☎ हिंदी ज्योतिष सेवा 📅 16 October 2026

💍 विवाह मुहूर्त कैलकुलेटर | Marriage Date Calculator

आपकी दी हुई तिथि सीमा में विवाह के लिए उपयुक्त दिन — नक्षत्र, तिथि और वार के आधार पर

📅 तिथि सीमा चुनिए | Select Date Range

📊 मिले मुहूर्त दिन: 18 ⭐ उपयुक्त नक्षत्र: रोहिणी, मृगशिरा, मघा, उत्तरा फाल्गुनी, हस्त, चित्रा…

💍 विवाह के लिए उपयुक्त दिन

तिथिवारनक्षत्रराहु काल (छोड़ें)स्तर
16-10-2026 शुक्रवार श्रवण 10:40 AM – 12:07 PM अति उत्तम ✨
21-10-2026 बुधवार रेवती 12:07 PM – 1:34 PM उत्तम ✓
26-10-2026 सोमवार रोहिणी 7:46 AM – 9:13 AM अति उत्तम ✨
01-11-2026 रविवार मघा 4:09 PM – 5:30 PM अति उत्तम ✨
04-11-2026 बुधवार हस्त 12:07 PM – 1:28 PM अति उत्तम ✨
05-11-2026 गुरुवार हस्त 1:28 PM – 2:48 PM अति उत्तम ✨
06-11-2026 शुक्रवार चित्रा 10:46 AM – 12:07 PM उत्तम ✓
09-11-2026 सोमवार अनुराधा 8:05 AM – 9:26 AM उत्तम ✓
11-11-2026 बुधवार मूल 12:07 PM – 1:28 PM अति उत्तम ✨
13-11-2026 शुक्रवार उत्तराषाढ़ा 10:46 AM – 12:07 PM उत्तम ✓
20-11-2026 शुक्रवार रेवती 10:46 AM – 12:07 PM उत्तम ✓
25-11-2026 बुधवार मृगशिरा 12:07 PM – 1:28 PM उत्तम ✓
03-12-2026 गुरुवार उत्तरा फाल्गुनी 1:32 PM – 2:50 PM उत्तम ✓
04-12-2026 शुक्रवार हस्त 10:57 AM – 12:15 PM अति उत्तम ✨
06-12-2026 रविवार स्वाति 4:07 PM – 5:25 PM उत्तम ✓
11-12-2026 शुक्रवार मूल 10:57 AM – 12:15 PM अति उत्तम ✨
13-12-2026 रविवार उत्तराषाढ़ा 4:07 PM – 5:25 PM उत्तम ✓
14-12-2026 सोमवार श्रवण 8:22 AM – 9:40 AM अति उत्तम ✨

📖 विवाह का दिन चुनते समय — क्या जानना ज़रूरी है

उत्तर भारतीय परंपरा में विवाह का दिन तय करने के लिए तीन स्तरों की जाँच होती है। पहला स्तर — सामान्य मुहूर्त दिन: उपयुक्त नक्षत्र (रोहिणी, मघा, उत्तरा फाल्गुनी, हस्त, स्वाति, अनुराधा, मूल, उत्तराषाढ़ा, श्रवण, रेवती आदि), अच्छी तिथि और उपयुक्त वार — ये तीनों एक साथ आने वाले दिन ही यह कैलकुलेटर दिखाता है। हर दिन के साथ उस दिन का राहु काल भी दिया गया है — मुहूर्त दिन होने पर भी वह अवधि छोड़ने की परंपरा है।

दूसरा स्तर — मास और काल वर्जन: खरमास (मलमास), अधिक मास और चातुर्मास में विवाह सामान्यतः नहीं होते। गुरु और शुक्र के अस्त रहने की अवधि (गुरु-शुक्र तारा अस्त) विवाह के लिए वर्जित मानी जाती है — यह वर्ष में कुछ सप्ताह पड़ती है और पंचांग देखकर ही तय होती है। उत्तर भारत में देवउठनी एकादशी से लगन शुरू होने की लोकपरंपरा इसी गणित का सरल रूप है।

तीसरा स्तर — कुंडली आधारित अंतिम निर्णय: वर-वधू का जन्म नक्षत्र, चल रही महादशा-अंतर्दशा, चंद्राष्टम दिन और जन्म नक्षत्र का दिन छोड़कर अंतिम लग्न पंडित जी निकालते हैं। उसके बाद उस दिन की कौन-सी घड़ी सबसे शुभ है, यह सूक्ष्म चरण अलग है।

इस परिणाम का उपयोग कैसे करें: यहाँ मिलने वाली सूची को प्राथमिक चयन की तरह इस्तेमाल कीजिए — मैरिज हॉल बुक करने और रिश्तेदारों को बताने के लिए इतनी जानकारी काफ़ी है। सीमाएँ स्पष्ट हैं: यह सूची दोनों की कुंडलियाँ नहीं देखती, गुरु-शुक्र अस्त का हिसाब नहीं लगाती और दिन की सटीक लग्न घड़ी नहीं देती। अंतिम तिथि परिवार के पंडित जी से पक्की करवाना ही सही तरीक़ा है।

उससे पहले कुंडली मिलान देखा? वर-वधू की कुंडलियाँ यहाँ मुफ़्त बनाई जा सकती हैं। अन्य कार्यों के मुहूर्त के लिए मुहूर्त पन्ना देखिए; उस दिन के पंचांग विवरण के लिए आज का पंचांग और शुभ समय के लिए चौघड़िया काम आएँगे।