नक्षत्र — 27 तारामंडल आ अहाँक जन्म नक्षत्र
जतय राशि आकाश केँ बारह भाग मे बँटैत अछि, ओतहि नक्षत्र ओकरा सत्ताईस भाग मे बँटैत अछि। तेँ नक्षत्र कोनो व्यक्तिक स्वभावक राशियो सँ सूक्ष्म चित्र दैत अछि। ‘जन्म नक्षत्र’ ओ तारामंडल थिक जाहि मे जन्मक समय चन्द्रमा स्थित रहैत छथि, आ इएह भारतीय ज्योतिषक कतेको गणनाक आधार थिक।
नक्षत्र आ ओकर चरण
प्रत्येक नक्षत्र चारि ‘चरण’ (पाद) मे बँटल रहैत अछि, अर्थात् कुल 27 × 4 = 108 चरण। प्रत्येक चरण कोनो एक राशि सँ जुड़ल रहैत अछि, तेँ नक्षत्र आ चरण मिलि कऽ तय करैत अछि जे चन्द्रमा कोन राशि मे छथि। बच्चाक नामकरणक पहिल अक्षर सेहो परंपरागत रूप सँ एही जन्म-नक्षत्र-चरण सँ चुनल जाइत अछि।
नक्षत्रक स्वामी ग्रह
सत्ताईस नक्षत्र नओ ग्रह मे क्रमवार बँटल अछि — केतु, शुक्र, सूर्य, चंद्र, मंगल, राहु, गुरु, शनि आ बुध। इएह क्रम विंशोत्तरी दशाक आधार बनैत अछि। उदाहरणक लेल अश्विनी, मघा आ मूल नक्षत्र केतुक स्वामित्व मे अछि, तेँ एहि नक्षत्र मे जन्मल लोकक दशा केतु सँ आरंभ होइत अछि।
नक्षत्र सँ की-की पता चलैत अछि
जन्म नक्षत्र सँ व्यक्तिक मूल स्वभाव, मानसिक प्रवृत्ति, अनुकूल दिशा आ एतय धरि जे विवाह-मिलानक पैघ भाग तय होइत अछि। कुंडली मिलान मे अष्टकूटक अधिकांश गुण नक्षत्रे पर आधारित होइत अछि। तेँ मिथिलाक परंपरा मे जन्म राशियो सँ बेसी जन्म नक्षत्र केँ महत्व देल जाइत अछि।
गंडमूल नक्षत्र
किछु नक्षत्र — अश्विनी, आश्लेषा, मघा, ज्येष्ठा, मूल आ रेवती — ‘गंडमूल’ कहबैत अछि। एहि मे जन्म भेला पर परंपरागत रूप सँ 27म दिन शांति-पूजाक सलाह देल जाइत अछि, यद्यपि एकर फल सदिखन अशुभ नहि होइत अछि।
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