📐 यह योग कैसे बनता है?
जब दो ग्रह एक-दूसरे की राशि में बैठ जाएँ — जैसे सूर्य कर्क में और चंद्रमा सिंह में — तब परिवर्तन योग बनता है। इसे राशि-परिवर्तन अथवा मित्र-परिवर्तन भी कहा जाता है, और यह दोनों भावों को आपस में जोड़ देता है।
शास्त्र में इसके तीन भेद बताए गए हैं। महा योग तब बनता है जब दोनों भाव शुभ हों — 1, 2, 4, 5, 7, 9, 10, 11। खल योग तब बनता है जब एक भाव शुभ और दूसरा 3, 6 या 12 हो। दैन्य योग तब बनता है जब कोई भाव 6, 8 या 12 का हो।
महा योग अत्यंत शुभ फल देता है, खल योग मिश्रित और दैन्य योग कष्टकारी माना जाता है। परिवर्तन में सम्मिलित ग्रहों का बल और उन पर पड़ने वाली दृष्टि अंतिम फल तय करती है।
✨ फल
सामान्य फल
परिवर्तन योग दो भावों के फल को एक-दूसरे से जोड़ देता है। एक भाव की उन्नति दूसरे भाव के माध्यम से आती है — जैसे दशम और एकादश का परिवर्तन हो तो नौकरी से ही बड़ा लाभ मिलता है।
महा योग
शुभ भावों के स्वामियों का परिवर्तन जीवन में स्थायी उन्नति देता है। धन, पद, विवाह और संतान — जिन भावों का परिवर्तन हो, उन्हीं क्षेत्रों में विशेष सफलता मिलती है।
दैन्य योग
6, 8, 12 भावों से जुड़ा परिवर्तन संघर्ष, ऋण और स्वास्थ्य-चिंता देता है। किंतु यदि दोनों ही भाव दुःस्थान हों तो यह विपरीत राज योग जैसा फल देकर शुभ भी हो सकता है।
दशा-काल
परिवर्तन में सम्मिलित दोनों ग्रहों की दशा-अंतर्दशा में योग का पूरा फल प्रकट होता है। एक की दशा में दूसरे भाव का फल भी मिल जाता है — यही इस योग की विशेषता है।
उपाय
दोनों ग्रहों से संबंधित वार के व्रत और दान, तथा जिस भाव का फल कमज़ोर हो उससे संबंधित सेवा-कार्य इस योग को संतुलित करते हैं।
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