📐 यह योग कैसे बनता है?
चंद्रमा से छठे, सातवें और आठवें भाव में शुभ ग्रह — बुध, बृहस्पति और शुक्र — स्थित हों, तब अधि योग बनता है। तीनों भावों में तीनों शुभ ग्रह हों तो योग पूर्ण, दो में हों तो मध्यम और एक में हो तो साधारण माना जाता है।
कुछ आचार्य इसी गणना को लग्न से भी करते हैं। चंद्रमा से बनने वाला अधि योग अधिक प्रभावी माना गया है, क्योंकि यह मन और मनःस्थिति से सीधा संबंध रखता है।
यदि ये शुभ ग्रह अस्त हों, नीच राशि में हों अथवा पाप ग्रहों के साथ बैठे हों तो अधि योग का फल घट जाता है। शुभ ग्रहों का बलवान और अनस्त होना यहाँ अनिवार्य शर्त है।
✨ फल
सामान्य फल
अधि योग को शास्त्र में नेतृत्व और अधिकार का योग कहा गया है। ऐसे जातक किसी संस्था, समूह या समाज के मुखिया बनते हैं और उनकी बात को महत्व दिया जाता है।
शत्रु और स्वास्थ्य
छठे भाव के सम्मिलित होने से यह योग शत्रुओं पर विजय और रोगों से रक्षा देता है। प्रतिस्पर्धा में ये स्वाभाविक रूप से आगे रहते हैं।
कार्यक्षेत्र
प्रशासन, राजनीति, संस्थागत प्रबंधन, न्याय, शिक्षा और सामाजिक संगठन — इन क्षेत्रों में अधि योग वाले जातक उच्च पद प्राप्त करते हैं। सेना और पुलिस के वरिष्ठ पदों पर भी यह योग देखा जाता है।
जीवन-गुणवत्ता
यह योग दीर्घायु, आरोग्य और समृद्धि तीनों का संकेत देता है। जीवन के उत्तरार्ध में स्थिति निरंतर सुदृढ़ होती जाती है।
उपाय
बुधवार, गुरुवार और शुक्रवार — तीनों दिनों के संबंधित दान, शुभ ग्रहों के मंत्रों का जप तथा सोमवार को चंद्रमा के लिए किए गए उपाय इस योग को और बलवान बनाते हैं।
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