गोचर — ग्रहक संक्रमण आ जन्मकुंडली पर प्रभाव
जन्मकुंडली एकटा स्थिर चित्र थिक — जन्मक क्षण आकाश जेहन छल, तेहन। मुदा ग्रह आकाश मे निरंतर गति करैत रहैत छथि। एही वर्तमान गति केँ ‘गोचर’ कहल जाइत अछि। गोचर-फल ई देखला सँ निकलैत अछि जे आइ ग्रह जतय छथि, ओ अहाँक जन्म-राशि आ भाव सँ कोन तरहेँ संबंध बना रहल छथि। दशा ‘आंतरिक समय’ बतबैत अछि, तँ गोचर ‘बाहरी परिस्थिति’।
गोचर कोना देखल जाइत अछि
भारतीय पद्धति मे गोचर सामान्यतः जन्मक चंद्र राशि सँ देखल जाइत अछि। कोनो ग्रहक गोचर-फल एहि बात पर निर्भर करैत अछि जे ओ चंद्र राशि सँ कोन भाव मे संक्रमण कऽ रहल छथि। किछु भाव कोनो ग्रहक लेल शुभ आ किछु अशुभ मानल जाइत अछि।
शनिक गोचर
शनि सभसँ धीमा गतिक ग्रह छथि आ एक राशि मे लगभग अढ़ाइ वर्ष रहैत छथि। जखन ई चंद्र राशि सँ बारहम, पहिल आ दोसर भाव सँ गुजरैत छथि, तँ ओ अवधि ‘साढ़े साती’ कहबैत अछि; चारिम आ आठम भावक गोचर केँ ‘ढैया’ कहल जाइत अछि। शनिक गोचर अनुशासन, परिश्रम आ धैर्यक परीक्षा लैत अछि, मुदा मेहनतिक स्थायी फल सेहो दैत अछि।
गुरुक गोचर
बृहस्पति एक राशि मे लगभग एक वर्ष रहैत छथि आ एकरा सभसँ शुभ गोचर मानल जाइत अछि। चंद्र राशि सँ दोसर, पाँचम, सातम, नवम आ एगारहम भाव मे गुरुक गोचर विशेष रूप सँ लाभकारी — विवाह, संतान, शिक्षा आ आर्थिक उन्नतिक अवसर अनय बला मानल जाइत अछि।
राहु-केतुक गोचर
राहु आ केतु सदिखन उनटा दिशा मे चलैत छथि आ लगभग डेढ़ वर्ष एक राशि मे रहैत छथि। हिनक गोचर अचानक बदलाव, नव महत्वाकांक्षा आ अप्रत्याशित घटना सँ जुड़ल होइत अछि।
वर्तमान शनि आ गुरु गोचरक अपन राशि पर असर देखबाक लेल शनि गोचर आ गुरु गोचर पेज देखू।
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