कुंडली मिलान क्यों?
विवाह दो व्यक्तियों ही नहीं, दो कुंडलियों का भी मिलन है। अष्टकूट मिलान वर-वधू के स्वभाव, स्वास्थ्य, संतान और समृद्धि की अनुकूलता जाँचने की उत्तर भारतीय पद्धति है।
आठ कूट और उनके अंक
वर्ण (1): आध्यात्मिक स्तर का मेल। वश्य (2): पारस्परिक आकर्षण। तारा (3): स्वास्थ्य-सौभाग्य। योनि (4): स्वभावगत-दैहिक अनुकूलता। ग्रह मैत्री (5): राशि-स्वामियों की मित्रता, मानसिक तालमेल। गण (6): देव-मनुष्य-राक्षस प्रकृति का मेल। भकूट (7): राशियों की पारस्परिक स्थिति — परिवार-समृद्धि। नाड़ी (8): संतान और स्वास्थ्य — सर्वाधिक महत्वपूर्ण।
कितने गुण चाहिए?
18 से कम — अनुकूल नहीं; 18-24 — स्वीकार्य; 25-32 — उत्तम; 33-36 — अति उत्तम। परंतु केवल अंक पर्याप्त नहीं — नाड़ी और भकूट दोष का विचार अनिवार्य है।
नाड़ी दोष और भकूट दोष
समान नाड़ी होने पर नाड़ी दोष (0 अंक) और 2/12, 5/9, 6/8 राशि-स्थिति पर भकूट दोष (0 अंक) बनता है। दोनों के परिहार-नियम शास्त्रों में हैं — जैसे राशि-स्वामियों की मित्रता से भकूट दोष भंग।
गुण मिलान के साथ और क्या देखें?
मंगल दोष का मिलान, दोनों की दशा-स्थिति, सप्तम भाव और नवमांश कुंडली — पूर्ण मिलान में ये सब सम्मिलित हैं।
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📖 English Summary — Kundli Milan — Understanding 36 Gunas of Ashtakoota
Ashtakoota Milan checks bride-groom compatibility across eight kootas totalling 36 points — Varna, Vashya, Tara, Yoni, Graha Maitri, Gana, Bhakoot and Nadi. Learn what each koota means and how doshas cancel.
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