📐 यह योग कैसे बनता है?
पंच महापुरुष योगों में पहला रुचक योग है। यह तब बनता है जब मंगल लग्न से केंद्र (1, 4, 7, 10) में हो और साथ ही अपनी स्वराशि मेष या वृश्चिक में, अथवा उच्च राशि मकर में स्थित हो।
योग का बल सर्वाधिक तब होता है जब मंगल लग्न या दशम भाव में हो। चंद्रमा से भी केंद्र बन जाए तो फल दोगुना हो जाता है। मंगल यदि वक्री होकर भी बली हो तो योग बना रहता है।
यदि मंगल अस्त हो, राहु या शनि से पीड़ित हो, अथवा नीच राशि कर्क की ओर बढ़ रहा हो तो रुचक योग नाममात्र का रह जाता है। मंगल पर बृहस्पति की दृष्टि इस योग की उग्रता को संतुलित करती है और उसे अधिक उपयोगी बनाती है।
✨ फल
व्यक्तित्व
रुचक योग वाले जातक का शरीर सुगठित, चेहरा तेजस्वी और चाल में आत्मविश्वास होता है। स्वर में आदेश का स्वाभाविक भाव रहता है, जिससे लोग इनकी बात सहज ही मान लेते हैं।
कार्यक्षेत्र
सेना, पुलिस, अर्धसैनिक बल, शल्य-चिकित्सा, अभियांत्रिकी, निर्माण, खेल, भूमि-व्यवसाय और सुरक्षा-सेवाएँ इस योग वाले जातकों के लिए सर्वोत्तम हैं। संकट के समय निर्णय लेने की क्षमता इनकी सबसे बड़ी विशेषता है।
जीवन-गति
प्रारंभिक जीवन में संघर्ष रहता है, पर 28 से 35 वर्ष के बीच स्थिति तेज़ी से बदलती है। मंगल की दशा-अंतर्दशा में पद, भूमि और अधिकार तीनों की प्राप्ति होती है।
सावधानियाँ
क्रोध और जल्दबाज़ी इस योग की सबसे बड़ी बाधा हैं। एक कठोर निर्णय वर्षों की उपलब्धि को हानि पहुँचा सकता है। रक्तचाप और दुर्घटना से भी सावधानी आवश्यक है।
उपाय
मंगलवार का व्रत, हनुमान चालीसा और सुंदरकांड का पाठ, लाल मसूर का दान तथा नियमित शारीरिक व्यायाम मंगल की ऊर्जा को सही दिशा देते हैं।
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