☎ हिंदी ज्योतिष सेवा 📅 16 October 2026
अंक ज्योतिष

अंक ज्योतिष — मूलांक और भाग्यांक का रहस्य

Numerology — Moolank and Bhagyank

11 January 2026  |  👁 463 बार पढ़ा गया  |  ⏱ लगभग 3 मिनट का लेख

अंक ज्योतिष — मूलांक और भाग्यांक का रहस्य

अंक ज्योतिष इस विचार पर आधारित है कि हर अंक की अपनी एक ऊर्जा और स्वामी ग्रह होता है, और हमारी जन्मतिथि इन अंकों के माध्यम से हमारे स्वभाव व भाग्य की झलक देती है। यह वैदिक ज्योतिष से स्वतंत्र एक पद्धति है, पर दोनों में ग्रहों की भूमिका समान रूप से केंद्र में रहती है।

मूलांक कैसे निकालें

मूलांक आपकी जन्म-तारीख (केवल दिन) का एकल अंक होता है। यदि आपका जन्म किसी माह की 23 तारीख को हुआ है, तो 2 + 3 = 5, यानी आपका मूलांक 5 हुआ। यदि जन्म 9, 18 या 27 को हो तो मूलांक 9 रहेगा। मूलांक व्यक्ति के मूल स्वभाव और तात्कालिक प्रतिक्रियाओं को दर्शाता है।

भाग्यांक कैसे निकालें

भाग्यांक पूरी जन्मतिथि — दिन, माह और वर्ष — के सभी अंकों को जोड़कर एकल अंक तक लाने से बनता है। उदाहरण के लिए 23-08-1990 के लिए 2+3+0+8+1+9+9+0 = 32, फिर 3+2 = 5 — भाग्यांक 5। भाग्यांक जीवन की समग्र दिशा और दीर्घकालिक भाग्य की ओर संकेत करता है।

अंक और उनके स्वामी ग्रह

हर अंक का एक ग्रह होता है — 1 सूर्य, 2 चंद्र, 3 गुरु, 4 राहु, 5 बुध, 6 शुक्र, 7 केतु, 8 शनि और 9 मंगल। जैसे मूलांक 1 वाले लोग स्वाभाविक नेता माने जाते हैं, 5 वाले चंचल और बुद्धिमान, 8 वाले अनुशासित परंतु धीमे-किंतु-स्थायी सफलता पाने वाले।

अंक ज्योतिष का व्यावहारिक उपयोग

लोग नाम की वर्तनी, शुभ अंक, शुभ रंग और महत्वपूर्ण तिथियाँ चुनने में अंक ज्योतिष का सहारा लेते हैं। परंतु इसे मार्गदर्शन के रूप में लेना चाहिए, न कि हर निर्णय का एकमात्र आधार। सबसे भरोसेमंद विश्लेषण तब मिलता है जब अंक ज्योतिष को जन्म कुंडली के साथ मिलाकर देखा जाए।

अपना मूलांक और भाग्यांक जानने के लिए अंक ज्योतिष पेज पर अपनी जन्मतिथि दर्ज करें।

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