रत्न विज्ञान — कोन रत्न कोन ग्रहक लेल
ज्योतिष मे रत्न केँ ग्रहक ऊर्जाक माध्यम मानल जाइत अछि। मान्यता अछि जे सही रत्न संबंधित ग्रहक शुभ किरण केँ बढ़ा कऽ ओकर सकारात्मक फल केँ मजगूत करैत अछि। प्रत्येक ग्रहक अपन एकटा निर्धारित रत्न अछि, आ ओकरा धारण करबाक उद्देश्य ग्रह केँ ‘बल’ देब होइत अछि, ने कि प्रत्येक समस्याक तुरंत समाधान पाएब।
नओ ग्रह आ हुनक रत्न
सूर्यक लेल माणिक्य, चन्द्रमाक लेल मोती, मंगलक लेल मूंगा, बुधक लेल पन्ना, गुरु (बृहस्पति) क लेल पुखराज, शुक्रक लेल हीरा, शनिक लेल नीलम, राहुक लेल गोमेद आ केतुक लेल लहसुनिया (कैट्स आई) निर्धारित अछि। एहि मे पुखराज आ मोती केँ सभसँ ‘सौम्य’ मानल जाइत अछि, जखन कि नीलम केँ सभसँ तीव्र प्रभाव बला।
रत्न कोन आधार पर चुनल जाइत अछि
सही रत्न कहियो मात्र राशि देखि नहि चुनल जाइत अछि। एहि लेल देखल जाइत अछि जे कोन ग्रह कुंडली मे शुभ भाव (विशेषकऽ लग्न, पंचम आ नवम) क स्वामी छथि आ हुनका बलक आवश्यकता छनि। कोनो अशुभ भावक स्वामीक रत्न पहिरला सँ लाभक बदला हानि भऽ सकैत अछि — इएह कारण अछि जे रत्न-चयन विशेषज्ञक काज थिक।
धारण करबा सँ पहिने सावधानी
नीलम सन तीव्र रत्न केँ सदिखन किछु दिन परीक्षणक रूप मे पहिरबाक सलाह देल जाइत अछि, किएक तँ एकर असर तेजी सँ देखाइत अछि। रत्न शुद्ध, बिना दरारि बला आ निर्धारित धातु आ आँगुर मे, शुभ मुहूर्त मे धारण करबाक चाही। दू परस्पर-विरोधी ग्रहक रत्न (जेना नीलम आ माणिक्य) संग पहिरय सँ बचबाक चाही।
रत्न एकमात्र उपाय नहि
रत्न केँ ज्योतिषीय उपायक एकटा भाग मानबाक चाही, संपूर्ण समाधान नहि। मंत्र-जाप, दान आ सेवा सन उपाय सेहो ग्रह केँ संतुलित करैत अछि। कोनो रत्न पहिरबा सँ पहिने पूरा कुंडलीक विश्लेषण अवश्य कराउ।
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