📐 यह योग कैसे बनता है?
चंद्रमा और मंगल की युति से चंद्र-मंगल योग बनता है। कुछ आचार्य परस्पर दृष्टि-संबंध को भी इस योग में सम्मिलित करते हैं, विशेषतः जब दोनों एक-दूसरे से सप्तम स्थान में हों।
चंद्रमा मन और तरलता का कारक है, मंगल साहस और गति का। दोनों मिलकर धन कमाने की तीव्र प्रेरणा उत्पन्न करते हैं। यही कारण है कि इसे प्रमुख धन योगों में गिना जाता है, विशेषकर तब जब यह द्वितीय, एकादश अथवा दशम भाव में बने।
यदि चंद्रमा क्षीण हो अथवा मंगल नीच राशि कर्क में हो, तो योग धन तो देता है पर मानसिक अशांति भी। छठे, आठवें या बारहवें भाव में बनने पर यह योग विवाद और अस्थिरता के साथ आता है।
✨ फल
सामान्य फल
यह योग धन कमाने की असाधारण क्षमता देता है। ऐसे जातक अवसर को शीघ्र पहचानते हैं और निर्णय लेने में देर नहीं करते। व्यापार में इनकी सफलता का यही रहस्य है।
कार्यक्षेत्र
व्यापार, अचल संपत्ति, वित्तीय सेवाएँ, शेयर बाज़ार, आयात-निर्यात, तरल पदार्थों का व्यवसाय और होटल-उद्योग इस योग वाले जातकों के लिए अनुकूल हैं। नौकरी की तुलना में स्वतंत्र व्यवसाय इन्हें अधिक फल देता है।
स्वभाव पर प्रभाव
मन और साहस के मिलन से जातक भावनात्मक रूप से तीव्र होता है। निर्णय शीघ्र होते हैं, पर उनमें भावना का पुट रहता है। यही योग जब पीड़ित हो तो जोखिम की प्रवृत्ति अत्यधिक बढ़ा देता है।
सावधानियाँ
शास्त्र इस योग के साथ एक चेतावनी भी देता है — कमाई का मार्ग सदा पारदर्शी रहे, इसका ध्यान रखना आवश्यक है। सट्टा और अत्यधिक उधार लेकर किया गया विस्तार इस योग की सबसे बड़ी हानि है।
उपाय
मंगलवार को हनुमान चालीसा का पाठ, सोमवार को शिवलिंग पर जल अर्पण, तथा आय का कुछ अंश नियमित रूप से अन्न-दान में लगाना इस योग को शुभ दिशा देता है।
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