☎ हिंदी ज्योतिष सेवा 📅 16 October 2026
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♑ मकर राशि — शनि गोचर 2025-2027

Makar Rashi · शनि गोचर 2025-2027 · Hindi Jyotish

★★★★☆

शनि — मकर के स्वामी — जन्मराशि से तृतीय भाव में हैं। तृतीय भाव शनि की बारह जगहों में सबसे अनुकूल माना जाता है। मकर की साढ़े साती जनवरी 2023 में समाप्त हो चुकी है और इस समय ढैया भी नहीं है।

पराक्रम भाव में राशि-स्वामी शनि

तृतीय भाव का अर्थ है साहस, स्वप्रयत्न, भाई-बहन, छोटी यात्राएँ और नया कौशल। उपचय भाव होने से पापग्रह भी यहाँ शुभ फल देता है, और शनि तो मकर के अपने स्वामी हैं। इन दो बातों के मिलने से मार्च 2025 से जून 2027 मकर के लिए शनि की दृष्टि से सबसे खुला समय है।

व्यावहारिक भाषा में इस चरण में साहसी निर्णय फलते हैं। नया कौशल सीखना, नई भूमिका में जाना, अपना कुछ शुरू करना और दूसरे शहर में अवसर खोजना — शनि इनमें अड़ंगा नहीं लगाते। लेखन, मीडिया, बिक्री, परिवहन और प्रशिक्षण के क्षेत्र में इस राशि को विशेष सफलता मिलती है। भाई-बहनों से पुराने मतभेद भी इसी अवधि में मिटने की सम्भावना अधिक है।

पंचम, नवम और द्वादश भाव पर दृष्टि

तृतीय भाव के शनि की तृतीय, सप्तम और दशम दृष्टि मकर राशि के पंचम, नवम और द्वादश भाव पर पड़ती है।

पंचम भाव पर तृतीय दृष्टि सौम्य है और बच्चों की पढ़ाई तथा दीर्घकालिक निवेश को अनुशासन देती है। नवम भाव पर सप्तम दृष्टि भाग्य और पिता के घर पर है — पिता के स्वास्थ्य पर ध्यान देना और विदेश का आवेदन जल्दबाज़ी में न करना इसकी चेतावनी है।

द्वादश भाव पर दशम दृष्टि खर्च और नींद के घर पर है; इन दो वर्षों में हिसाब रखना और सोने का समय सँभालना ज़रूरी हो जाता है। एक महत्वपूर्ण आगे की सूचना — मकर का कंटक शनि 3 जून 2027 से शुरू होता है, क्योंकि तब शनि मेष यानी मकर से चतुर्थ भाव में जाते हैं और वहाँ वे नीच के भी होते हैं। वह चरण 2030 तक चलेगा, इसलिए मकर के पास आगे दो वर्ष खुले हैं और उन्हीं को योजना के लिए इस्तेमाल करना है।

वक्री शनि, पुष्कर और शनिवार व्रत

27 जुलाई से 11 दिसंबर 2026 के साढ़े चार महीनों में शनि वक्री रहते हैं। तृतीय भाव का वक्री शनि यानी छोड़ा हुआ कौशल फिर सीखने का अवसर, रोका हुआ उपक्रम फिर शुरू होना या भाई-बहनों से हुआ पुराना झगड़ा फिर सामने आकर मिटना।

राशि-स्वामी स्वयं वक्री होने से मकर जातकों को इस अवधि में एक तरह की अंतर्मुखता महसूस होती है — अपने काम का लेखा-जोखा लेने का मन होता है, और लेना भी चाहिए। 11 दिसंबर 2026 के बाद शनि मार्गी होते हैं; जनवरी से मई 2027 नई शुरुआत के लिए इस पूरे गोचर का सर्वश्रेष्ठ दौर है, क्योंकि उसके तुरंत बाद कंटक शनि का चरण शुरू होने वाला है। इन पाँच महीनों में लिए गए निर्णय अगले तीन वर्षों की व्यवस्था बना देते हैं।

उपाय में अजमेर ज़िले का पुष्कर — ब्रह्मा मंदिर और पुष्कर सरोवर इस राशि के लिए कहा जाता है; कार्तिक पूर्णिमा का पुष्कर मेला और सरोवर स्नान उत्तर भारत की जानी-मानी परंपरा है। व्रत में शनिवार का व्रत — शनि स्वयं स्वामी हैं, इसलिए इस राशि को शनि से डरना नहीं चाहिए; शनिवार को तिल, लोहा और तेल का दान तथा श्रमिकों-वृद्धों के साथ सम्मान से व्यवहार इतना ही पर्याप्त है। एक स्पष्ट सलाह: मकान, ज़मीन या माता के स्वास्थ्य से जुड़ा जो काम करना है, वह जून 2027 से पहले कर लें।

❓ मकर राशि — अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मकर राशि की साढ़े साती समाप्त हो गई है?

हाँ। मकर राशि की साढ़े साती जनवरी 2023 में समाप्त हो गई। इस समय शनि मीन में यानी मकर से तृतीय भाव में हैं — शनि की बारह जगहों में सबसे अनुकूल मानी जाने वाली जगह। इस समय ढैया भी नहीं है।

मकर राशि को अगला शनि चरण कब और कौन-सा है?

3 जून 2027 को शनि मेष यानी मकर से चतुर्थ भाव में जाएँगे और तब कंटक शनि — ढैया — शुरू होगा; वह 2030 तक चलेगा। मेष में शनि नीच के भी होते हैं, इसलिए मकान, ज़मीन और माता का स्वास्थ्य तब सामने आएँगे।

मकर राशि को महत्वपूर्ण निर्णय कब लेने चाहिए?

जनवरी से मई 2027 सर्वश्रेष्ठ है — 11 दिसंबर 2026 को शनि मार्गी होते हैं और 3 जून 2027 से कंटक शनि शुरू हो जाता है। इन पाँच महीनों में लिए गए निर्णय अगले तीन वर्षों की व्यवस्था बना देते हैं।

📅 इस गोचर की जाँची हुई तिथियाँ

  • 29 मार्च 2025 — शनि कुंभ से मीन में; 17 मई 2026 को रेवती नक्षत्र में।
  • 27 जुलाई 2026 — शनि मीन के 20°31' पर वक्री।
  • 9 अक्टूबर 2026 — वक्री शनि रेवती से फिर उत्तरा भाद्रपद में; 11 दिसंबर 2026 को 13°41' पर मार्गी।
  • 3 जून 2027 — शनि मीन छोड़कर मेष में; यह गोचर समाप्त।

गणना निरयन (लाहिरी) पद्धति से, भारतीय मानक समय में।