, योग आ करण। एकरा संग चन्द्रमाक स्थिति आ लग्न सेहो देखल जाइत अछि। जखन ई तत्व आपस मे आ काजक स्वभाव सँ मेल खाइत अछि, तखने समय केँ शुभ मानल जाइत अछि।
विवाह मुहूर्त
विवाहक लेल विशेष रूप सँ अनुकूल नक्षत्र (जेना रोहिणी, मृगशिरा, मघा, हस्त, स्वाति, अनुराधा), शुभ तिथि आ गुरु-शुक्रक अस्त नहि रहबाक ध्यान राखल जाइत अछि। जखन बृहस्पति वा शुक्र अस्त होथि, तँ ओहि अवधि मे विवाह टारि देल जाइत अछि। मिथिला मे वर-कन्याक कुंडली मिलान आ पंजीकार द्वारा सिद्धांत लिखलाक बादे मुहूर्त तय कयल जाइत अछि।
गृह प्रवेश आ आन काज
नव घर मे प्रवेशक लेल स्थिर स्वभाव बला नक्षत्र आ शुभ तिथि चुनल जाइत अछि, तथा ‘गृह प्रवेश’ सामान्यतः उत्तरायणक समय शुभ मानल जाइत अछि। व्यापार आरंभ, वाहन किनब, नामकरण, मुंडन वा उपनयन सन काजक लेल अलग-अलग अनुकूल तत्व होइत अछि।
राहुकाल आ अशुभ समय सँ बचाव
शुभ समय चुनबाक संग-संग अशुभ समय सँ बचब सेहो ओतबे जरूरी अछि। प्रत्येक दिनक राहुकाल, यमगंड आ गुलिक काल नव काजक लेल टारबा योग्य मानल जाइत अछि। एहि तरहेँ भद्रा आ अमावस्या सन काल मे सेहो शुभ काज नहि कयल जाइत अछि।
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