📐 यह योग कैसे बनता है?
भद्र योग पंच महापुरुष योगों में बुध से बनने वाला योग है। यह तब निर्मित होता है जब बुध लग्न से केंद्र में हो और मिथुन अथवा कन्या राशि में स्थित हो। कन्या बुध की उच्च राशि भी है, इसलिए कन्या का केंद्रस्थ बुध इस योग का सर्वश्रेष्ठ रूप है।
यहाँ एक विशेष सावधानी आवश्यक है। बुध सूर्य के निकट रहता है, इसलिए अस्त होने की संभावना अधिक रहती है। अस्त बुध से बना भद्र योग बहुत कमज़ोर फल देता है। बुध का सूर्य से पर्याप्त दूरी पर होना यहाँ अनिवार्य शर्त है।
बुध यदि मीन राशि में नीच हो अथवा राहु-केतु से पीड़ित हो तो योग भंग माना जाता है। बृहस्पति की दृष्टि बुध पर पड़े तो योग की गुणवत्ता कई गुना बढ़ जाती है।
✨ फल
व्यक्तित्व
भद्र योग वाले जातक की सबसे बड़ी पहचान उसकी वाणी और बुद्धि है। आयु से कम दिखने वाला चेहरा, फुर्तीली चाल और शीघ्र समझने की क्षमता इस योग के स्पष्ट लक्षण हैं।
शिक्षा और कार्यक्षेत्र
गणित, लेखा, विधि, संगणक विज्ञान, लेखन, अनुवाद, संपादन, अध्यापन, दलाली और परामर्श — इन सभी में यह योग असाधारण सफलता देता है। प्रतियोगी परीक्षाओं में इस योग वाले जातक विशेष रूप से आगे रहते हैं।
व्यवसाय
व्यापार में मोल-भाव, अनुबंध और आँकड़ों की समझ इनकी सबसे बड़ी पूँजी है। प्रकाशन, विपणन, सूचना-प्रौद्योगिकी और वित्तीय सेवाओं में ये अपनी अलग पहचान बनाते हैं।
सावधानियाँ
अत्यधिक तर्क और हर बात में दो पक्ष देखने की आदत निर्णय में विलंब कराती है। साथ ही चतुराई का अनुचित प्रयोग इस योग के फल को शीघ्र नष्ट कर देता है।
उपाय
बुधवार को गणेश-उपासना, हरे मूँग और हरे वस्त्र का दान, तुलसी की सेवा तथा विद्यार्थियों को नि:शुल्क शिक्षण देना बुध को और बलवान बनाता है।
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