☎ हिंदी ज्योतिष सेवा 📅 16 October 2026
मुहूर्त

शुभ मुहूर्त — विवाह, गृह प्रवेश और नए कार्य का सही समय

Choosing an Auspicious Muhurat

20 December 2025  |  👁 664 बार पढ़ा गया  |  ⏱ लगभग 2 मिनट का लेख

शुभ मुहूर्त — विवाह, गृह प्रवेश और नए कार्य का सही समय

भारतीय परंपरा में किसी भी महत्वपूर्ण कार्य को शुभ समय, यानी ‘मुहूर्त’, में शुरू करने की मान्यता है। इसके पीछे विचार यह है कि जब आकाश में ग्रह और समय के तत्व अनुकूल हों, तब आरंभ किया गया कार्य सुगमता से आगे बढ़ता है। मुहूर्त कोई अंधविश्वास नहीं, बल्कि पंचांग के तत्वों का सुव्यवस्थित मेल है।

मुहूर्त किन तत्वों से बनता है

एक शुभ मुहूर्त मुख्यतः पाँच बातों से तय होता है — तिथि, वार (दिन), नक्षत्र, योग और करण। इनके साथ चंद्रमा की स्थिति और लग्न भी देखे जाते हैं। जब ये तत्व आपस में और कार्य के स्वभाव से मेल खाते हैं, तभी समय को शुभ माना जाता है।

विवाह मुहूर्त

विवाह के लिए विशेष रूप से अनुकूल नक्षत्र (जैसे रोहिणी, मृगशिरा, मघा, हस्त, स्वाति, अनुराधा), शुभ तिथियाँ और गुरु-शुक्र के अस्त न होने का ध्यान रखा जाता है। जब बृहस्पति या शुक्र अस्त हों, तो उस अवधि में विवाह टाल दिया जाता है। वर-वधू की कुंडली मिलान के बाद ही मुहूर्त तय किया जाता है।

गृह प्रवेश और अन्य कार्य

नए घर में प्रवेश के लिए स्थिर स्वभाव वाले नक्षत्र और शुभ तिथि चुनी जाती है, तथा ‘गृह प्रवेश’ आमतौर पर उत्तरायण के समय शुभ माना जाता है। व्यापार आरंभ, वाहन खरीद, नामकरण या मुंडन जैसे कार्यों के लिए अलग-अलग अनुकूल तत्व होते हैं।

राहुकाल और अशुभ समय से बचाव

शुभ समय चुनने के साथ-साथ अशुभ समय से बचना भी उतना ही ज़रूरी है। हर दिन का राहुकाल, यमगंड और गुलिक काल नए कार्यों के लिए टालने योग्य माने जाते हैं। इसी तरह भद्रा और अमावस्या जैसे काल में भी शुभ कार्य नहीं किए जाते।

आज के शुभ-अशुभ समय के लिए पंचांग और मुहूर्त पेज देखें।

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