☎ हिंदी ज्योतिष सेवा 📅 17 October 2026
नक्षत्र

नक्षत्र — 27 तारामंडल और आपका जन्म नक्षत्र

The 27 Nakshatras and Your Birth Star

24 February 2026  |  👁 137 बार पढ़ा गया  |  ⏱ लगभग 2 मिनट का लेख

नक्षत्र — 27 तारामंडल और आपका जन्म नक्षत्र

जहाँ राशियाँ आकाश को बारह भागों में बाँटती हैं, वहीं नक्षत्र उसे सत्ताईस भागों में बाँटते हैं। इसीलिए नक्षत्र किसी व्यक्ति के स्वभाव का राशि से भी सूक्ष्म चित्र देते हैं। ‘जन्म नक्षत्र’ वह तारामंडल है जिसमें जन्म के समय चंद्रमा स्थित होता है, और यही भारतीय ज्योतिष की कई गणनाओं का आधार है।

नक्षत्र और उनके चरण

प्रत्येक नक्षत्र चार ‘चरणों’ (पादों) में बँटा होता है, यानी कुल 27 × 4 = 108 चरण। हर चरण किसी एक राशि से जुड़ा होता है, इसलिए नक्षत्र और चरण मिलकर तय करते हैं कि चंद्रमा किस राशि में है। बच्चे के नामकरण का पहला अक्षर भी परंपरागत रूप से इसी जन्म-नक्षत्र-चरण से चुना जाता है।

नक्षत्रों के स्वामी ग्रह

सत्ताईस नक्षत्र नौ ग्रहों में क्रमवार बँटे हैं — केतु, शुक्र, सूर्य, चंद्र, मंगल, राहु, गुरु, शनि और बुध। यही क्रम विंशोत्तरी दशा का आधार बनता है। उदाहरण के लिए अश्विनी, मघा और मूल नक्षत्र केतु के स्वामित्व में हैं, इसलिए इन नक्षत्रों में जन्मे लोगों की दशा केतु से आरंभ होती है।

नक्षत्र से क्या-क्या पता चलता है

जन्म नक्षत्र से व्यक्ति का मूल स्वभाव, मानसिक प्रवृत्ति, अनुकूल दिशा और यहाँ तक कि विवाह-मिलान का बड़ा हिस्सा तय होता है। कुंडली मिलान में अष्टकूट के अधिकांश गुण नक्षत्र पर ही आधारित होते हैं। इसीलिए भारतीय परंपरा में जन्म राशि से भी अधिक जन्म नक्षत्र को महत्व दिया जाता है।

गंडमूल नक्षत्र

कुछ नक्षत्र — अश्विनी, आश्लेषा, मघा, ज्येष्ठा, मूल और रेवती — ‘गंडमूल’ कहलाते हैं। इनमें जन्म होने पर परंपरागत रूप से 27वें दिन शांति-पूजा की सलाह दी जाती है, यद्यपि इनका फल हमेशा अशुभ नहीं होता।

अपना जन्म नक्षत्र और उसका फल जानने के लिए नक्षत्र फल देखें या कुंडली बनवाएँ।

मुफ़्त हिंदी ज्योतिष सेवाएँ | Free Hindi Astrology Tools

कुंडली, गुण मिलान, राशिफल — सब कुछ मुफ़्त