📐 यह योग कैसे बनता है?
चंद्रमा से बारहवें भाव में सूर्य, राहु और केतु को छोड़कर कोई भी ग्रह स्थित हो, तब अनफा योग बनता है। यह सुनफा का पूरक योग है — वहाँ चंद्रमा के आगे ग्रह होता है, यहाँ पीछे।
यहाँ भी फल का स्वरूप उस ग्रह पर निर्भर करता है। बृहस्पति हो तो धार्मिकता और सम्मान, शुक्र हो तो सुख और आकर्षण, बुध हो तो वाक्-चातुर्य, मंगल हो तो साहस तथा शनि हो तो वैराग्य और सहनशीलता की वृद्धि होती है।
चंद्रमा का बलवान होना यहाँ विशेष महत्व रखता है, क्योंकि द्वादश भाव व्यय और त्याग का है। क्षीण चंद्रमा के साथ बना अनफा योग फल तो देता है, पर उसके साथ मानसिक बेचैनी भी रहती है।
✨ फल
सामान्य फल
अनफा योग वाले जातक स्वभाव से शांत, सौम्य और आत्म-संयमी होते हैं। दूसरों की सहायता करना इनकी प्रवृत्ति है और यही गुण इन्हें समाज में सम्मान दिलाता है।
स्वभाव और जीवन-दृष्टि
भौतिक संग्रह की अपेक्षा मानसिक शांति इन्हें अधिक प्रिय है। मध्य आयु के बाद अध्यात्म और सेवा-कार्यों की ओर झुकाव स्पष्ट रूप से बढ़ता है।
कार्यक्षेत्र
चिकित्सा, परामर्श, अध्यापन, शोध, समाजसेवा, धार्मिक संस्थाएँ, विदेश से जुड़े कार्य और आतिथ्य — इन क्षेत्रों में यह योग अच्छा फल देता है।
सावधानियाँ
द्वादश भाव व्यय का है, इसलिए यह योग उदारता के साथ अनियंत्रित ख़र्च भी दे सकता है। नींद की गुणवत्ता और मानसिक थकान पर भी ध्यान देना आवश्यक है।
उपाय
सोमवार का व्रत, चंद्रमा के मंत्र का जप, श्वेत वस्तुओं का दान, माता की सेवा और नियमित ध्यान इस योग के शुभ पक्ष को और प्रबल करते हैं।
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